श्री किशोरी अलि
जीवन चरित
श्री श्री किशोरी अलि वाणी संग्रह
श्री वृन्दावन, वृन्दावन वृन्दावन कहु रे
नित्य ही वृंदावन वृंदावन कहो, बिना विलंभ किये, वृंदावन की रज की शरण ग्रहण करो।
रसिक दोऊ मंडल रास रचावैं
दो रसिक जन रास मंडल में रास रचा रहे हैं। चारों ओर सखी जन झूम रही हैं और वीणा एवं मृदंग बजा रही हैं। [1] रास के मध्य जब श्री छबीली जी अद्बुत गति से नृ...
श्री राधा आराध्य हमारी
श्री राधा ही हमारी आराध्य हैं। हमारी राजधानी वृंदावन है जहां हमें सुंदर कुंज बिहारी का संग प्राप्त है। [1] श्री ललिता इत्यादि से हमारा बहन के समान सं...
लाड़िली ! कब मोहि अपनाओगी
श्री किशोरी अली जी श्री राधा से प्रार्थना करते हैं "हे लाड़िली ! मुझे कब अपनी सेवा का सुख प्रदान करोगी। अपना हस्त कमल मेरे मस्तक पर रखकर मुझे कब श्री व...
रहौ मेरे नैंनन मैं यह ध्यान
श्री किशोरी अली जी कहते हैं "मेरी आँखों में तो दामिनी स्वरुप श्री राधा एवं नवघन स्वरुप श्री श्यामसुंदर का ही ध्यान बना रहता है।" [1] दोनों श्री श्याम...
हमारैं माई राधा नाम की टेक
हम केवल श्री राधा नाम का जाप करने की प्रतिज्ञा करते हैं। श्री कृष्ण जो सभी रसिकों के सिरमौर है वो भी श्री राधा का नाम ऊँचे स्वर से पुकारते हैं। [1] ...
वृंदावन बसि, वृंदावन बसि, वृंदावन सुखदाई रे
वृन्दावन में बसना ही परम सुखदायी है क्योंकि यह वृन्दावन ही सब प्रकार से सुख देने वाला है जहाँ हमारे लाड़ले दम्पति (श्री राधा-कृष्ण) सदैव अखंड रूप से वि...
जै जै रसिक उपासक जिनकी, पद रज मस्तक धारौं
मैं रसिक संतों को प्रणाम करता हूँ और उनके चरण-कमलों की धूल अपने मस्तक पर धारण करता हूँ, क्योंकि उन्हीं की कृपा से मुझे नित्य किशोरी, श्री राधा महारानी...
किशोरी मोहे कब अपनावोगी
हे किशोरी जी, मुझे आप कब अपनाओगी ? कब आप अपने कमल हस्त को मेरे मस्तक पर रख कर मुझे वृंदावन का वास प्रदान करोगी। [1] कब आप अपना सुंदर स्वरूप मुझे इन न...
आधौ नाम तारिहै राधा
आधौ नाम तारिहै राधा - श्री किशोरी अली यदि प्रेम पूर्वक श्री राधा का आधा शब्द अर्थात 'रा' अक्षर ही रटा जाए तो समस्त प्रकार की भगवद प्राप्ति की बाधाओ...
श्री हरिवंसी श्री हरिदासी सर्वोपरि रसरासी
श्री हित हरिवंश महाप्रभु और श्री स्वामी हरिदास जी महाराज का रसोपासना-मार्ग सर्वोपरि हैं, जो दिव्य प्रेम-रस की राशि (पुंज) हैं। इसी प्रकार श्री विट्ठलव...
लड़ैती अपनाये की लाज
कीर्ति कुमारी श्री लड़ैती जी [राधा] जो समस्त रसिकों की सिरताज हैं वह अवश्य ही मुझे अपना बना कर मुझपर कृपा बरसाएँगी। [1] हे स्वामिनी, आप तो गरीब निवाज...
ब्रजमण्डल वृंदावन मैं फिरी सफल किए नहिं पाय
यदि ब्रजमण्डल एवं वृंदावन में भ्रमण कर भी अपना जीवन सफल न बनाया, तो मानो यह दुर्लभ मानव-जीवन पाकर भी मूर्खता-वश नष्ट कर दिया।
श्री राधा सी स्वामिनि जाकै, कमी कौन बात की ताकैं
जिसकी [जिस जीव की] श्री राधा सी स्वामिनी हैं उसे किस बात की कमी है ? वह ऐसी स्वामिनी हैं जो श्री वृंदावन धाम की ठकुरानी हैं एवं अखिल ब्रह्मांडों के स्...
