श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी
जीवन चरित
श्री श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी वाणी संग्रह
देखै तौ निजु केली कौं
चतुर-चूड़ामणि रसिकों की आसक्ति केवल युगल की निज केली में ही रहती है, जैसे मछली की आसक्ति पानी में होती है।
लडैती जू को महल महा सुखरासी
श्री लाड़ली जी [श्री राधिका जू] का महल अत्यंत सुख प्रदान करने वाला है, जिस भाँति भी वह चाहती हैं उसी प्रकार वह केली विलास करती हैं एवं हम सखियों को रस...
जब जागै तब प्रिया भजे
जब तक साधक जागता रहे, तब तक उसे चाहिए कि वह डटकर प्राणप्यारी श्री किशोरी जी का भजन करे; और जब नींद आए, तब पैर फैलाकर (समस्त चिंताओं से मुक्त होकर) सो ...
लड़ैती कहै लड़ैतीय कहावै
हम सदा काल लड़ैतीजू [श्री राधा] का ही नाम-गुण गाते हैं और अन्य जनों से भी श्री राधा का ही नाम-गुण गवाते हैं। हमारे मन को एकमात्र श्री लाड़ली जू ही भा...
हमरे सुख कौ वपु बन्यौ
नित्य निभृत निकुंज में अपने प्राणप्रियतम श्री कुंजविहारी के संग नित्य केलि-विहार करने वाली रसस्वरूपा कुंजविहारिणी लाड़िली हमारे सुख का ही स्वरूप बनी ह...
हमारे धन वृन्दावन प्यारी
हमारा एकमात्र धन श्री वृंदावन धाम की लाड़िली श्री राधिका प्यारी ही हैं। यह ऐसा अद्भुत नित्य धन है जो जितना पान करो वह कभी भी कम नहीं होता, किन्तु नित्...
प्रेम-सार सुख-सार है
(प्रेम-धाम श्रीवृन्दावन में) निरन्तर चलता रहने वाला यह नित्य-विहार प्रेम का सार है, सुख का सार है, रूप-सौन्दर्य का सार है और रस का भी सार है। यही नित...
प्राप्ति में संसै नहीं
तन, मन और वाणी से हमारा यह अटूट संकल्प है कि हम कुंज-बिहारिणी श्री लाड़िली जू (श्री राधा) को निश्चित ही प्राप्त करेंगे।
श्रुति स्मृति बिचारत तत्व सब
जिस अद्भुत रस-तत्त्व का श्रुति और स्मृतियाँ निरन्तर विचार करती रहती हैं, परन्तु जिसका पार नहीं पा सकीं—उस सर्वोपरि नित्य-विहार को जगत में ललिता अवतार ...
प्रिय हमरे अंतर रहै
हमारा श्री राधा जू से ऐसा घनिष्ठ संबंध है कि वे हमारे तन, मन और प्राण सहित हमारे रोम-रोम में समाई हुई हैं; और हम भी उनके भीतर ही समाए हुए हैं तथा उनके...
निहचै भजै बिहार कों
अपने तन, मन और सर्वस्व को रसिक गुरु को अर्पण करके, निर्भय होकर नित्य-विहार का ऐसी दृढ़ अनन्यता से भजन करो कि स्वप्न में भी किसी अन्य देवता का परिचय न ...
जब प्रिया मानैं अपनपौ
जिसे श्री नित्य-विहारिणी जू (श्री राधा) अपना स्वीकार कर लेती हैं, श्री लाल जू (श्री कृष्ण) सदैव उसी के अधीन रहते हैं। वह जीव निरंतर सुखपूर्वक विहार क...
श्रीराधे राधे जो जन कहै
जो जन सच्चे मन से सर्वोपरि नित्यविहारिनी जू के ‘श्री राधे-राधे’ नाम का ही नित्य रटन करते हैं, वही श्री निकुञ्ज-मन्दिर के सर्वोपरि विहार के प्रेम-रस क...
