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और कछू न रुचै ध्रुव पीय कौं, भावै यहै सुकुमारि लडाई
श्री ध्रुवदास जी कहते है कि प्रियतम श्री कृष्ण को श्री राधा की छवि और उनको लाड़ लड़ाने के अतिरिक्त अन्य कुछ भी रूचिकर नहीं है।
shloka
और कछू न रुचै ध्रुव पीय कौं, भावै यहै सुकुमारि लडाई
श्री ध्रुवदास जी कहते है कि प्रियतम श्री कृष्ण को श्री राधा की छवि और उनको लाड़ लड़ाने के अतिरिक्त अन्य कुछ भी रूचिकर नहीं है।