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Sacred Scripture

ब्रज विहार

ग्रन्थ के पद एवं श्लोक

51 items
general

कदम तरे ठाढ़े दोऊ बतरावें

कदम वृक्ष के नीचे दोनों [राधा कृष्ण] बातें कर रहे हैं। अचानक वर्षा होने लगी, झकझोर से हवा भी चलने लगी, अब यह दोनों सोचने लगे कि अब कहाँ भाग कर जाएँगे?...

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आवौ री यह शोभा

सखी सखी से कहती है कि आओ हम श्री राधा कृष्ण की इस अद्भुत शोभा को निहारें जब वह गलबहियाँ डालें झूला झूल रहे हैं। [1] वृंदावन की इन हरि भरी कुंजों मे...

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युगल छबि देखि मेरो हियरा सिरात

श्री नारायण स्वामी सखी भाव में एक सखी से कहते हैं "हे सखी, युगल किशोर श्यामाश्याम नींद से भरे हुए झूमते हुए चल रहे हैं, अंग-अंग शिथिल हो गए हैं, इनकी ...

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सुन्दर अनूप जोरी, अति मन को भावती

आज मार्ग में मैंने देखा की श्री राधा कृष्ण कुञ्ज से आ रहे हैं, जिनकी छबि अति सुन्दर एवं अनुपम है, जो मेरे ह्रदय को बहुत भाति है। [1] श्री श्यामाश्याम...

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सखि नँदलाल न आवन पावै

श्री राधारानी सखी से कहतीं हैं कि हे सखी, देखना नन्दलाल (श्री कृष्ण) आने न पायें। चाहे जितना तुम्हें अनुनय-विनय करें लेकिन मेरे महल के भीतर चरण रखने न...

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आज विराज रहे मणि मंदिर

आज मणि मंदिर में नंदनंदन श्री कृष्ण एवं वृषभानु किशोरी श्री राधा की जोड़ी विराज रही है। [1] केली करते करते ऐसा प्रतीत होता है कि रात्रि का पहर युग सम...

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ब्रजमण्डल के बास की

ब्रज-वास की आशा तो श्री ब्रह्माजी भी नित्य करते हैं; ऐसे जीव धन्य हैं, जिनका ब्रज में नित्य निवास है।

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विहरत बाग झूलन के काजे

दिव्य दंपति श्री राधा कृष्ण कुंजों में झूला झूलने के लिए विहरण कर रहे हैं। दोनों मधुर स्वर में गीत गान कर रहे हैं, एवं बीच बीच में मुरली बजा रहे हैं। ...

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यह नैना रिझवार नये री

यह नैना श्री श्यामसुन्दर का एक बार ही रूप निहार कर नित्य रिझवार हो गये हैं जिसका ऐसा प्रभाव पड़ा है कि घर बार का स्वतः ही त्याग होगया और एक फ़क़ीर बन ...

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ऐसो आनन्द सखी आज लों न देखो कबूँ

(सखी वचन) हे सखी, आज दिव्य दंपति ने जैसा रस बरसाया है वैसा कभी भी देखा नहीं। वे स्वयं ही झूल रहे हैं एवं स्वयं ही झूला झुला रहे हैं। [1] बादलों की ...

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नन्दनन्दन बन बंशी बजाई री

एक सखी कहती है कि नंदनंदन श्री कृष्ण ने वन में वंशी बजाई जिसका श्रवण कर तन की सुधि नहीं रही और एक ही क्षण में मति बौरा गई। [1] श्री कृष्ण का मुख शरद...

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बिघन हरन मंगल करन

युगल सरकार श्री राधा कृष्ण के चरण समस्त विघ्नों का हरण करने वाले एवं सदा मंगल करने वाले हैं। श्री नारायण स्वामी जी कहते हैं कि अपने निज जनों के जीवन क...

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रसिया को नारि बनावौ री

(श्रीजी वचन सखी प्रति) आज रसिया (श्री कृष्ण) को नारी बनाओ। उनके कटि में लहंगा, उर में कंचुकी एवं शीश पर चुनरी उड़ा दो। [1] उनके कपोलों पर गुलाल, आँखो...

