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Sacred Scripture

श्री गोविन्दशरण देवाचार्य जी की वाणी

ग्रन्थ के पद एवं श्लोक

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अहो बृषभानुजे किसोरी श्रीबनवास दै बसावौ

हे वृषभानु नंदिनी, मुझे श्री वृन्दावन का वास प्रदान कीजिये। मधुर स्वर में 'यह मेरा है', ऐसा कहकर मेरे ह्रदय में आनंद का संचार कीजिये। [1] रसिकों के क...

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कुल रूप उज़ारी मेरी स्वामिनी

मेरी स्वामिनी समस्त रूप की उजियारी हैं। इनका कंचन [सोने] के समान तन है, नीलांबर वस्त्र अलंकृत हैं, एवं समस्त गुणों की निधि मेरी स्वामिनी हैं जिनका नाम...

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नीके बिहारी- बिहारिनि प्यारे

कुंजमहल में विराजमान प्रेम रंग में भींजे श्री श्यामाश्याम बड़े प्यारे लग रहे हैं, जो सखियों के आँखों के तारे हैं। [1] नित्य दम्पति साँवरे श्री कृष्ण ए...

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आज खेलें होरी नव नागरी

आज परम नागरी, श्री राधा महारानी होली खेल रही हैं। वे समस्त कलाओं और गुणों की खान हैं, और अपने प्रियतम श्री कृष्ण पर अत्यंत प्रेमपूर्वक गुलाल डाल रही ह...

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बनी है नीकी राधा माधव जोरी

श्री राधा माधव की यह दिव्य गौर श्याम वर्ण जोड़ी कितनी नीकी [सुंदर] बनी है जिनके तन पर नील पीट वस्त्र सुशोभित है जिसकी शोभा को देखकर कोटि कोटि रति कामद...

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हमारैं साहिबनी वन रानी

हमारी साहिबिनी (स्वामिनी) वृंदावन की महारानी श्री राधिका रानी है। जिस नंदनंदन [श्री कृष्ण] का यश वेद पुराण इत्यादि गाते हैं वह उनको भी सुख का दान करने...

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राधेजू मेरौ जनम सुधारौ

हे श्री राधाजू, मुझे वृंदावन वास प्रदान कर मेरे जीवन को सफल बना दीजिए। [1] मैं महापतित और समस्त अवगुणों की खान हूँ, परंतु यह जानकर आप मेरा त्याग न ...