याही तैं, रसिकन की बानी, गहि तू तत्त्व छनी है
रसिकों की वाणी परम तत्त्व का सार है, क्योंकि उसमें श्री श्यामाश्याम का नित्य निवास है। श्री किशोरी जी के चरणों की शरण को छोड़कर भटकने में क्या लाभ होगा...
जाके मन में साँचौ नेह
श्री राधा ऐसी परम दयालु हैं कि अति दुर्गम बात भी सहज ही पूर्ण कर देती हैं। श्री किशोरी अलि जी कहते हैं कि पुण्यों का परिणाम तो जीव को उसकी अवधि के अनु...
संतन की संगति पुनीत जहाँ निस दिन
जहाँ संतों की शुभ संगति दिन-रात सुलभ होती है, जहाँ यमुनाजी के पवित्र जल में स्नान का सौभाग्य प्राप्त होता है, और जहाँ दही का दान लेने वाले श्री कृष्ण ...
श्यामा जू अब मैं अति अकुलायौ
हे श्यामा जू, मैं अब अति अकुला गया हूँ। तन, मन के दुःख अब मुझसे सहे नहीं जाते इसी कारण तुमको अब पुकार रहा हूँ। [1] कृपया मेरी रक्षा करें क्योंकि मैं ...
राधा प्यारी रूप उजारी मोतन नेक हेरो
श्री कृष्ण श्री राधा से कहते हैं कि हे रूप से उज्जवल श्री राधे, मेरी ओर भी तनिक निहार लीजिये। हे मेरी प्यारी, मैं तुम्हारी छवि पर अपना तन-मन-धन न्यौछा...
रसिक जननि कौ संग मनोहर
श्री किशोरी अलि जी पुकार कहते हैं कि रसिकों का संग अत्यंत मनोहर और कल्याणकारी है; जो साधक उनके संग में रहकर उनकी वाणी का मनन करता है, उस पर श्री प्रिय...
पलकन सों मन दुचित रहै री
हे प्यारी जू (श्री राधे), पलकों के कारण मेरा चित्त अस्थिर रहता है। जब भी मैं आपके वदन को निहारता हूँ तब ये बीच में गिर कर अंतर बना देते हैं, जिससे मन ...
हे वृन्दाटवि मोहि अपनैयै
हे वृन्दावन, मुझे कृपाकर अपनाओ ! तुम ही श्री राधा का प्रकट रूप हो, और किसे अपनी प्रार्थना सुनाऊँ ? [1] माता के अतिरिक्त एक शिशु के अवगुणों को कौन त्य...
तिहारो परम दयाल सुभाव
हे किशोरीजी, आपका परम दयालुता का स्वभाव है क्योंकि आप जीवों के अवगुणों की ओर देखती ही नहीं हैं। आपके इस स्वभाव के कारण ही मेरे ह्रदय का उत्साह बढ़ चला...
किशोरी, मोहि देहु वृन्दावन वास
हे किशोरी जू, मुझे वृन्दावन का वास प्रदान कीजिये, जहाँ मैं हाथ में करुवा लेकर एवं गले में प्रसादी गूंजा माला धारण कर कुञ्ज में निवास प्राप्त करूँ। [1]...
करत बिहार अखण्ड बिपिन बर बिहारी की सुखकारनि
परम सुख प्रदान करने वाली श्रीराधा, श्रीधाम वृन्दावन में बिहारी जी (श्रीकृष्ण) के साथ अखण्ड नित्य-विहार करती हैं और उसी रस के द्वारा उनका पोषण कर उन्हे...
उत्कंठा अति ही बढ़ी, तुव दरसन के काज
हे सर्वोपरि स्वामिनी श्री राधे! आपके दर्शन की उत्कट लालसा मेरे हृदय में प्रबल हो उठी है। अपनी करुणामयी दया-दृष्टि मुझ पर डालकर मुझे कृतार्थ करें।
सखी रूप निज अपनपौ, ठहरावै निरधार
जिसका आत्म-स्वरूप सखी भाव में पूर्णतः प्रतिष्ठित हो चुका है और जो निरंतर श्रीराधा की सखी के रूप में ही स्वयं को अनुभव करता है, केवल उसी अनन्य साधक को...
