ग्रन्थ के पद एवं श्लोक
19 itemsश्री वृंदावन छाँड़ि कै जो भटक्यौ दिसि देस
श्री वृंदावन धाम का त्याग कर यदि मैं किसी अन्य देश की ओर भटकूँ तो मेरी यह बात सत्य हो जाए कि मुझे सर्प डस ले।
कुँज कुँज निरखत फिरौ
मैं श्री वृन्दावन में विचरण करते हुए विभिन्न कुंजों को निहारा करूँगा एवं यमुना जल में स्नान करूँगा। श्री वृन्दावन को छोड़कर मैं कभी भी कहीं और नहीं जाऊ...
वृंदावन सुखरासि है, आनंद ठाऊँ ही ठाऊँ
श्री वृंदावन धाम सुख की राशि है, जहां ठौर ठौर में आनंद ही आनंद है। मेरी यही अभिलाषा है कि ऐसे श्री वृंदावन धाम में विराजित श्री राधा वल्लभ लाल को त्या...
सिर काटौ पावक जरौ
भले ही मेरा सिर काट दिया जाए, आग में झोंक दिया जाए, पानी में डुबो दिया जाए, या जहर पीने के लिए मजबूर किया जाए, फिर भी मैं प्रतिज्ञा करता हूं कि मैं श्...
कोऊ कामी क्रोधी कहौ, कोउ लोभी कहौ नाऊँ
कोई चाहे मुझे कामी कहे, क्रोधी कहे अथवा लोभी नाम से पुकारे, परंतु मैं श्री वृंदावन का त्याग कर किसी भी अन्य जगह नहीं जाऊँगा।
अन्न धन भंडार भर दे
चाहे मुझे अन्यत्र स्थान में अन्न, धन आदि के भंडार अथवा सोने के महल ही क्यों न दिए जायें, परंतु मैं श्री वृंदावन को त्याग कर कभी कहीं नहीं जाऊंगा।
जो बोलौ तो साच कहौं नातर बोलौ नाहि
यदि बोलूँगा तो केवल सत्य ही बोलूँगा, नहीं तो मौन रहूँगा, और किसी की भी कभी निंदा नहीं करूँगा। इस दृढ़ संकल्प के साथ, मैं सदैव वृंदावन में वास करने का ...
नेह तजौ घर की घरन
हे मन! घर-परिवार के मोह को छोड़ दे, और सेवकों का साथ भी त्याग दे। मेरी यही प्रतिज्ञा है कि मैं श्रीधाम वृंदावन को छोड़कर अन्यत्र नहीं वास करूँगा।
मारौ मोहि तारौ कोउ, सब दुतकारहु गाऊं
भले ही कोई मुझे मारे अथवा पार लगाये, सब को दुतकार के मैं सदा वृंदावन के गुणों को गाऊँगा। मेरी यही प्रतिज्ञा है कि मैं श्रीधाम वृंदावन को त्याग कर कहीं...
लाज तजौ मसकत करो यौ निर्वाह कराउं
मैं समस्त प्रकार की लज्जा का त्याग कर, चाहे कितनी ही कठिनाइयाँ क्यों न सहनी पड़ें, श्रमपूर्वक अपने जीवन का निर्वाह कर लूँगा, परंतु मैं वृंदावन को छोड़...
कोउ कामी क्रोधी कहौ कोउ लोभी कहो नाऊं
चाहे कोई मुझे कामी कहे, क्रोधी कहे, अथवा लोभी कहे, परंतु मैं वृंदावन को छोड़कर कहीं और नहीं जाऊँगा, चाहे कोई मेरी कितनी ही निंदा करे।
रैन रढौं पानी पियौ पातर सीथ चुगाउं
चाहे मुझे रातभर धरती पर ही सोना पड़े, केवल जल पीना पड़े और रूखा-सूखा अन्न ही भोजन में मिले, फिर भी मैं वृन्दावन को कभी नहीं छोड़ूँगा।
वासी की आसा करौ वासी हाथ विकाऊं
मेरी आशा वृन्दावन-वासियों पर ही है, मैं अपने को उन्हीं के हाथ समर्पित करता हूँ। अब मैं श्री धाम वृन्दावन को त्याग कर कहीं नहीं जाऊँगा।
अंवर कंवर जौ जुरै रुखौउ उत्तम भोग
चाहे पहनने को वस्त्र और ओढ़ने को कंबल, और खाने को उत्तम अथवा रूखा भोग मिले या न मिले, तथा सुख-दुःख जैसे भी संयोग हों, कैसी भी परिस्थिति हो, वृन्दावन म...
Laaj Tajou Maskat Karo
Laaj Tajou Maskat Karo, Yau Nirvah Karaun.Shri Vrindavan Chhandi Ke, Anant Na Kit Hun Jaun.- Shri Hita Damodar Das, Nem Battisi (11)I will cast aside ...
Koau Kaami Krodhi Kaho Kou Lobhi Kaho Naun
Koau Kaami Krodhi Kahau, Koau Lobhii Kaho Naaun.Shri Vrindavan Chhaandi Kai, Ant Na Kit Hun Jaaun.- Shri Hita Damodar Das, Nem Battisi (9)Some may cal...
Rain Radhaun Pani Piyo Patar Sitha Chugau
Rain Radhaun Paani Piyau, Paatar Seetha Chugaun.Shri Vrindavan Chhandi Kai, Anat Na Kit Hun Jaun.- Shri Hita Damodar Das, Nem Battisi (4)Even if I sle...
Vasi Ki Aasa Karo Vasi Haath Vikaun
Vasi Ki Aasa Karo, Vasi Haath Vikaun.Shri Vrindavan Chhadi Kai, Anat Na Kit Hoon Jaun.- Shri Hita Damodar Das, Nem Battisi (6)My hope rests only upon ...
Anvar Kanvar Jo Jure Rukho Utam Bhog
Anvar Kanvar Jo Jurai, Rukhau Uttam Bhog.Vrindavan Pari Rahau, Dukh Sukh Kuch Sanjog.- Shri Hita Damodar Das, Nem Battisi (19)Whether one has garments...