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ग्रन्थ के पद एवं श्लोक
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देख्यौ देख्यौ राधा को बृंदावन
श्री आनंदघन कह रहे हैं "मैंने श्री राधा रानी का वृन्दावन देख लिया है, जिससे मेरा जीवन सब प्रकार से सफल हो गया है। [1] यमुना किनारे युगल दम्पति श्री र...
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ऐसें आरती करौ
प्रभु की आरती करनी हो तो ऐसी करो, हृदय-रूपी स्थिर और विशाल थाल सजाकर, उसमें प्रेम-रूपी दीपक को प्रज्ज्वलित कर रख दो। [1] स्नेह से युक्त, निर्मल ज्य...
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राधे दै बृंदावन-बास
हे श्रीराधे! कृपा करके मुझे श्रीवृंदावन में निवास प्रदान कीजिए। मेरा मन उसी प्रकार आप में स्थिर बना रहे, जैसे कोई पनिहारिन अपने सिर पर मटका रखे चलती ह...
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नित बिहार बृंदावन राधा मोहन
श्रीराधा और श्रीमोहन (श्रीकृष्ण) श्री धाम वृन्दावन में नित्य विहार करते रहते हैं। वे स्वभाव से ही सहज रंगीले, छैल-छबीले हैं, जो हृदय में प्रेम का संचा...