जासों दुख जाइ कहौ सोइ रोवै दूनौ दुख
जिससे ह्रदय का दुख कहना होता है वही अपना दुगना दुख रोता है, अब कैसे किसी से अपने मन की बात को कहा जाए। [1] इस कलयुग में परमार्थ (दूसरे का हित करना) क...
कृपा तुम्हारी तन में मन में, बचनन सदा विराजै
हे स्वामिनी श्री राधे! आपके तन, मन और वचनों में सदा करुणा ही विराजती है। मुझ जैसे दीन-हीन पर भी आपकी असीम कृपा निरंतर बरसती रहती है।
हम याही भरोसे निर्भय भए
हम इसी भरोसे पर तो निर्भय हुए हैं कि हमारी लाड़ली जू (राधा ) परम कृपाल एवं करुणा सिंधु हैं जिन्होंने हमारे अवगुणों को बिना विचार किये ही हमारे हाथों क...
आज प्रगटी भान कुँवरी
आज भानु नंदिनी श्री राधिका प्रकट हुई हैं। समस्त ब्रज में आज बधाई बज रही है एवं नारियाँ मंगल गान कर रही हैं। [1] समस्त रसिकों के मन को यह भाने वाली भा...
धनि धनि वृंदावन के बासी
श्री वृंदावन के वासी धन्य हैं, जिनकी प्रशंसा स्वयं शुकदेव जी, उद्धव जी, ब्रह्मा जी, लक्ष्मी जी, आदि करते हैं। [1] वृंदावन के वासी किसी भी अन्य देवी-द...
स्वामिनि मोहि कबै अपनैहौ
हे स्वामिनीजू, मुझे कब आप अपनाओगी! हे श्री वृंदावन की महारानी, प्रीतम को सुख प्रदान करने वाली श्री राधे! कब मुझे अपनी राजधानी श्री धाम वृंदावन में वास...
हमारो जीवन राधा नाम
"श्री राधा" नाम ही मेरा जीवन है। जो भी वृषभानु नंदिनी श्री श्यामा जू [राधा] का स्मरण करता है, वह परम विश्राम को प्राप्त होता है। [1] मुझे कीर्ति कुँव...
कीरति-कुमारि तुम बड़ी रिझवारि
हे कीर्तिकुमारी श्री राधिका, तुम तो दीन जनों पर सदा प्रसन्न रहती हो (कृपा करने वाली हो), मेरी भी विनय को ह्रदय में लाकर मेरी ओर करुणा की दृष्टि डालिये...
पलकन सों मन दुखित रहै री
श्री कृष्ण प्यारी श्री राधा से कहते हैं कि "हे प्यारी जू, पलकों के कारण मेरा मन दुखी रहता है। आपके श्रीअंगों के दर्शन में पलकें गिरने से जो विलम्ब होत...
निस दिन आस बन बास की लगी ही रहै
श्री वृंदावन वास की ही आशा निश दिन लगी रहे, बस एक यही उपाय विचारना चाहिए। [1] एक क्षण भी मन को चैन नहीं, यह जीवन की आयु व्यर्थ ही नष्ट हो रही है और म...
रूपरासि स्वामिनी हमारी
रूप की राशि, श्री राधा महारानी ही हमारी स्वामिनी हैं। यह ऐसी अलबेली सरकार हैं जो न केवल सखियों को प्राणों के समान प्यारी हैं एवं श्री कुंज बिहारी भी इ...
मेरो मन श्यामा-श्याम हर्यो री
मेरा मन युगल किशोर, श्री श्यामा-श्याम ने पूरी तरह मोह लिया है! उनकी कोमल मुस्कान और बांसुरी की मनमोहक ध्वनि ने मानो मेरे ऊपर जादू कर दिया है। [1] उ...
हित की रीति सबन ते न्यारी
हित (प्रेम) की रीति सबसे विलक्षण है, जिसे या तो लड़ैती श्री राधा जानती हैं या कुंजविहारी श्री कृष्ण ही जानते हैं। [1] इस प्रेम का एक चिन्ह भी समस्त चौ...
