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Sacred Scripture

श्रृंगार रस के दोहे

ग्रन्थ के पद एवं श्लोक

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general

सरद चंद प्यारी बदन, प्रीतम नैंन चकोर

प्रीतम कृष्ण के नेत्र चकोर समान हैं, जो शरद-चन्द्र समान श्री राधा के रूप को नित्य हर्षपूर्वक निहारते रहते हैं।

general

श्री वृन्दावन कुञ्ज में करत सुधा रस पान

परम लावण्यमयी नवल किशोर जोड़ी श्रीश्यामा-श्याम श्रीवृंदावन के सघन कुंजों में नित्य विहार करते हुए अनवरत प्रेम-सुधा का रसास्वादन कर रहे हैं।

general

कुंजबिहारिन लाडिली, कुंजबिहारी लाल

प्रिया-प्रियतम अपनी अंतरंग केलि में, तन और मन से एक होकर अत्यंत मनोहर लग रहे हैं। उनके प्रत्येक अंग की शोभा परम मधुर है, और कुंज-महल ही उनकी केलि का न...

shloka

तन वन सरस सुहावनों तरु बेली फल फूल

वृक्षों, लताओं, फलों और पुष्पों से सदा सरस एवं मनोहर बने हुए श्रीधाम वृंदावन में श्यामा-कुंजबिहारी (प्रिया-प्रियतम), दोनों परस्पर समरस भाव से एवं नित्...