SaintsBooksRagasShlokasStrotrasPoems
HomeGranthasयुगल स्नेह पत्रिका
All Books
Sacred Scripture

युगल स्नेह पत्रिका

Verses & Passages

4 items
general

देखा देखी रसिक न ह्वैहैं, यह मारग है बंका

श्री राधा कृष्ण के रसिक भक्तों को देख कर उनकी नक़ल करने से कोई रसिक कैसे हो सकता है, यह रस का मार्ग तो बड़ा टेड़ा है। [1] गीदड़ तो भय से वन-वन अकेला भटकत...

dham

रसमय धाम सृष्टि

वृन्दावन जैसा रसमय धाम, जिसकी रसमय अलौकिक कथा भी जग से न्यारी है, एक मात्र श्री रासेश्वरी [श्री राधा] की कृपा से ही प्राप्त किया जा सकता है, इसका और ...

dham

अचरज धाम नाम वृन्दावन, रसमय सृष्टि जहाँ है

श्रीवृन्दावन नामक एक आश्चर्यमय धाम है, जहाँ रसमय सृष्टि है। [1] इस वृन्दावन में रसभोगी आश्चर्यमय श्रीगौर-श्याम निरन्तर निवास करते हैं। [2] यहाँ सखिय...

general

यह रस ब्रह्मलोक पाताल अवनी हूँ

यह ऐसा अद्बुत रस है जो ब्रह्म लोक एवं पाताल लोक में नहीं देखने को मिलता, इस वृंदावन रस के लिए वैकुंठ के जन भी तरसते हैं। [1] यही वृंदावन रस श्री रा...