प्रगट भई कीरति लली
कीर्ति नंदिनी श्री राधा प्रकट हुई हैं, जिसकी शुभ सूचना चारों ओर फैल गयी है। सब सखियाँ गलियों में मंगल गीत गाते हुए महल की ओर चली जा रही हैं।
आसा कब पुरवौगि मन की
हे श्री राधारानी! मेरे हृदय की इच्छा को कब पूर्ण करोगी? कब मैं निर्भय होकर केवल श्री वृंदावन धाम की रज का नित्य सेवन करूँगा (अर्थात् कब वृंदावन वास कर...
प्रेम पंथ को पैड़ौ ही न्यारो
दिव्य प्रेम का मार्ग अद्वितीय और निराला है। इसे वृषभानु-दुलारी श्री राधा और व्रजराज श्री कृष्ण से अधिक कौन जान सकता है? [1] इसी कारण रसिकों को श्री व...
छबि निधि बिहरत प्रीतम प्यारी
सुंदरता की निधि, श्री प्रीतम प्यारी (श्री राधा कृष्ण), वृंदावन में विचरण कर रहे हैं। वे सघन बादलों से बरसते हुए जल और वृंदावन के हरे-भरे वनों को निहार...
जय जय भानुकुंवरि जय राधा अशरण शरण
अशरण को शरण प्रदान करने वाली भानुनंदिनी श्रीराधा की जय हो। हे प्यारीजू, अपने परम कृपालु विरद (ख्याति) को विचारते हुए, इस दीनजन की रक्षा करें।
मंगल निधि श्री राधिका मंगल राधा नाम
श्री राधिका मंगल निधि हैं एवं “राधा” नाम समस्त प्रकार से मंगल करने वाला है। जो परम विश्राम की चाह रखता हो उसे निरंतर “राधा राधा” नाम रटना चाहिए।
हम बासी देस दिवाने के
हम उस भूमि के वासी हैं, जहाँ के लोग दिव्य प्रेम रस में मग्न रहते हैं। [1] हम किसी अन्य देवी देवताओं को नहीं मानते क्योंकि हम तो परम करुणामयी, अलबेली ...
सुख दाता सुख दायिनी साहिबिनी सिरताजम
श्री राधा समस्त सुखों की प्रदाता स्वामिनी हैं, जो समस्त अधिपतियों में मुकुटमणि हैं! वे श्री वृंदावन धाम में विलास करने वाली महारानी हैं और दीन जनों की...
श्री वृषभांन कुंवरि कृपा करि
हे वृषभानु दुलारी, श्री राधा! कृपा कर मेरी ओर अपनी करुणा भरी दृष्टि डाल दीजिए। [1] हे दीनों की रक्षक स्वामिनी! इस दीन-हीन की बाँह पकड़कर, जैसे भी हो,...
श्रीवृषभान से राने जहाँ
वह स्थान जहाँ श्री वृषभानु राजा हैं और रानी कीर्ति का यश चारों ओर फैला हुआ है। [1] जहाँ स्वयं मोहन (श्रीकृष्ण) प्रफुल्लित रहते हैं, क्योंकि वहाँ किशो...
रसिक रसीली रंग भरी रमनी कमनी नारि
रसीली श्री राधा रंग-रूप से परिपूर्ण, रसिकों को सुख प्रदान करने वाली परम सुंदर और रमणीय स्त्री हैं। वे प्रेमरस की बहती धारा हैं, स्वयं रस का रूप हैं। व...
मेरी स्वामिनि ललित किसोरी
मेरी स्वामिनी, ललित छवि वाली श्री राधा हैं जो अपने प्रियतम श्रीकृष्ण के साथ वृंदावन के कुंजों में बाँह में बाँह डालकर विहार करती हैं। [1] वर्षा ऋतु क...
परमानन्द स्वरुपिनी मनहरनी सुख रास
श्री राधा परम आनंद की स्वरूपा हैं, जो मन का हरण करने वाली और सुख की अनंत रसधारा हैं। वे अपने प्रियतम श्रीकृष्ण के हृदय में रस की तरंगें उत्पन्न करती ह...
रुप हू के रुप तै अनूप रुप प्यारी को
श्रीराधा का रूप-सौंदर्य ऐसा है कि साक्षात रूप भी उनके अनुपम रूप-सौंदर्य की तुलना में फीका लगता है। वे समस्त संसार को उज्ज्वल करने वाली तथा जगजीवन श्री...
कृष्ण-गुरु द्युति परा बहु गायमाना
श्री राधा, जो श्रीकृष्ण की गुरु हैं, परम ज्योति स्वरूपा हैं, बहु-प्रशंसित हैं, यमुना तट पर विहार करती हैं, जो कृष्णस्वरूप की सार हैं, जिनकी दीर्घ भुजा...
