ब्रज के सेवैया
जीवन चरित
श्री ब्रज के सेवैया वाणी संग्रह
क्षण भंगुर जीवन की कलिका
कौन जानता है कि इस नश्वर जीवन की कोमल कली, कल प्रातः खिलेगी या नहीं, और क्या हमें हिमालय समान भक्ति की शीतल, मंद, और सुगंधित वायु का स्पर्श प्राप्त ...
छूट गये व्रत नैम
हे किशोरी श्री राधा! जब से मैंने आपकी शरण ली है, तब से व्रत, नियम, धर्म और अन्य देवताओं की पूजा सब त्याग दी है। [1] हे लाडिली जू, अब तो मैंने आपसे ही...
जाकी प्रभा अवलोकत ही तिहूँ लोक कि सुन्दरता गहि वारि
जिनकी अंग कांति का दर्शन करते ही तीनों लोकों की समस्त सुंदरता भी न्यौछावर हो जाती है, उन कमल नयनी श्री राधा का नाम महामोद और मंगलकारी है, ऐसा श्री कृष...
मैं तो हूँ मलीन, छबि छीन, अति दीन महा
मेरे मन में काम, क्रोध, मोह, मन्दता, अविद्या आदि भरे हुए हैं। मेरे में अनंत अवगुण हैं कि कहाँ तक उसकी गिनती की जा सकती है? [2] मैं तो घोर संसारी की...
जिन देह दई वर मानुस की
जिसने तुझे यह मानव देह दिया, धन-ऐश्वर्य और परिवार का सुख प्रदान किया, ब्रजधाम में निवास का सौभाग्य दिया और अपनी परम-आनंदमयी सेवा का अवसर भी दिया। [1] ...
बाँके मते मन, बाँकी ये बात
वृन्दावन-बिहारिणी श्रीश्यामा महारानी जितनी विलक्षण हैं, उतने ही विलक्षण हैं उनके प्राणाराध्य, जीवन-सर्वस्व श्रीबिहारीजी। दोनों के मन की चाह बड़ी ही वि...
आग लगे उन पैरन में जो श्रीवृन्दावन धाम न जावें
यदि मेरे चरण श्री वृन्दावन धाम में नहीं जाते, ऐसे चरणों में आग लग जाए। [1] यदि मेरे नेत्र निशिदिन श्री राधे-श्याम को नहीं निहारते, ऐसे नेत्रों में भ...
मोर जो बनइओ तो बनइओ श्री वृंदावन को
हे प्रभु! यदि मुझे मोर बनाना हो, तो वृंदावन का मोर बनाना, जिससे मैं नाच-नाच कर और कूक-कूक कर तुम्हें ही रिझाया करूँगा। [1] यदि मुझे बंदर बनाना हो, त...
जीवन है ब्रजवासिन को वृषभानु किशोरी को प्राण पियारो
श्री कृष्ण ब्रजवासियों के जीवन हैं, श्री राधारानी के प्राण प्यारे हैं। गोपियों के हृदयों पर सदैव मोहित रहते हैं, नंद-यशोदा के दुलारे हैं।
ब्रज मण्डल का ही सितार नहीं
हे कृष्ण! तू केवल ब्रज का रत्न नहीं, पूरे संसार का उजाला है। [1] तेरे आकर्षक स्वरूप ने सबको अपना बना लिया है, तू सबका हृदयहारक है। [2] जब तू ही जीवन...
भूलै नहीं वह मंजुल माधुरि
युगल किशोर श्री राधा-कृष्ण के सुंदर और मनमोहक रूप-माधुरी की छवि को मैं एक क्षण के लिए भी नहीं भूलूँ। [1] मैं नित्य दंपति श्री श्यामा-श्याम की मनोहर छ...
वृन्दावनधाम को वास भलो
वृन्दावन धाम का वास सर्वोत्तम है, जहाँ पास ही श्री यमुना पटरानी प्रवाहित होती हैं। [1] जो भी यमुना जी में स्नान कर श्री राधा-कृष्ण का ध्यान करता है, ...
इस प्यासे पपीहे से लोचन को
हे श्रीकृष्ण! मेरे इन प्यासे पपीहा-समान नेत्रों को अपना दर्शन देकर स्वाति-बूँद-सा अमृत पिला दीजिए। [1] अपनी दुर्लभ माया को दूर कर दृढ़ प्रेम का अमूल्...
स्वामिनी इतना तो कीजो लाड़ली इतना तो कीजो
हे स्वामिनी जू, इतना तो कीजिये कि इस संसार की आसक्ति को छुड़ाकर श्री वृन्दावन का नित्य वास प्रदान कीजिये। [1] सुबह होते ही नित्य महल में आपके दर्शन कर...
तुम जान अयोग्य बिसारो मुझे
हे कृष्ण, आप चाहे मुझे अयोग्य समझकर भुला दें, पर मुझ पर ऐसी कृपा करें कि मैं आपको कभी न भूलूँ। सदैव आपके गुणों का गान करूँ, आपका ही ध्यान करूँ, और जब ...
सावन तीज सुहावन कों सखि
इस सेवैया में वृंदावन में हरियाली तीज के उत्सव की अनुपम झांकी मिलती है। हे सखी, सावन का सुहावना मास आया है एवं समस्त ब्रजवासी तीज को मनाने के लिए सुशो...
जिनकी उपासना करत कोटि विष्णु लोक
कोटि-कोटि विष्णुलोक के निवासियों द्वारा श्री श्यामा जू की उपासना अनवरत रूप से की जाती है, और स्वयं श्री लक्ष्मी यह चिंतन करते हुए उनकी अर्चना में निमग...
जाप जप्यो नहिं मन्त्र थप्यो
न मैंने भगवन्नाम का जप किया, न किसी मंत्र का अनुष्ठान किया। न वेद-पुराणों का श्रवण किया, न किसी कथा का कथन किया। [1] हे श्री श्यामा-श्याम, मैंने तो ब...
ब्रजराज से नाता जुड़ा अब है, तब जग की क्या परवाह करें
जब ब्रजराज श्री कृष्ण से नाता जोड़ ही लिया है तो शेष जग की चिंता क्यों करें। अब तो बस उनकी याद में रोती रहूँ और उनकी ही याद में मेरे पलकें सदा भीगी रह...
तेरे ही पुजारियों की पद धूरि, मैं नित्य ही शीश चढ़ाया करू
मेरी मनोवृत्ति ऐसी बना दो कि तुम्हारे प्रेमियों की चरण रज को नित्य अपने मस्तक पर चढाऊँ और तुम्हारे भक्तों की भक्ति किया करूँ। और तुमसे प्यार करने वालो...
हे वृषभानु सुते ललिते
हे वृषभानु दुलारी श्री राधे, मैंने ऐसा कौन सा अपराध किया है जिसके कारण आपने मुझे ब्रज मंडल से निकाल दिया है। निश्चय ही मुझसे कोई बहुत भारी अपराध हो गय...