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या साँवरे सों मैं प्रीति लगाई

श्री नारायण स्वामी कहते हैं "सांवरे श्री कृष्ण से मुझे प्रेम हो गया है। अब मैं अपने कुल अथवा कलंक से नहीं डरूंगी, अपने मनका ही करुँगी।" [1] मैं बिच ब...

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प्रिय प्रीतम के गुण ललित, निगमागम को सार

प्रिया प्रियतम (श्री राधा कृष्ण) के गुण मनोहर हैं जो वेदों एवं शास्त्रों का सार हैं। जो भी इनका गान एवं श्रवण करता है वह निश्चित ही भव से पार हो जाता ...

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लीला युगलस्वरूप की, दुख भंजन सुख दैन

युगल सरकार (श्री राधा कृष्ण) की लीलाएं दुखों को दूर करती हैं और सुख प्रदान करती हैं। जो लोग इन लीलाओं का नित्य श्रवण एवं गान करते हैं, वे चैन (आनंद) प...

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साँवरे क्यों मोसों रिस मानी

हे श्यामसुन्दर! क्यों मुझसे नाराज़ हो? मैंने तो तुम्हारे कारण अपना घर-बार छोड़ दिया है और गलियों में दीवानी सी बनकर डोल रही हूँ। [1] लोकलाज, कुलरीति,...

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चाहे तू योग करि

चाहे तू योग किया कर, अथवा भृकुटी के मध्य उसका ध्यान किया कर, अथवा चाहे तू उसका नाम, रूप मिथ्या जान कर उसे निहारने की कोशिश किया कर। [1] भले ही तू अपन...

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प्यारी जी तिहारे बिन कल न परत है

श्री लाल जी कहते हैं: हे प्यारी जू [श्री राधा], आपके बिना मुझे एक क्षण को भई चैन नहीं मिलता। मंदिर, अटारी, सुंदर चित्रों से सजी फुलवारी—इनमें से कोई भ...

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निरख निरख शोभा हर्ष

श्री राधा की अद्भुत रूप माधुरी को निहार कर श्री कृष्ण के हृदय को अपार आनंद होता है। तब माननी श्री राधा को मनाने के लिए वे अत्यंत विनम्र होकर, डरते-डरत...

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मैं कहा जानूँ कुंजबिहारी

सखी के वचन श्री कृष्ण के प्रति - हे कुंजबिहारी! मुझे नहीं पता कि श्री वृषभानु की चंद्रमुखी पुत्री, श्री राधा, तुमसे किस कारण रूठ गई हैं। [1] जबसे वे ...

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सघन बन झूलें दोऊ सुकुमार

वृंदावन के हरे-भरे, सघन वन में युगल किशोरी श्री राधा-कृष्ण एक संग झूला झूल रहे हैं। उनके हृदय हर्षोन्माद से भरे हुए हैं, वे बार-बार एक-दूसरे की छवि नि...

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प्राणनाथ या जगत में सो अभागिनी नार

एक गोपी कहती है—हे प्राणनाथ (श्री कृष्ण)! इस संसार में वह स्त्री (अथवा जीव-रूपी नारी) अत्यंत अभागिनी है, जो आपको त्यागकर पुनः सांसारिक कुटुंब और परिवा...

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मनमोहन सम सुन्दर को है

सखी के श्री राधा से वचन- मनमोहन श्रीकृष्ण जैसा सुन्दर और कोई नहीं। मेरे अनुमान से तो उनकी समानता कोई दूसरा नहीं कर सकता। [1] उनकी चंचल चितवन और उज्ज्...