हम तो योंही भक्त कहाए
हम तो केवल नाम के भक्त हैं। रसिक संतों की संगति को त्यागकर, हम संसार और बिमुखों की ओर ही भागते रहे। [1] शेर का स्वाँग भर रखा, पर चाल-चलन कुत्ते जैसा ...
प्राण प्रिया प्राणेश्वरी, लाड लड़ी सुकुवांर
श्री राधा प्राणों से भी अधिक प्रिय, प्राणों की स्वामिनी, अत्यंत लाड़ली एवं सदा सुकुमार अवस्था वाली हैं। लाड़ली जी ‘अलक लड़ैती’ (लाड़ लड़ाने योग्य) हैं...
उत्कंठा अति ही बढ़ी तुव दर्शन के काज
हे परम सिरताज श्रीराधे! तुम्हारे दर्शन की उत्कंठा मेरे हृदय में अत्यंत तीव्र हो गई है। अब दया कर मुझ पर अपनी कृपा-दृष्टि अवश्य ही डालो!
हम सौं बाँक न कीजिये, सुनो बाँकेबिहारी
एक भक्त श्री प्रिया जी [श्री राधा] के बल से बिहारीजी [कृष्ण] से कहता है कि हे बाँके बिहारी, सुनो! हम से तो तुम बाँकपन (टेडापन) मत ही करो। हम किशोरी जी...
पुरी मधुपुरी आदि लै, द्वारावति जे ठाम
पुरी, मधुपुरी (मथुरा) और द्वारका आदि जितने भी पवित्र तीर्थ स्थल हैं, ये सब प्रभु के चरणचिह्नों से पावन माने जाते हैं। परंतु यह वृन्दावन धाम साक्षात रस...
जिन जिन अपराधिन सिर नायौ
जिन-जिन अपराधी जीवों ने सिर झुकाकर और रसना से आपका नाम उच्चारित किया, उन्हें आपने अपने निज परिकर में स्थान देकर अपनी सेवा का अधिकारी बना लिया। [1] हे...
रतन जतन अँसौ करो सतन करों बनवास
सांसारिक सुखों को त्यागकर ऐसा प्रयत्न करो कि रसिकों की राजधानी श्रीधाम वृंदावन में रसिकों के संग वास मिल जाए। फिर वहाँ की लताओं-पाताओं के मध्य विराजित...
बिहारी लाल बाँकरे जू अनोखे
श्री किशोरी अलि जी, श्री बिहारी जी से निवेदन करते हैं— हे बिहारी जी! आप अनोखे बाँके हैं। विविध प्रकार के अनोखे ख्याल लीलाएँ करते-करते कहीं मुझे धोखे म...
अब तो कृष्ण नाम मन अटक्यौ
मेरा मन अब श्री कृष्ण नाम में अटक गया है, जिसके उच्चारण के स्वाद से मुझे ह्रदय में अति-आह्लाद का अनुभव हो रहा है, जो क्षण-क्षण में बढ़ रहा है। [1] युग...
हमारें बल इक राधिका प्यारी, प्यारी हू सुख देत सहज ही, जानत निजु सहचारी।
मेरा बल केवल एक श्री राधा प्यारी हैं। उनके समान कृपालु कौन है जो अपनी सहचरी मान कर नित्य (हर क्षण) रस प्रदान करती हैं। श्री अली किशोरी कहते हैं कि हम ...
हमैं तो इक आस किशोरी जू की
हमैं तो इक आस किशोरी जू की। रूप-माधरी निरखें निसि-दिन, छबि-निधि गोरी जू की। - श्री किशोरी अली, किशोरी अली ग्रंथावली हमें तो एक आस श्री किशोरी जी से...
हमारें माई राधेजू प्रान-अधार
हमारें माई राधेजू प्रान-अधार। अली किशोरी गाइ प्रिया-गुन, लहत सदा खुख-सार। - श्री किशोरी अली, किशोरी अली ग्रंथावली केवल और केवल श्री राधा रानी ही हमार...
श्री हित हरिवंश गुसाईं बिनु
श्री हित हरिवंश गोस्वामी जी के बिना श्री राधा की अनन्य और अंतरंग उपासना का वास्तविक रहस्य कौन जान सकता है? और श्री स्वामी हरिदास जी के बिना युगल-स्वरू...
