ग्रन्थ के पद एवं श्लोक
8 itemsश्रीराधा राधा नाम की रटना जिनके सार
जिनके जीवन का सार “श्री राधा-राधा” नाम का भजन है, ऐसे रसिक जनों पर मैं नित्य बलिहार जाता हूँ।
रसिक छके युग नेह में
रसिक प्रेमी सदा युगल के प्रेम से छके रहकर, समस्त विधि निषेध एवं अन्य किसी की परवाह न करते हुए बेपरवाही में रहते हैं। वे रूप माधुरी में मस्त होकर समस्त...
बिना भजन युगलाल के तरै न तरिहैं जान
समस्त रसिकों के वाक्यों का यही परम सत्य और प्रामाणिक निष्कर्ष है कि श्रीयुगल सरकार के अनन्य एवं निष्काम भजन के बिना इस संसार-सागर से न तो कोई आज तक तर...
गौर श्याम के प्रेम की
रसिकों के ह्रदय में क्षण-क्षण श्री राधा कृष्ण के प्रेम की लहर उठती रहती है जिससे दिन-प्रतिदिन उनकी दीनता भाव बढ़ता रहता है।
हमता ममता मन भरी, व्यर्थ बजावत गाल
कुछ तथाकथित साधकों की अहंता और सांसारिक ममता मन में ज्यों की त्यों बनी रहती है और ऊपर से वे व्यर्थ में स्वयं को रसिक कहलाने में लगे रहते हैं। श्री रूप...
रसिक रसिक सब कोऊ कहै
“रसिक रसिक” तो स्वयं को हर कोई कहलाना चाहता है परंतु रसिकता आनी अत्यंत कठिन होती है। साधक बाहर से तो दीनता का स्वाँग कर लेता है परंतु अंतर मन में दीनत...
रसिकन की रसना सदा, जपै युगल को नाम
रसिकों की रसना सदा युगल नाम जपती है एवं उनका मन दिन-रात, आठों पहर, युगल (श्री राधा कृष्ण) के रूप में लीन रहता है।
प्राणजीवन के नेह में तन मन से रहे चूर
जिसका तन-मन अपने प्राण-जीवन-धन (श्री श्यामा-श्याम) के प्रेम में सदा उन्मत्त रहता है, वही सच्चा (शूरवीर) रसिक है। चाहे वह घर में रहे या वन में, उसका मन...