ग्रन्थ के पद एवं श्लोक
5 itemsप्रीति की रीति रंगीलीये जानें
प्रीति की रीति तो रंगीली [श्री राधा] ही जानती हैं, जो अपना तन, मन, धन श्री श्याम सुंदर को ही मानकर नित्य ही अपने हृदय से प्रेमपूर्वक लगायी रखती हैं। [...
सरि कौन करै मेरी प्यारी की
मेरी प्यारी श्री राधिका की समानता कौन कर सकता है? जिनका रूप सौंदर्य साक्षात रूप को भी मोहित कर लेता है; जिन्हें श्री बांके बिहारी [भगवान कृष्ण] अपलक न...
जै जै जै लड़ैती प्यारी की
लड़ैती प्यारी श्री राधा की जय हो, जय हो, जय हो जो कुंजों में नित्य विहार करती हैं, जो अति हितकारिनी हैं एवं जिनका अद्भुत रूप उज्जवल है। [1] जो सदा श्र...
आजु सखी आये मेह सुहाये
अरी सखी! आज इधर आकाश में सुन्दर श्याम घन को उमड़ता देखकर उधर निकुंज मन्दिर में प्रिया जी आनंदमयी गौर-घटा बनकर उमड़ पड़ी हैं और प्रियतम पर प्रेम रस की ...
जै राधे मेरी प्रान अधार
श्री राधे रानी की जै हो, जो मेरे प्राणों की एक मात्र आधार हैं। वे सदा अद्भुत रंग रूप एवं रस की वर्षा करती हैं एवं महा प्रेम एवं सर्वोच्च सुख का सार स्...