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ग्रन्थ के पद एवं श्लोक
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श्री हरिवंसी श्री हरिदासी सर्वोपरि रसरासी
श्री हित हरिवंश महाप्रभु और श्री स्वामी हरिदास जी महाराज का रसोपासना-मार्ग सर्वोपरि हैं, जो दिव्य प्रेम-रस की राशि (पुंज) हैं। इसी प्रकार श्री विट्ठलव...
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जै जै रसिक उपासक जिनकी, पद रज मस्तक धारौं
मैं रसिक संतों को प्रणाम करता हूँ और उनके चरण-कमलों की धूल अपने मस्तक पर धारण करता हूँ, क्योंकि उन्हीं की कृपा से मुझे नित्य किशोरी, श्री राधा महारानी...
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जय जय भानुकुंवरि जय राधा अशरण शरण
अशरण को शरण प्रदान करने वाली भानुनंदिनी श्रीराधा की जय हो। हे प्यारीजू, अपने परम कृपालु विरद (ख्याति) को विचारते हुए, इस दीनजन की रक्षा करें।