गोस्वामि हरिवंश जू बचन कह्यौ पद माँहि
गोस्वामी श्री हित हरिवंश जी ने भी अपने एक पद में उद्घोष किया है कि जब तक जीव श्री वृन्दावन की दिव्य रज का सेवन (आश्रय) नहीं करता, तब तक उसे दिव्य और श...
कृपा तें अनहोनी हू होई
हे श्रीराधे! कृपा से असंभव भी संभव हो जाता है। कृपा की महानता को जानकर मैं यही कहता हूँ की कृपा के समान कुछ नहीं है। [1] केवल कृपा ही आपके तन, मन, वच...
नेहिन की गति जानत भाखी
प्रेमियों की गति प्रेमी ही जानते हैं। जैसे गंगा जी में रहने वाला पपीहा पक्षी भी साक्षात गंगा जी के पानी को छोड़कर स्वाति बूँद की ओर ही निहारता है। [1]...
जय जय श्री वृन्दावन धाम
श्री वृंदावन धाम की सभी महिमा, असीम आनंद का निवास और रसिकों के लिए अनुकूल और आरामदायक स्थान है। वृंदावन के दर्शन (दृष्टि) होने से, सभी आध्यात्मिक इच्...
हम श्री राधा महारानी जू के बल अभिमानी
हम सदा ही श्री किशोरी जी के बल के अभिमानी हैं। हमारा मन सदैव प्रिय प्रियतम के निज महल वृन्दावन में रहता है, जो कि रसिक संतों और युगल सरकार की राजधानी...
मन लाग्यो भान दुलारी सों
मेरा मन वृषभानु की दुलारी, श्री राधा में रम गया है। वे माता कीर्ति के कुल का गौरव बढ़ाने वाली, समस्त दुखों का नाश करने वाली और श्रेष्ठ बरसाने में वास ...
अनुपम वृन्दावन की शोभा
वृन्दावन धाम की शोभा अत्यंत अनुपम है जिसका दर्शन करने मात्र से ही हृदय में प्रेम का अंकुर पैदा हो जाता है ।
हमारैं इनके वचन प्रमान
इन निम्नलिखित रसिकों के वचनों (वाणियों) को ही मैं प्रमाण मानता हूँ। गुसाईं श्री हित हरिवंश एवं स्वामी श्री हरिदास जी ने जिस रस का गान किया है वही रस ...
जो कोउ श्री राधा जस गावे
श्री किशोरी अलि जी कहते है, 'श्री राधा' की महिमा अंतहीन है। जो जीव श्री राधा नाम को ह्रदय से पुकारता है तो श्रीकृष्ण, जो श्री राधा नाम के अति लोभी है...
हमारी लाड़िली ही इष्ट
हमारी इष्टदेव तो केवल लाडिली सरकार श्री राधारानी ही हैं, जिनका नित्य नाम जप करने से कभी भी कुछ भी अनिष्ठ (अमंगल) नहीं हो सकता। श्री किशोरी अली कहते है...
रूपकी रासि किशोरी मोहनी मन हर्यो
रूप की राशि किशोरी श्री राधिका मन का हरण करने वाली हैं जिन्होंने अपनी चँचल दृष्टि के कटाक्ष के बाणों से प्रियतम [कृष्ण] का हृदय बेध दिया है। [1] प्रे...
गौरांगी गुणनिधि प्रिया सकल कला की ख़ान
गौरवर्ण श्री राधा दिव्य गुणों की निधि एवं समस्त कलाओं की खान हैं। उनकी चाल गर्वित उन्मत्त हाथी के समान है एवं वे समस्त विद्या-गान की मूल स्रोतस्वरूपा ...
हमारो धन इष्ट राधिका प्यारी
हमारी इष्ट और जीवन धन केवल श्री राधिका प्यारी ही हैं। यही हमारी ठाकुर हैं, यही ठकुरानी हैं और यही हमारा सर्वस्व हैं।
हमैं तौ इक आस किशोरीजू की
हमैं तौ इक आस किशोरीजू की। रूप-माधुरी निरखें निसि-दिन, छबि-निधि गोरी जू की। भूख लगै तौ सीथ प्रसादी, पावैं भोरी जू की। अली किशोरी करें खवासी, पिय-चित-च...
