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यदि श्रीगोकुलाधीशो धृतः सर्वात्मना हृदि
हे मन, यदि तूने श्रीगोकुल के अधिपति श्री कृष्ण को सम्यक प्रकार से अपने हृदय में धारण कर लिया है, तो फिर लौकिक और वैदिक फलों की क्या आवश्यकता रह जाती ह...
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सर्वदा सर्वभावेन भजनीयो
ब्रजेश्वर श्री कृष्ण को सर्व भाव से सर्वदा भजन करना चाहिए। यह ही तुम्हारा एकमात्र धर्म है। इसके अतिरिक्त अन्य कोई दूसरा धर्म नहीं है।