प्रीति की रीति रंगीलीये जानें
प्रीति की रीति तो रंगीली [श्री राधा] ही जानती हैं, जो अपना तन, मन, धन श्री श्याम सुंदर को ही मानकर नित्य ही अपने हृदय से प्रेमपूर्वक लगायी रखती हैं। [...
श्री स्वामी हरिदास की, सरि नहिं दूजो कोई
ललिता-अवतार श्री स्वामी हरिदास जी महाराज के समान कोई नहीं है; इसका कारण यह है कि वे जिसे अपना बना लेते हैं, उसे अपने समान अधिकार दे देते हैं अर्थात् व...
सरि कौन करै मेरी प्यारी की
मेरी प्यारी श्री राधिका की समानता कौन कर सकता है? जिनका रूप सौंदर्य साक्षात रूप को भी मोहित कर लेता है; जिन्हें श्री बांके बिहारी [भगवान कृष्ण] अपलक न...
राग-द्वेष हमरे नहीं
किसी से राग या द्वेष करना हमारा धर्म नहीं है, और न ही देह का अभिमान करना यहाँ की रीति है। यहाँ तो बस भाव के साथ सदा प्रियाजी (श्री राधा) से मिले रहो।...
भूल छुड़ावो लाड़िली, समझ देउ भर-पूरि
हे लाड़िली! मेरी समस्त भूलों और अज्ञानता को दूर कर मुझे पूर्ण विवेक प्रदान कीजिए। हे मेरी प्राण-रसायन श्री किशोरीजी, यह कार्य केवल आपके ही हाथ में है ...
बिगरी लेहि सँवारि कै
नित्य निकुञ्जेश्वरी श्री श्यामा प्यारी का यह स्वभाव है कि वे अपने आश्रित जनों की बिगड़ी हुई बात को भी सुधारकर उसे स्वीकार कर लेती हैं। अपने जनों का इस...
कोटि भजन एकादसी
चाहे कोई करोड़ों बार एकादशी का व्रत और भजन कर ले, या करोड़ों तीर्थों में स्नान कर ले, परंतु यदि वह किसी संत (भक्त) का दिल दुखाता है, तो श्री हरि उसकी ...
नैना निरखैं रूप कों
मेरे नैना नित्य ही युगल-रूप का पान करें, और जीभ नित्य ही उनके निज-नाम का रटन करे। जहाँ श्री राधा-कृष्ण के अंग नित्य परस्पर मिले रहते हैं—अर्थात् युगल-...
लड़ैती मेरी प्रानजीवन धन प्यारी
श्री लड़ैती जू [राधा] ही मेरी प्रान जीवन धन प्यारी हैं। मेरा तन भी श्री राधा है मेरा मन भी श्री राधा है, एक क्षण को भी श्री राधा रानी मेरे से विलग नहीं...
तो सी तुही मेरी प्रान पियारी
हे मेरी प्रान प्यारी श्री श्यामा प्यारी, आपके समान तो केवल और केवल आप ही हो, अन्य कोई नहीं (अर्थात श्री राधा जू की तुलना अन्य किसी से कदापि नहीं की जा...
जै जै जै लड़ैती प्यारी की
लड़ैती प्यारी श्री राधा की जय हो, जय हो, जय हो जो कुंजों में नित्य विहार करती हैं, जो अति हितकारिनी हैं एवं जिनका अद्भुत रूप उज्जवल है। [1] जो सदा श्र...
रहनी कहनी एक सी, जयौं की त्यौं जो होइ
जिन साधकों की रहनी और कहनी एक समान होती है, वे बड़भागी जन चाहे जागें या सोएँ, उन्हें परम वस्तु (प्रेम-रस) निश्चित ही प्राप्त हो जाती है।
तन छूटै तो परम सुख, रहै तो भजन अपार
जिन साधकों ने श्री कुंजबिहारिनी लाड़िली जू श्री राधा को अपने जीवन और प्राणों का आधार बना लिया है, उनके लिए देह-त्याग परम आनंद का कारण बनता है; और जब त...