जै जै श्री वृषभानुजा नंद सुवन पद कंज
वृषभानु दुलारी श्रीराधा और नंदनंदन श्रीकृष्ण के चरण-कमलों की जय-जयकार हो, जो रसिक जनों के मन को निरंतर प्रेम-रस में रंगते रहते हैं।
हमैं तौ बल एक लाड़िलीजू कौ
हमारा बल एक मात्र श्री राधा रानी है। हमें किसी और से क्या काम (चाहे वो भगवान् हो)? हमारी स्वामिनी और सर्वस्व तो एक मात्र किशोरी जी ही हैं।
जो कोऊ श्री राधा यश गावै
यदि कोई श्री राधा रानी के यश का गान करता है, तो राधा नाम के परम आसक्त एवं राधा रूप रस के लोभी श्री कृष्ण तत्क्षण दौड़कर वहाँ आ जाते है। [1] जिस प्रकार...
हमारी राधे प्रीति-रीति पहिचानैं
प्रीति की रीति को तो एकमात्र हमारी श्री राधा ही जानती हैं। इनके सिवा इस निष्काम प्रेम की रीति के मार्ग को कोई नहीं जानता है।
हमैं इक लाड़िली सौं काम
हमें तो केवल श्री राधा से ही काम है जो हमारी स्वामिनी हैं। हर दिन, हर क्षण, हम श्री राधा के रूप का ही चिंतन करते हैं और हम श्री राधा के नाम का ही जप क...
अनुपम वृन्दावन की शोभा
वृन्दावन धाम की शोभा अत्यंत अनुपम है जिसका दर्शन करने मात्र से ही हृदय में प्रेम का अंकुर पैदा हो जाता है |
वृन्दावन, वृन्दावन, वृन्दावन कहि रे
हे जीव! "वृंदावन वृंदावन वृंदावन" कह, और श्री वृंदावन धाम की शरण शीघ्र ग्रहण कर। [1] अपनी सांसारिक कामनाओं की पूर्ति हेतु क्यों तू देश देश भटक रहा है...
जय जय श्री वृन्दावन धाम
श्री वृंदावन धाम की सभी महिमा, असीम आनंद का निवास और रसिकों के लिए अनुकूल और आरामदायक स्थान है। वृंदावन के दर्शन (दृष्टि) होने से, सभी आध्यात्मिक इच्छ...
टेढ़े रहें सदा मोहन रसिया सों
श्री किशोरी अली कहते हैं कि हम मोहन लाल रसिया से भी हमेशा टेड़े रहते हैं, और उनको भी अटपटी वाणी सुनाने में नहीं चूकते | हमारा मन सदा अलमस्त निकुंज में ...
हमारें बल इक राधिका प्यारी, प्यारी हू सुख देत सहज ही, जानत निजु सहचारी।
मेरा बल केवल एक श्री राधा प्यारी हैं। उनके समान कृपालु कौन है जो अपनी सहचरी मान कर नित्य (हर क्षण) रस प्रदान करती हैं। श्री अली किशोरी कहते हैं कि हम ...
जो कोउ श्री राधा जस गावे
श्री किशोरी अलि जी कहते है, 'श्री राधा' की महिमा अंतहीन है। जो जीव श्री राधा नाम को ह्रदय से पुकारता है तो श्रीकृष्ण, जो श्री राधा नाम के अति लोभी है ...
Shri Vrishabhan Kunavari Kripa Kari
Shri Vrishabhan Kunavari Kripa Kari,Meri Or Nihaaro Ju. [1]Mose Heen Deen Kon Kar Gahi,Apanon Kari Prati Paaro Ju. [2]Gaavat Harivansii Haridasi,Virad...
Sukh Daata Sukh Dayini Sahibini Sirtaj
Sukh Daata Sukh Dayini, Sahibini Sirtaj.Rani Vipin Vilasini, Param Garib Nivaj.- Shri Kishori Ali, Radha Namavali (21)Shri Radha is the bestower of su...
Hum Basi Des Divane Ke
(Raga Jhanjhoti)Hum Basi Des Divane Ke.Devi Devan Kaun Nahin Mane, Chakar Ajab Amane Ke.Rahen Hazur Liye Rukh Sanmukh, Khas Neelambar Bane Ke.Kau Kaha...
Mangal Nidhi Shri Radhika Mangal Radha Naam
Mangal Nidhi Shri Radhika, Mangal Radha Naam.Radha Radha Raton Karin, Jo Chahe Vishram.- Shri Kishori Ali, Radha Namavali (3)Shri Radhika is the treas...
