सन्तग्रन्थरागश्लोकस्तोत्रकविता
मुख्यपृष्ठग्रन्थसुधर्म बोधिनी
सभी ग्रन्थ
Sacred Scripture

सुधर्म बोधिनी

ग्रन्थ के पद एवं श्लोक

5 items
general

‘रा’ अक्षर श्रीगौरतन ‘धा’ अक्षर घनश्याम

‘राधा’ नाम के गूढ़ रहस्य को प्रकट करते हुए श्री लाड़लीदास कहते हैं कि ‘रा’ अक्षर साक्षात् श्री गौरवर्णा श्री प्रिया जी (राधा रानी) का स्वरूप है और ‘धा’...

general

प्रगट महल वृंदाविपिन महली श्यामा श्याम

साधक को यह अटूट भाव हृदय में धारण करना चाहिए कि यह वृंदावन ही श्रीश्यामा-श्याम का साक्षात निकुंज-महल है, जहाँ के समस्त नर-नारी उनकी अष्टयाम सेवा में न...

general

बल्लभ हू के गुरु सदा

श्री श्यामसुंदर की गुरु श्री राधा ही हैं, जो उन्हें समस्त सुखों का दान करने वाली हैं।

general

गौर श्याम रस सिन्धु में केलि तरंग अपार

गौर और श्याम (श्यामा-श्याम) रस के अगाध सिंधु हैं, जिसमें नित्य-विहार की अनंत केली तरंगें हिलोरें लेती हैं। रसिक जन युगों से इनके इसी पावन यश का गायन क...

general

गौर देत नित सर्व सुख श्याम रूप ह्वै लेत

श्री “राधा” नाम में रा और धा दो अक्षर हैं। रा दाने धातु का अर्थ है देना और धा का अर्थ है धारण करना। अत: गौर श्री राधा नित्य सर्व सुख देने वाली हैं और ...