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ग्रन्थ के पद एवं श्लोक
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नत्वा हरिं प्रवक्ष्यामि स्वसिद्धान्त विनिश्चयम्
श्री हरि के चरणों में प्रणाम करता हूँ एवं अब मैं अपने सिद्धांत को बताता हूँ। हर क्षण एवं हर कार्य करते हुए श्री कृष्ण की सेवा करो। सबसे उच्च कोटि की स...
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आत्मानंदसमुद्रस्थं कृष्णमेव विचिंतयेत्
जो जीव भक्ति भाव से श्री कृष्ण का चिंतन करता है वो अपने आनंद के समुद्र में रहता है। जो जीव सांसारिक लक्ष्य से कृष्ण की पूजा करते हैं, उन्हें हमेशा कठि...