नहिं चाहों बैकुंठ नहिं चहौं ब्रह्मानंद कौं
न तो मुझे वैकुण्ठ चाहिए, न ही ब्रह्मानंद चाहिए। न मुझे मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम चाहिए, न ही नंदलाल श्री कृष्ण। [1] न ही मुझे कुंजों कुंजों का रास...
आजु सखी आये मेह सुहाये
अरी सखी! आज इधर आकाश में सुन्दर श्याम घन को उमड़ता देखकर उधर निकुंज मन्दिर में प्रिया जी आनंदमयी गौर-घटा बनकर उमड़ पड़ी हैं और प्रियतम पर प्रेम रस की ...
जै राधे मेरी प्रान अधार
श्री राधे रानी की जै हो, जो मेरे प्राणों की एक मात्र आधार हैं। वे सदा अद्भुत रंग रूप एवं रस की वर्षा करती हैं एवं महा प्रेम एवं सर्वोच्च सुख का सार स्...
श्री कुंजबिहारिनी लाडिली, श्री स्वामी हरिदास
श्री कुंजबिहारिनी लाड़िली जू और ललिता-अवतार स्वामी हरिदास जी वस्तुतः अभिन्न स्वरूप हैं। दोनों एक प्राण, एक रस होकर नित्य-विहार रूपी प्रेम-विलास में सत...
भजन करै हरिदास को पावै नित्य बिहार
श्री स्वामी हरिदास जी का भजन करने से सर्वोपरि नित्यविहार रस सहज ही प्राप्त हो जाता है और स्वयं नित्य विहारिणी जू (श्री राधा) सदाकाल अपने हृदय का हार ब...
लडैती तेरी कृपा कहिय न जाइ
लड़ैती जू (श्री राधा जू) की कृपा कहते नहीं बनती, जो हर क्षण मुझे अपनी कृपा दृष्टि से पोषण कर अपने अति अद्भुत रस का वर्षण करती हैं जिसका अपार आनंद मेरे...
प्रिया आसिक मासूक हम
श्री ललित किशोरी जी कहती हैं कि श्री प्रियाजी से हमारा ऐसा घनिष्ठ संबंध है कि वे हमारी आशिक (प्रेमी) हैं और हम उनके माशूक (प्रेम-पात्र) हैं। वे हमें प...
सुख रासि हमारी प्यारी जू
हमारी प्यारी जू [श्री राधा] सुख की राशि हैं। वे प्रगाढ़ आनंद से सदा भरी रहती हैं, रस में उन्मत्त होकर, रोम रोम से प्रेम बरसाती हैं। [1] उनकी प्रीति छ...
लड़ैती जू की साहिबी अटल बनी
लड़ैती जू (श्री राधा) की साहिबी (सर्वोच्चता) अटल बनी हुई है, जिनके सुख में ही श्यामसुन्दर स्वयं का सुख मानते हैं। [1] अन्य समस्त रसों से मुख मोड़कर, ...
मेरी बिहारिनि मेरी मेरी
मेरी बिहारिनी (राधा), मेरी है, मेरी है जो तन और मन से मिली हुई, रस में उन्मत्त होकर, विहारण करती है तथा मेरी ओर निहार निहार कर हर क्षण मुस्कुराती है। ...
श्रीस्वामी हरिदास के
श्री स्वामी हरिदास जी के जो अनन्य जन हैं, उनका यह यश जगत में विख्यात है कि वे लोक-वेद की समस्त मर्यादाओं को त्यागकर, सदैव एकमात्र सर्वोपरि नित्यविहार...
लडैती जू तेरी रङ्ग भरी मुसिक्यानि
हे लड़ैती जू (श्री राधा), आपकी मुस्कान प्रेम रंग से भरी है, जो सुख की अद्भुत खान है एवं तन-मन में आनंद को बढ़ाने वाली है। [1] परम प्रवीण किशोरी राधे ...
वनराज हमारे प्यारे हैं
वनों का राजा, श्रीधाम वृंदावन हमको (रसिकों को) अत्यंत प्यारा है। यह इस भूतल पर नित्य सदा विराजता है एवं दिव्य प्रेम-रस का मूल स्रोत है। [1] जो भी यु...
