सभी ग्रन्थ
ग्रन्थ के पद एवं श्लोक
5 itemsgeneral
यह मन मारि जिवाईये, जियत न आवै काज
रसिकों द्वारा प्रतिपादित भगवत् प्रेम के मार्ग का अनुसरण करने के लिए पहले इस मन को मारकर फिर उसे दोबारा जीवित करना होता है, तभी इस मार्ग में चला जा सकत...
general
जब लग सहज न बदलई, फुरै न जहाँ-तहाँ भाव
जब तक स्वभाव नहीं बदलता एवं ह्रदय में भाव स्थिर नहीं हो जाता तब तक प्रेम पंथ का पाना कठिन है। बनावट करने से कोई कार्य सिद्ध नहीं होता।
general
मूरत नैंनन में रमै
प्रियतम का स्वरूप नेत्रों में सदा बसा रहता है, और हृदय उसके गुणों से भरा रहता है। ऐसे प्रेमी की अवस्था को बाहरी दृष्टि से कोई समझ नहीं जा सकता, प्रेम ...
shloka
भजन भजन सव कोऊ कहै
कहने को तो सभी मुख से भजन और भक्ति की बातें करते हैं, लेकिन वास्तव में भक्ति मार्ग पर चलना बहुत कठिन होता है। जब इन्द्रियाँ, शरीर और सांसारिक गुण पूरी...
general
Murat Nainan Mein Rami
mūrata naiṃnana meṃ ramai, hiya mathi guna rahai pūridaśā na koū samajhi hai, prema pahucanau dūri- Shri Neh Nagridas Ji, Shri Neh Nagridas Ji Ki Vani...