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धनि व्रजवासी नारि नर

समस्त ब्रजवासी धन्य हैं; श्री वृन्दावन धाम धन्य है, जिसे सुरपति निशिदिन प्रणाम करते हैं।

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मन चेतु नहीं पछितावैगो

अरे मन, अब तू जाग जा, नहीं तो तू बहुत पछतायगा। तुझे जिसको भजना चाहिए, उनको तूने भुलाया हुआ है। अत्यंत कृपालु श्री कृष्ण का नित्य भजन कर, केवल वही तुझे...

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आवौ सखी मिलि मंगल गावौ

आओ सखी, हम मिलकर मंगल गान करें, मेरे द्वार पर आज कुंवर कन्हैया पधारे हैं। [1] घर बैठे मैंने परम निधि प्राप्त कर लिया है, मेरे समान सुन्दर भाग्य आज और...

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विनय करूँ कर जोर

मैं रसिक जनों के चरणों में हाथ जोड़कर विनय करता हूँ कि वे मुझ पर ऐसी कृपा करें, जिससे मेरे हृदय में नित्य ही युगल-चरणों का स्मरण और अनुराग बना रहे।

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जाहि लगन लगी घनस्यामकी

जिसे श्याम सुंदर की साँची लगन लग जाती है वह पग कहीं रखना चाहते हैं परन्तु कहीं और ही उनके पग पड़ते हैं, एवं धाम की सुधि ही भूल जाती है। [1] वह बड़भ...

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आज इन दोउन पै बलि जैये

आज युगल सरकार पर बलिहार जाइए। आज रोम रोम की छवि (जो दिव्य आनंद एवं रस युक्त है ) पर बलिहार जाईये, जिसे देखकर नैन एक क्षण का वियोग बर्दाश नहीं कर सकते।...

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पंकज विषधर मीन मृग

हे प्यारी जू (श्री राधा)! कमल, सर्प, मछली, मृग, बाण, खंजन पक्षी और बादाम — ये सब तुम्हारी आँखों के बिना मूल्य के गुलाम हैं, क्योंकि तुम्हारे नेत्रों क...

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आज इन दोउन पै बलिहारी

आज हम दिव्य दंपति श्री राधा कृष्ण पे अपने आप को न्योछावर करते हैं। श्याम सुंदर की अनुपम सुंदरता लाखों "कामदेवों" को लज्जित करने वाली है और श्री राधा क...

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भज मन श्री राधा गोपाल

भज मन श्री राधा गोपाल, गोल कपोल, अधर बिंबाफल, लोचन परम विशाल। - श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, पद सिद्धान्त (10) अरे मन तू श्री राधा कृष्ण का भजन क...

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गोविन्द गोविन्द गोविन्द भज रे

हे जीव, जिनका न कोई आदि है और न ही अंत, जो समस्त शास्त्रों वेदों के सार स्वरूप हैं, ऐसे गोविंद [भगवान कृष्ण] का भजन कर जिन्हें सुर, नर, मुनि एवं भगवान...

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मोहि मति रोकै री तू एरी ब्रज नागरी

जब श्री कृष्ण माननी श्री राधा से मिलने पहुंचते हैं तो श्री राधा की एक सखी उन्हें भीतर प्रवेश करने से रोक देती हैं। (श्री कृष्ण सखी से कहते हैं) - हे ...

dham

धनि धनि श्रीवृन्दावन धाम

(राग शहानौ) “धनि धनि श्रीवृन्दावन धाम” श्री वृंदावन धाम धन्य है। “जाकी महिमा बेद बखानत, सब बिधि पूरण काम” श्री वृंदावन धाम की महिमा वेद गाकर बखान कर ...

general

साँवरे की जिन निरखी मुसिक्यान

जिन्होंने सांवरिया की मुस्कान की झलक देख ली, वह तो बिना बरछी एवं बाण के ही उसी क्षण घायल हो गए। उनके लिए मानो एक क्षण के लिए भी धीरज धारण करना वैसे ही...

general

करू मन, नंदनँदनको ध्यान

अरे मन, नन्दनन्दन श्री कृष्ण का स्मरण कर। [1] हे मन, मुझे ध्यान से सुन, यह महान अवसर तुझको फिर से प्राप्त नहीं होगा। [2] श्री कृष्ण के मुख पर उनके घुं...