श्री स्वामी हरिदास को धर्म सुमेर समान
प्रिया-प्रियतम के एकान्तिक एवं अखंड नित्य विहार रस रूपी भक्ति-भाव का सतत पालन करने वाला स्वामी श्री हरिदास जी का सर्वोपरि प्रेम-धर्म, सुमेरु पर्वत के ...
श्रीकुंजबिहारिनि ललित लाडिली
निकुंज में विहार करने वाली कुंजबिहारिणी (श्रीराधा) अद्भुत रूप और माधुरी की खान हैं। [1] उनकी मधुर मुस्कान से प्रेमरस बरसता है जिससे वे श्यामसुंदर को...
लडैती आनंद निधि सुखरासी
नित्य विहारिणी श्रीराधा आनंद की निधि और सुख का अगाध सागर हैं। वह महाप्रेम से भरी हुई, सहज रूप से छबीली एवं सदा अपने प्रियतम कुंजबिहारी के निकट रहती है...
मोहि भरोसौ स्वामी जी को
मुझे तो ललिता अवतार स्वामी श्री हरिदास जी पर विश्वास है। उनकी करुणा ऐसी है कि वे जिस पर कृपा करते हैं, उसे भी अपने समान बना लेते हैं। अर्थात् जिस प्र...
निजु प्रिय कीनी अपनपौ
रिझवार-चूड़ामणि श्री स्वामिनी जू ने मुझे अपनी निज कर लिया और वे मेरे तन-मन में समा गईं। मेरे मन के भावों का पोषण कर मुझसे बोलीं— “तू तो मेरी प्राण-सखी...
नित ही राधाकृष्ण हैं
श्री राधा-कृष्ण नित्य हैं और श्री वृन्दावन भी नित्य है। अनंत-कोटि गोलोक भी श्री वृन्दावन के एक पत्र के प्रकाश की समानता नहीं कर सकते।
व्यास रसिक निर्णय कियौ श्रीवृंदावन माँहिं
श्रीधाम वृन्दावन में रसिक-समाज के मध्य गहन विचार के उपरांत, श्री हरिराम व्यास जी ने यह निष्कर्ष स्थापित किया कि रसिक अनन्य नृपति श्री स्वामी हरिदास जी...
आदि अंत वृन्दाविपिन, निरदोषिक करि बास
सृष्टि की रचना से पूर्व और प्रलय के पश्चात भी जो सतत एकरस भूतल पर विद्यमान रहता है, वह केवल श्रीवृन्दावन धाम ही है। वहाँ जो जन समस्त अपराधों से रहित ह...
सहज बिहार निरन्तर मेरौ
प्रिया-प्रियतम की कृपा से उनका नित्य विहार मुझे अब सहज उपलब्ध है। दोनों प्रिया-प्रियतम तन-मन से एक होकर विहरण करते हैं, और हर क्षण प्रेम और भी अधिक गह...
बिहारिनी संग निरंतर मेरें
हमारा प्रेम का सम्बंध केवल अति उदार चूड़ामणि श्री कुंजबिहारिनी प्यारी ज़ू [राधा रानी] से ही है जिनकी कृपा की वांछा नित्य ही श्री लाल जी [श्री कृष्ण] ...
श्री कुंजबिहारिणी लाड़ली
वृन्दावन की कुंजों में विहार करने वाली हे श्री प्यारी जू! आप अत्यंत उदार और दयालु हैं। आप श्रीकृष्ण को भी संतुष्ट एवं पोषित करती हैं, क्योंकि उस दिव्य...
हमरी बात भली बनी भई लडैती प्रान
जगत में हमारी बात बहुत ही सुन्दर बन गई क्योंकि स्वयं सर्वोपरि श्रीनित्यविहारिनीजू (श्री राधा) हमारी प्राण-स्वरूप हो गई हैं। रसिक-शिरोमणि श्यामा प्यारी...
