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Sacred Scripture

श्री कुम्भनदास जी की वाणी

ग्रन्थ के पद एवं श्लोक

25 items
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पोढ़े हरि राधिका के संग

श्री कृष्ण श्री राधा के संग रंग महल में विराज रहे हैं। [1] रंग महल में तीन द्वार हैं जिसमें रंगीन परदे लगे हुए हैं। [2] कई रंगों के अनमोल रत्नों से जट...

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आये माई बरषा के अगवानी

हे सखी, अब वर्षा ऋतु का ब्रज में आगमन हुआ है। मेंढक, मोर और सारिकाएँ सभी वन कुंजों में गा रहे हैं और बतखों की कतारें वृक्ष की शाखाओं के ऊपर से उड़ान भ...

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कुँवरि राधिका तुम सकल सौभाग्य सींवा

श्री कुम्भनदास कहते हैं "हे कुँवरि राधिका जू, आप समस्त सौभाग्य की सीमा हो, आपके इस स्वरुप पर मैं कोटि कोटि चंद्रमाओं को न्योछावर कर दूँ। मेरे मन में य...

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रस में रहत गढ़ी हो रसिकनी

देवदुर्लभ अचिन्त्य प्रेम रस की मूल स्रोत श्री राधिका जू पूर्ण रूप से अपने दिव्य स्नेह और रस में डूबी हुई हैं। श्री वृषभानु नन्दिनी श्याम वर्ण के तमाल...

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सखी मोय बूँद अचानक लागी

श्री राधा जू सखी से कहती हैं "हे सखी, वर्षा की बूंदें अचानक मुझ पर गिरने लगीं। मैं सो रहा थी, अपने प्रियतम श्री श्यामसुंदर के सुन्दर चिंतन में, उसी सम...

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माई हौं गिरधरन के गुन गाऊँ

अरे सखी! मैं तो बस गिरिधर का ही गुणगान करता हूँ। मेरा तो बस यही व्रत है, मुझे और कुछ भी रुचिकर नहीं है। [1] जब मेरा लाडलो श्याम सुंदर खेलने आता है त...

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आवत मोहन मन जु हर्यौ हौ

श्री कुम्भनदास जी सखी भाव में भावाविष्ट कह रहे हैं "मनमोहन श्री कृष्ण जब संध्या समय गायों के साथ लौटते हैं तब उनकी सुन्दर छवि मेरे मन का हरण कर लेती ह...

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सींवा नैंननि तेरे की

हे प्यारी जू [श्री राधे], तुम्हारे नयन तो अगाध रस एवं सौंदर्य की सीमा हैं ! मेरा ह्रदय यही कहता है कि अब मैं तुम्हारे नयनों से अपनी दृष्टि को नहीं हटा...

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प्रगटी नागरि रूप-निधान

सुंदरता की निधि नागरी श्री राधा का प्राकट्य हुआ है। जिनकी रूप-माधुरी का नेत्रों से पान कर सखियाँ हर्षित हो रही हैं, उन श्री राधा के सुंदरता की कहीं को...

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न्यांइरी तू अलकलडी

ही अलबेली राधिका, तू अलक लड़ी [लाड़ लड़ाने योग्य] है। तू तो नित्य प्रति श्री गिरिधल लाल [श्री कृष्ण] के ह्रदय में गड़ी रहती है। [1] गिरिधर लाल नित्य ...

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पिय-संग झूली री सरस हिंडोरैं

श्री राधा के संग प्रियतम श्री कृष्ण सुंदर हिंडोरे में झूल रहे हैं जिनके चारों दिशाओं में ब्रज की युवतियाँ सजी हुई हैं और वे धीरे धीरे झूला झुला रही है...

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नंद-नंदन की बलि-बलि जैये

नंदनंदन श्री कृष्ण पर बार-बार बलिहारी जाइए। श्यामसुंदर की मनोहर छवि को निहार-निहार कर सुख का पान कीजिए। [1] जो समस्त लोकों के स्वामी, श्रीपति ठाकुर ह...