Jay Jay Bhanukunwari Jay Radha Asharan Sharan
Jay Jay Bhanukunwari Jay Radha Asharan Sharan.Apno Virad Vichar Pyari Palahu Din Jan.- Shri Kishori Ali, Saar Chandrika (1)Glory, glory to Sri Bhanu’s...
Hamarain Inake Vachan Praman
Hamaarain Inake Vachan Praman.Shri Harivansh Gusain, Shri Haridas Kiye Je Gaan. [1]Vyas Saman Vyas Hain Mere, Dhruv Dhruvpad Ke Vakta.Vitthalvipul Bih...
Gaurangi Gunanidhi Priya Sakal Kala Ki Khaan
Gaurangi Gunanidhi Priya, Sakal Kala Ki Khaan.Garbeeli Gaj Gamini, Vidyagaan Nidan.- Shri Kishori Ali, Radha Namavali (10)Fair-complexioned Shri Radha...
Shri Vrishabhan Se Rane Jahaan
Jo Pai Karama Hi Mere Bhari. Tau Radhe Sahivani Meri, Sahivi Kaha Tihari. Sharanagata Vapu Hota Alaukika, Kahata Purana Pukari. [1]Bara-bara Meri Vina...
Rasik Raseeli Rang Bhari Ramani Kamni Naari
Rasik Raseeli Rang Bhari, Ramani Kamni Naari.Ras Salita Ras Roopini, Ras Krida Ki Saari.- Shri Kishori Ali, Radha Namavali (14)Rasīlī Shri Rādhā, full...
Meri Swamini Lalit Kisori
(Raag Malar)Meri Swamini Lalit Kisori.Pritam-Sang Kunj Ke Aangan, Biharat Bahan Jori. [1]Hiy Harakhat Nirakhat Ban-Sobha, Paavas Ritu Piy-Gori.Adbhut ...
Parmanand Swarupini Manharni Sukh Raas
Parmanand Swarupini, Manharni Sukh Raas.Piy Hiy Ur Kullolini, Preetam Hiye Nivas.- Shri Kishori Ali, Radha Namavali (23)Shri Radha is the embodiment o...
Krishna-guru Dyuti Para Bahu Gayamana
Krishna-guru Dyuti Para Bahu Gayamana Krrishnatate ViharatanvitaKrishnasara. Krishnanena Kamthamanushamjita DirghabahuhKrishnapriya Vasatu Me Hrridaye...
Gosvami Harivavsha Ju Bachan Kahyau Pad Manhi
Gosvami Harivansha Ju, Bachan Kahyau Pad Mamhi, Ya Raj Ke Seye Bina, Anat Kahum Sukh Nahi.- Shri Kishori AliGosvāmī Śrī Hita Harivaṁśa Himself declare...
Man Lagyo Bhan Dulari Son
(Rag Soratha)Man Lagyo Bhan Dulari Son.Kirti Kul Mandan Dukh Khandan, Var Barsane Bari Son.Gori Bhori Vais Kishori, Bhrikuti Nain Aniyari Son. [1]Dami...
Jai Jai Shri Vrishabhanuja
Jai Jai Shri Vrishabhanuja, Nand Suvan Pad Kanj.Rasik Janan Ke Manan Kon, Karat Raho Ras Ranj.- Shri Kishori AliGlory, glory to the lotus feet of Śrī ...
Hum To Yonhi Bhakt Kahaye
Hum To Yonhi Bhakt Kahaye. Rasik-Janan Ki Sangati Tajikai, Bimukhan Sanmukh Dhaye. [1]Svaang Sinh Kau Dhari, Swaan Sam Man Nai Chal Chalay. Bishayan K...
Pran Priya Praneshwari Laad Ladi Sukuvar
Praan Priya Praaneshwari, Laad Ladi Sukuvaar.Alak Ladaiti Laadili, Lalna Param Udaar.- Shri Kishori Ali, Radha Namavali (25)Shri Radha, dearer than li...
Ratan Jatan Anso Karo Satan Karo Banvas
Ratan Jatan Anso Karo, Satan Karon Banvaas.Latan-Latan Tari Nain Bhari, Nirakho Bibidh Bilas.- Shri Kishori Ali (Letter to Ratan Ali)Give up worldly p...