अनहाये कबहूँ नहीं
ऐसे रसिक, जिनकी एकमात्र मित्रता निकुञ्ज-विहारिणी श्री किशोरीजी से ही है, वे कभी भी अनहाये [अपवित्र अवस्था] में नहीं रहते। वे तो सदा ही नहाये हुए रहते...
मेरी प्रिय है लाडिली
मेरी प्राणप्यारी तो श्री लाडिली जू ही हैं। वे क्षण-क्षण नई-नई प्रीति करती हुई मेरे सुख में ही अति सुखी होती हैं, और मैं भी उनके ही सुख में नित्य लीन र...
तनु की मनु की बचन की करी अविद्या दूरि
तनु की मनु की बचन की, करी अविद्या दूरि। कुंजबिहारिनी लाडिली, भरयौ प्रेम भरपूरि॥ - श्री ललितकिशोरी देव, श्री ललितकिशोरी देव जू की वाणी, सिद्धान्त की सा...
नित्य विहार निरंतर मेरो
मेरे हृदय में नित्य विहार निरंतर बस गया है जो अद्भुत प्रेम रंग, अद्भुत रस एवं अद्भुत सुधा का सार तत्व है। [1] रसिक शिरोमणि स्वामी श्री हरिदास जी म...
लड़ैती तेरे चरण महा सुखदाई
श्री कुञ्ज विहारिणी श्री राधा, आपके चरण परम प्रेम सुख को देने वाले हैं, इन्ही चरणों को देखकर, सेवन करके श्री लाल जू केलि कला में निपुण हुए हैं। कभी तो...
बिहारिनि लाडिली रस माती
बिहारिनि रानी श्री राधा रस में उन्मत्त हैं। सुख की राशि लाड़िली, अति आनंद में भरकर, मंद-मंद मुस्कुरा रही हैं। [1] उनकी रूप-माधुरी अति अद्भुत है जो कहत...
श्री कुंजबिहारिनी सब सुखकारी
श्री कुंज बिहारिणी (श्री राधा) समस्त सुखों का दान करने वाली हैं। श्रीधाम वृंदावन के निभृत निकुंज में, वे अपने प्रियतम कुंजबिहारी के संग सदा “नित्य विह...
बिहारिनि तेरेई रंग रंगी
हे मेरी प्यारी श्री बिहारीनी जू (श्री राधा), मैं तो सदा से तुम्हारे ही रंग में रंगी हुई हूँ। तुम्हारे पक्ष में ही सदा खड़ी होकर, तुम्हारे ही प्रेम में...
कुंज बिहारिनि लाडिली
परम प्रवीण रसिक-शिरोमणि साक्षात् श्री नित्य-विहारिणी लाड़िली जिसे अपना बना लेती हैं, उसका हाथ वह कभी नहीं छोड़तीं।
रोम रोम आनंद भयो
हमारे रोम-रोम में आनंद भर रहा है और क्षण-क्षण हृदय उल्लास से परिपूर्ण हो रहा है, क्योंकि श्री कुञ्ज-विहारिणी लाड़िली श्री राधारानी सदा हमारे साथ विराज...
कुंज बिहारीनि बाल कों
जो बड़भागी जन बड़े ही हित से (प्रेमपूर्वक) श्री कुञ्ज-विहारिणी बाल—श्री राधारानी—की सतत सेवा करते हैं, उनके तन, मन और चित्त में किसी प्रकार का विघ्न न...
जै जै बिपिन बिहारी जू
श्री वृंदावन धाम एवं बिहारी जू अर्थात जो श्री वृंदावन में रमण करते हैं, विहार करते हैं, हमारे युगल सरकार, उनकी जय हो। समस्त सुखों की राशि, रोम रोम से...
बैकुंठ महा बैकुंठ तै
जहाँ श्री वृन्दावन में युगल सरकार नित्य-विहार करते हैं, वह नित्य धाम वैकुण्ठ, महा-वैकुण्ठ और गोलोक धाम आदि सभी से परे है—जिनका नित्य सेवन यह सभी धाम भ...