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दम्पति दोउ राजत कुंज-भवन

दिव्य दंपति श्रीराधा-कृष्ण कुंज-भवन में विराज रहे हैं। कृष्ण के सिर पर पीली पगड़ी बँधी है, कटि पर पीला पट है, और कर्णों में सुंदर कुण्डल शोभा दे रहे ह...

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यह गति नाँचि-नाँचि लई

ब्रज रस की अद्भुत गति को मैंने नाच-नाच कर प्राप्त किया है। वृन्दावन में रास-विलास में निरंतर रस की वृद्धि हो रही है। [1] सखियाँ मधुर स्वर में विविध र...

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तेरे तन की उपमा कौं देख्यौ

श्रीकृष्ण श्रीराधा से कहते हैं: हे भामिनी!, मैं बार बार विचार करता हूँ, परंतु आपके स्वरूप की तुलना के लिए कुछ भी उपयुक्त नहीं पाता। [1] न तो सोना, न...

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पोढे हरि राधिका के भवन

श्री श्यामसुन्दर श्री राधिका जू के कुञ्ज में विश्राम कर रहे हैं। [1] श्री ललिताजी और अन्य सखियाँ चंवर डुला रही हैं जिससे शीतल वायु बह रही है। [2] श्री...

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मेरो मन तौ हरि के संग गयो

हे सखी! मेरा मन तो अब श्री कृष्ण के संग ही चला गया है। इसमें किसी और का कोई दोष नहीं है, यह तो मेरे इन नेत्रों की ढिठाई है जिन्होंने मुझे पर-बस (श्याम...

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प्रेम सरोवर प्रेम की

ब्रज में प्रेम-सरोवर दिन-रात निरंतर प्रेम के रस से ही परिपूर्ण रहता है। जहाँ-जहाँ श्री प्रिया जी (राधा जी) अपने चरण कमल रखती हैं, वहीं-वहीं श्री श्याम...

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मनमोहन मनमोहना

मनमोहन श्री कृष्ण के भी मन को मोहित करने वाली एकमात्र श्री राधारानी ही हैं, जो नित्य उनके हृदय में निवास करती हैं। तीनों लोकों में श्री राधारानी से सु...

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बनी राधिका गिरधर की जोरी

श्री राधिका, श्री गिरिराज पर्वत के धारक श्रीकृष्ण से मिलती है, ताकि वे संपूर्ण युगल बन सकें। दोनों ने मिलकर कोटि कोटि कामदेव और उनकी पत्नी रति की सुंद...

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गिरिधर पिय के हृदवसी

हे सखि! गिरिधर पिय के हृदय में बसने वाली श्री राधिका के बदन की छवि अत्यंत सुंदर है। उनके एक अंग की शोभा के सामने तो करोड़ों चंद्रमा-सूर्य भी फीके पड़ ...

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महारानी श्री राधिका अष्ट सखियन के झुंड

जहाँ-जहाँ महारानी श्री राधारानी और उनकी अष्ट-सखियाँ चरण रखती हैं, वहाँ श्रीकृष्ण पहले उस भूमि को बुहारते (झाड़ू लगाते) हैं। ऐसी पावन भूमि—श्री राधाकुण...

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प्रगटी राधा रूप निधान

आज श्री राधारानी प्रकट भइ हैं, जो रूप में सुंदरता की खान है। जो भी इनके दर्शन का सौभाग्य प्राप्त कर रहा है वह दूसरे से यही पूछ रहा है की "यह कौन हैं, ...

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भगतकौ कहा सीकरी काम

भक्तों को किसी राज महल से क्या प्रयोजन है ? (यहाँ सीकरी का अर्थ अकबर के फ़तेहपुर सीकरी से है, जब श्री कुंभन दास जी को अकबर ने अपने राज महल न्यौता भेजक...

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महारानी श्री राधिका अष्ट सखियन के झुंड

जहाँ जहाँ महारानी श्री राधारानी और उनकी अष्ट सखियाँ चरण रखती हैं, श्री कृष्ण उस भूमि को पहले बुहरात (झाड़ू) लगाते हैं। ऐसी भूमि श्री राधा कुंड की जय ह...