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Sacred Scripture

श्री बिहारिन देव जी की वाणी

ग्रन्थ के पद एवं श्लोक

20 items
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मेरे विषै विसन वर वाम

श्री बिहारिनदेव जी कह रहे हैं कि प्रेमी रसिको की चरण रज के प्रताप से मेरे प्राण और मन के विष (दुर्गुण) एवं व्यसन (दुराचरण) सर्वसिरोमनि, सर्वश्रेष्ठ एक...

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कृष्ण चरित्र त्रिधा त्रिभुवन में

श्री बिहारी दास जी कहते है कि कृष्ण चरित्र को ही लें। ब्रज लीला, मथुरा लीला, एवं द्वारका लीला के आधार पर तीन प्रकार का है। उनकी भक्ति का रस भी अलग अलग...

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मेरे गति ब्रजपति कैं ब्रजवासी

ब्रजवासी जन ही मेरे जीवन के एकमात्र शरण्य हैं, जो श्री राधा कृष्ण के निजी जन हैं। उनकी प्राण जीवन धन श्री राधा हैं, जो सदैव श्री वृंदावन में विलास परा...

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अब हौं कासौं बैर करौं

श्री बिहारीजी स्वयं अपने श्रीमुख से पुकार-पुकार के इस बात को कह रहे हैं कि "प्राणिमात्र के घट-घट में सदाकाल मैं ही विराजता हूँ ", तब हम किससे वैर कर ...

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चाँपति चुपरति सेज पर बिहारीदास मुख मौन

श्री प्रिया प्रियतम सेज पर विराजमान हैं, जिनके चरणों को सखी प्रेमपूर्वक अभ्यंजन (दबा) कर रही है। विहार की पराकाष्ठा के रस में सब मौन हैं। श्री प्रिया ...

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वृन्दावन रस भूमि यह पेंड पेंड पर भेद

वृन्दावन की यह भूमि रस-सिद्ध और अत्यंत गूढ़ है, जहाँ रस-उपासना में प्रत्येक चरण पर सूक्ष्म भेद प्रकट होते हैं। किसी को कोई रस खारा प्रतीत होता है, किस...

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श्री बिहारीदास ब्रज यौं बसौ

हे बिहारीदास! ब्रज में प्रसिद्ध करुवा और कामरी की रहनी से ही बसना चाहिए। ब्रजवासियों के घर से जो टूक-भात मिले, उसी में संतोष रखो।

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रज छाँड़ै रज पाइयै

जो साधक रजोगुण का त्याग कर देता है, वही नित्य-विहारिणी श्री राधा की इस अद्भुत वृन्दावन-रज का अधिकारी बनता है; और जो इस वृन्दावन-रज को अपने पास रखता है...

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नस्वर रज लगि जूझई, नस्वर पूत कहाइ

नाशवान धन-संपत्ति एवं पुत्र आदि के लिए ही संसार में लोग मरे जा रहे हैं, जबकि वे वास्तव में स्थायी नहीं हैं। किन्तु जो लोग समस्त आपदा-विपत्ति सहकर भी व...

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काहूँ कैं बल बाँह कौ

श्री बिहारिन देव जी विनम्र भाव से कहते हैं कि कोई अपने बाहुबल पर गर्व करता है, कोई अपने अनेक शिष्यों पर; किंतु मेरा तो एकमात्र आधार अनन्य नृपति स्वामी...

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जो करै भजन में अंतरौ

जो तुम्हारी नित्य विहार उपासना में अंतर डाल दे, उन सब से तुमको भली भाँति वैराग्य कर लेना चाहिए। सम्मिलित साधना करने से तो केवल परिश्रम ही होगा, तुम्हा...

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नांम न कछू बिहार बिनु

नित्य विहार रसमय उपासना में भाव से विहीन ख़ाली (केवल) नाम लेना तुम छोड़ दो क्योंकि भाव के बिना केवल नाम लेना ऐसे है जैसे बिना दूध की बांझ गैया। श्री य...

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बांके विरदनि विदित बिहारी

श्री बिहारीजी अपने 'बाँके' इस विरद से प्रसिद्ध हैं। [1] यद्यपि श्री बांके बिहारी के अंश से ही समस्त अवतार होते हैं तथापि नित्य विहार लीला आस्वादन हेत...

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प्यारी तेरे तन की सोभा बरनी न जाइ

श्री राधा प्यारी जू, आपके दिव्य सौंदर्य का वर्णन करना सर्वथा असंभव है। जहाँ जहाँ दृष्टि पड़ती है, वहीँ ब्रज रस बरसता है, और मानो मेरी आँखें वहीँ आपके द...

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नवल वृन्दावन नवल बसन्त

श्री बिहारिन देव जी कहते हैं, श्री वृंदावन धाम नित्य नवीन है एवं नवीन ही यहाँ बसंत है। [1] जहां नव-नव द्रुम, लता-पताएं, बेल, कुंज आदि में प्रिया-प्रिय...

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जै श्रीवृन्दावन नव निकुंज में संतत सहज बिराजत जोरी

जै श्रीवृन्दावन नव निकुंज में संतत सहज बिराजत जोरी  | अति अगाध महिमा रस जिनको सो पीवत इक कृपा किसोरी  || - श्री बिहारिन देव - श्री बिहारिन देव जी की व...

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किये रहै एैंड बिहारी हूँ सौं

- श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धांत के कवित्त-सवैया (111) हम सदा बिहारीजी से भी बेपरवाह रहते हैं क्यूंकि हम विहारिनि श्री राध...

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बसीवो श्री वृन्दावन को नीकौ

(राग कलिंगडा) बसीवो श्री वृन्दावन को नीकौ, छिन्न छिन्न प्रति अनुराग बढ़त दिन, दरस बिहारीजी कौ ॥ [1] नैंन श्रवण रसना रस अँचवत, अंग संग प्यारी पी कौ | श्...

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सर्वोपरि कुँजबिहारिनी रानी

सर्वोपरि कुँजबिहारिनी रानी | सबै परजा ब्रजराज हूँ, लौं सर्वोपरि कुँजबिहारिनी रानी || - श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धांत के क...

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जोरी अद्भुत आज बनी

अहा! आज श्री श्यामा स्याम की अद्भुत जोरी बनी है जिनकी नख की उज्जवल कांति (मानो नील मणि समान है) पर अनंत कोटि कामदेव को भी वारा जा सकता है। [1 & 2] ऐसा...