सेवैं नित्य सरुप कौं
हम सदाकाल श्री वृन्दावन-चन्द्र में अखण्ड वास करते हुए नित्य-स्वरूप श्री लाड़ली–लाल की केलि-सुख का निरन्तर सेवन कर सतत आनन्द में निमग्न रहते हैं।
निश्चय तन मन प्रेम सों
मैं तुमसे स्पष्ट कहता हूँ कि तुम तन-मन-प्राण से सर्वोपरि नित्य-विहारिनी जू के सुमिरन का लाभ आज ही ले लो, कल का दिन किसने देखा है।
दूल्ह नित्य विहार है
जैसे विवाह में एकमात्र दुल्हा-दुल्हन का ही मान-सम्मान और गौरव होता है और उन्हें ही सब निहारते हैं, वैसे ही रसिकों द्वारा रसोपासना-पद्धति में निज महल क...
बिछुरन मिलन जहाँ रहै
जहाँ विरह (बिछुड़ना) और मिलन का चक्र बना रहता है, वहाँ प्रेम की पराकाष्ठा 'विशुद्ध प्रेम' नहीं होता। इसके विपरीत, प्रतिक्षण साथ रहते हुए भी मिलने की उ...
सोई जगत में जानि
जिसको ‘मैं–मेरी’ की आसक्ति लगी हुई है, जो मैं-मेरापन से युक्त है, वही संसार है और वही संसार-माया के जाल में गँसा-जकड़ा हुआ है। किंतु भक्त-रसिक-संत महा...
श्री वृन्दावन चन्द्र जू
श्री वृन्दावन धाम महाप्रेम-रस की खान है। श्री ललित किशोरी देव जी कहते हैं कि यह पावन धाम अपने ही गुण अर्थात् श्री प्रिया-प्रियतम के अद्भुत प्रेम-रस-रू...
कब देखौं भरि नैन
जो गौर-श्याम दोऊ लाड़िले श्री स्वामी हरिदास जी महाराज की गोदी में अनादिकाल से विहार कर रहे हैं, उन्हें मैं आँखें भर-भर कर कब देख पाऊँगा?
सदा हमारे पास है
श्री कुञ्जबिहारिणी श्री राधाजू सदा हमारे समीप रहती हैं। हमारे भावों का पोषण करने के लिए वे क्षण-क्षण हमें निहाल करती रहती हैं।
सेवै नित्य बिहार कों
जो बड़भागी जन नित्य-विहार के अतिरिक्त और कुछ भी नहीं जानते, उन्हें प्राण-प्यारी नित्य-निकुंजेश्वरी श्री राधा रानी अपने तन, मन और प्राणों में समेटे रखत...
हम हमरी है लाडली
हमारी प्राण श्रीलाड़िली राधा ही हैं, इसीलिए हम चित् लगाकर सदाकाल उनके ही केवल गुण गाते हैं एवं श्रवण करते हैं। उन्हीं की निकुंज-केलि नित्य-विहार का सद...
सरन गहौ श्री हरिदास की
श्री हरि की माया उन लोगों को छू भी नहीं सकती, जो श्री हरिदास (ललिता-अवतार) के चरण-कमलों की शरण ग्रहण कर लेते हैं। ऐसा इसलिए है कि श्री कुंजबिहारिणी ला...
अनेक जन्म की भूल कों
परम प्रवीण रसिक-शिरोमणि श्री कुञ्जबिहारिणी लाड़िली-जू जिसे अपना निज बना लेती हैं, उसकी वे समस्त प्रकार से रक्षा करती हैं। फिर किसी भी प्रकार से उसका ह...
बूडत ही विषधार में
हमारी कुंज-बिहारिणी श्री राधारानी से ऐसी अद्भुत प्रीति और स्नेह है कि मैं विषय-रूपी महाविष की नदी में डूब रहा था, परंतु उन्होंने स्वयं अपने हाथ पसारकर...
