ग्रन्थ के पद एवं श्लोक
6 itemsरसिकवर मोहि सनाथ कियो
रसिक-शिरोमणि श्रीस्वामी हरिदासजी महाराज ने हमें तो सब प्रकार से सनाथ कर दिया है। उन्होंने हमें दर्शन और चरणामृत का महाप्रसाद देकर जैसे ही हमारे मस्तक ...
दोउ मगन भये रस होरी
श्रीप्रियालाल होरी के आनन्द में मगन हो रहे हैं। प्रेम की डोरी में बँधे दोनों परस्पर गलबहियाँ डाले मन्द-मन्द मुस्करा रहे हैं और एक-दूसरे के चित्त को चु...
रस को रसिक स्वादी जानैं
रस का स्वाद तो रसिक ही जानता है। अनन्य नृपती ललिता अवतार स्वामी श्री हरिदास जी के संग के बिना श्री प्रिया प्रियतम के इस दुर्लभ प्रेम को कोई कैसे प्राप...
कोऊ जोग जज्ञ तप संजम क्रिया को करैं
कोई योग करता है, कोई यज्ञ। कोई तप करता है, तो कोई संयमपूर्वक क्रियाएँ करता है। कोई मौन व्रत धारण करता है, तो कोई स्वास पर केंद्रित प्राणायाम का अभ्या...
प्यारी पिय प्रेम-भक्ति दीजै
हे युगल सरकार पिय प्यारी, मुझे अपनी प्रेम भक्ति प्रदान कीजिए। आपके नाम गुणगान से मेरी वाणी गदगद हो उठे, आपका यश सुन मेरा रोम रोम रोमांचित हो जाए, अश्...
श्रीराधा दे वृन्दावन वास
हे श्री नित्य बिहारिनि श्री राधा, अब तो मुझे आप वृंदावन वास दीजिए। नित्य ही मैं युगल स्वरूप का अवलोकन करूं एवं रंग हास में परायण रहकर, आपकी नित्य निष्...