general

तजि कुतर्क जो नित सुनै

श्री नारायण स्वामी कहते हैं— ‘श्री युगल सरकार अपने निज-महल का निवास उन्हीं को प्रदान करते हैं, जो समस्त प्रकार के तर्क–कुतर्क का त्याग कर सदैव युगल-ली...

general

लाल तेरे जादु भरे दोउ नैन

हे बाँके बिहारी लाल, तुम्हारे नैन जादु भरे हैं जो ऐसा मोहिनी मंत्र डाल देती हैं कि जिसकी चितवन की कोर ही हमारे चित्त को वश में कर लेती है। [1] यह नै...

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मनमोहन जाकी दृष्टि परत

श्री नारायण स्वामी कहते हैं "जिसे एक बार श्री कृष्ण की झलक मिल जाये, तो उसके ह्रदय की दशा बड़ी विचित्र हो जाती है। तब उसे उसका भवन नहीं सुहाता, न उसे भ...

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वन्दौ श्रीराधा ब्रजचन्द

“करत अनेक भांति सों लीला, भक्तजन मन देत अनंद।” वे अपने भक्त और प्रेमी जनों को आनंद प्रदान करने के लिए विभिन्न प्रकार की लीलाएं करते हैं। “एक वदन सों ...

shloka

भज मन श्री राधा गोपाल

अरे मन तू श्री राधा कृष्ण का भजन कर, जिनके गोल गाल हैं, होंठ मीठे फल के जैसे एवं नयन अत्यंत विशाल हैं।

shloka

तजि कुतर्क जो नित सुनै, यह लीला रसपुञ्ज

श्री नारायण स्वामी कहते हैं "श्री युगल सरकार अपने निज महल का निवास उन लोगों को प्रदान करते हैं जो हर प्रकार के तर्क कुतर्कों को त्यागते हुए सदैव युगल ...

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प्यारी नित ऐसे ही तुमें निहारूंहै

सखी के श्री राधा के प्रति वचन - हे प्यारी जू! मेरी यही अभिलाषा है कि मैं नित-निरंतर आपको इसी प्रकार निहारता रहूँ। आपके इस चंद्रमा के समान सुंदर मुखमं...

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धनि व्रजवासी नारि नर

समस्त ब्रजवासी धन्य हैं, वृंदावन धाम धन्य है जिन्हे सुरपति निशिदिन प्रणाम करते हैं।

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ब्रजमण्डल के बास की, करत चतुर्मुख आस

ब्रजवास की आशा श्री ब्रह्मा जी भी नित्य करते हैं, ऐसे जीव धन्य हैं जिनका ब्रज में नित्य निवास है।

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करु मन जुगलचरण अनुराग

अरे मन, युगल सरकार के कमल चरणों से प्रेम करो। तुम अनंत काल से अज्ञानता में सो रहे हो। हे मूर्ख, यह जागने का समय है। जो तेरी भक्ति के पक्ष में एवं उसमे...

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आज इन दोउन पै बलि जैये

आज युगल सरकार पर बलिहार जाइए। आज रोम रोम की छवि (जो दिव्य आनंद एवं रस युक्त है ) पर बलिहार जाईये, जिसे देखकर नैन एक क्षण का वियोग बर्दाश नहीं कर सकते।...

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करू मन, नंदनँदनको ध्यान

अरे मन, नन्दनन्दन श्री कृष्ण का स्मरण कर। [1] हे मन, मुझे ध्यान से सुन, यह महान अवसर तुझको फिर से प्राप्त नहीं होगा। [2] श्री कृष्ण के मुख पर उनके घुं...

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साँवरे की जिन निरखी मुसिक्यान

जिन्होंने सांवरिया की मुस्कान की झलक देख ली, वह तो बिना बरछी एवं बाण के ही उसी क्षण घायल हो गए। उनके लिए मानो एक क्षण के लिए भी धीरज धारण करना वैसे ही...