रस मत्त बिहारिनि प्यारी है
श्री कुंजबिहारिन (श्री राधा) प्यारी प्रेमोन्माद में उन्मत्त रहती हैं। उनका रूप अद्भुत उज्ज्वलता से युक्त है; केवल थोड़ी सी दृष्टि से निहारने मात्र से ...
श्रीस्वामी के पद कमल
ललिता अवतार स्वामी श्री हरिदास जी के चरण-कमलों को हृदय रूपी शुभ स्थान में बड़े ही प्रेम से विराजमान कर गौर और श्यामल वर्ण की आभा से युक्त श्री युगल-सर...
जै जै श्रीबनराज हमारे
हमारे श्री बनराज (श्री वृंदावन धाम) की जय हो जय हो जिसकी अत्यंत कृपा से और स्वामी श्री हरिदास जी की संभाल (कृपा) से ही नित्य विहार लीला का दर्शन संभव ...
अनंत जनम की भूलि कौं
हे श्री राधा! सर्वसमर्थ प्राणप्यारी जू, आप ऐसी कृपामयी स्वामिनी हैं कि अनंत जन्मों की भूल को भी एक क्षण में मिटा देती हैं। मुझमें कोई साधन-बल नहीं है;...
Ladaiti Ju Teri Rang Bhari Musikyani
Ladaiti Ju Teri Rang Bhari Musikyani.Tan Man Ati Anand Badhavati, Adbhut Sukh Ki Khani. [1]Param Praveen Kisori Radhe, Ati Jaananimani Jaani.Shrirasik...
मैं जानी मैं जानी लडैती जू
हे लाड़िली जू! अब मैंने आपके वास्तविक स्वरूप और महिमा को जान लिया है। हे किशोरी जी! आप अत्यंत उदारमयी हैं और विलक्षण प्रेम एवं आनंद की अक्षय निधि हैं।...
कुंज बिहारिनि लाडिली
रसिक-शिरोमणि की भी सिरमौर हमारी श्री कुंजबिहारिनि लाड़िली, अपने निज जनों के स्वभाव को जानकर क्षण-क्षण उनके भावों का पोषण करती रहती हैं।
Vanraj Hamaare Pyare Hain
Vanraj Hamaare Pyare Hain.Nity Sada Bhoo-Tal Par Raajat, Maha Prem Ras Bhaare Hain. [1]Jo Kachhu Ruchai Karain Ye Soi, Tan Man Ati Hitakaare Hain.Shri...
Avadhi Prem Ki Laadili Avadhi Prem Ki Laal
Avadhi Prem Ki Laadili, Avadhi Prem Ki Laal,Avadhi Prem Ki Lalit Ju, Chhin Chhin Karat Nihaal.- Shri Lalit Kishori Dev, Shri Lalit Kishori Dev Ju Ki V...
Jaisi Ekta Priya Ki Aisi Kare Na Koi.
Jaisi Ekta Priya Ki, Aisi Kare Na Koi.Tan Man Bachanani Chitt Mein, Rom Rom Rahi Bhoi.- Shri Lalit Kishori Dev, Shri Lalit Kishori Dev Ju Ki Vani, Vis...
Shri Swami Haridas Ko Dharm Sumer Saman
Shri Swami Haridas Ko, Dharma Sumer Samaan.Aur Dharma Sab Doongri, Yahi Baat Parmaan.- Shri Lalit Kishori Dev, Shri Lalit Kishori Dev Ju Ki Vani, Sidd...
Uttam Kare So Ladili
Uttam Karai So Ladili, Madhyam Ham Saun Hoi.Ihi Baat Nishchay Kari, Hari Ke Pyare Soi.- Shri Lalit Kishori Dev, Shri Lalit Kishori Dev Ju Ki Vani, Vis...
Mohi Bharoso Swami Ji Ko
Mohi Bharoso Swami Ji Ko,Kari Hain Apno Aap Barobari, Praan Adhaar Hai Peeko. [1]Vishe Vaasna Jaari Kheh Kari, Upjai Hain Hit Neeko.Shri Rasik-Vihari ...
Maat Taat Jaake Nahin
Maat Taat Jaake Nahin, Vrishbhanu Suta Nahin Naam.Kunjbihari Naam Niju, Kunj Biharini Baam.- Shri Lalit Kishori Dev, Shri Lalit Kishori Dev Ju Ki Vani...
Shrikunjbiharini Lalit Ladili
Shrikunjbiharini Lalit Ladili,Adbhut Roop Rasala. [1]Hansani Lasani Musakani Ras Barasat,Lalai Karati Nihala. [2]Umangi Umangi Dou Madan Ladaavat,Dou ...
Tan Man Vachanan Ladili
Tana Mana Vachanan Laadili, Meri Jeevan Pran,Lalit Keli Ang Sang Sada, Biharat Rasik Sujaan.- Shri Lalit Kishori Dev, Shri Lalit Kishori Dev Ju Ki Van...
Vyas Rasik Nirnay Kiyo
Vyas Rasik Nirnay Kiyo, Shrvrindavan Maanhi.Shri Swami Ke Dharm Kon, Patatar Kon Koi Nahin.- Shri Lalit Kishori Dev, Shri Lalit Kishori Dev Ju Ki Vani...
Main Jani Main Jani Ladaiti Ju
Main Jani Main Jani, Ladaiti Ju Main Jani.Tum To Param Udar Kisori, Adbhut Hit Ki Khani. [1]Chhin Chhin Rang Badhai Ati Bhari, Rahau Prem Sukh Sani.Sh...
Humri Baat Bhali Bani
Humri Baat Bhali Bani, Bhai Ladaiti Praan.Tahi Ten Ati Sukh Bhayo, Mili Su Rasik Sujaan.- Shri Lalit Kishori Dev, Shri Lalit Kishori Dev Ju Ki Vani, S...
Achari Son Thakur Darein
Achaari Son Thakur Darain, Dhing Nahi Avani Dehin.Premi Sadhu Kau Umangi Kai, Rijhi Ank Bhari Lehin.- Shri Lalit Kishori Dev, Shri Lalit Kishori Dev J...
Ladaiti Anand Nidhi Sukha Rasi
Ladaiti Anand Nidhi Sukha Raasi.Maha Prem Bhari Sahaj Chhabeeli, Sadaa Hi Preetam Paasi. [1]Adbhut Roop Raseeli Bhaamini, Bandhe Madhur Mridu Haasi.Sh...
Aadi Anta Vrindavipin Nirdoshik Kari Baas
Aadi Anta Vrindavipin, Nirdoshik Kari Baas.Adbuta Sukhad Bihar Kon, Det Tinhein Haridas.- Shri Lalit Kishori Dev, Shri Lalit Kishori Dev Ju Ki Vani, S...
Sahaj Bihar Nirantar Mero
Sahaj Bihar Nirantar Mero, Tan Man Mili Viharat Dou Preetam, Chhin Chhin Prem Ghanero. [1]Jeevan Pran Sukeli Hamari, Daas Biharini Kiyon Nibero. Sada ...
Lalitpriye Haridasi Ju Nitya Keli Sukh Dani
Lalitpriye Haridasi Ju, Nitya Keli Sukh Dani.Kunjbiharini Ladali, Pragati Ras Ki Khani.- Shri Lalit Kishori Dev, Shri Lalit Kishori Dev Ju Ki Vani, Vi...
Nitt Sarad Nitt Teej Hai
Nitt Sarad Nitt Teej Hai, Nitt Hori Su Basant.Nitt Keli Chhin Chhin Nai, Jaake Sukhahi Na Ant.- Shri Lalit Kishori Dev, Shri Lalit Kishori Dev Ju Ki V...
Ras Matt Biharini Pyari Hai
Rasa Matt Biharini Pyari Hai.Nenk Lakhen Bas Bhaye Ladile, Adbhut Roop Ujyari Hai. [1]Umgyau Rang Sarovar Hiy Mein, Mridu Muskan Kachu Nyari Hai.Shri ...