नंद दास ग्रंथावली
जीवन चरित
श्री नंद दास ग्रंथावली वाणी संग्रह
अस अद्भुत गोपाल लाल
ऐसे अद्भुत प्रियतम गोपाल लाल (श्री कृष्ण) जहाँ सर्वदा निवास करते हैं, उस वृन्दावन के सामने वैकुण्ठ का ऐश्वर्य भी फीका (कुंठित) प्रतीत होता है।
श्रीवृन्दाबन चिद्घन कछु छबि वरनि न जाई
श्री वृन्दावन साक्षात् 'चिद्घन' (परम चेतना का घनीभूत स्वरूप) है, जिसकी दिव्य छवि का वर्णन करना वाणी से परे है। श्री कृष्ण की सुंदर और सुकुमार ललित लील...
जह नग खग मृग लता कुंज
वृन्दावन के वृक्ष, गिरि, पक्षी, मृग, लताएँ और समस्त कुंज सदा दिव्य शोभा से युक्त रहते हैं। वे काल के प्रवाह और प्रकृति के तीनों गुणों के प्रभाव से अछू...
नमो नमो आनंद घन
नंदनंदन श्री कृष्ण, जो घनीभूत आनंदस्वरूप हैं, उन्हें बारंबार नमस्कार है। वे रस के सागर, रस के मूल कारण तथा रसिक भक्तों के प्राणाधार हैं।
श्री अनंत महिमा अनंत को वरनि सके कवि
श्री धाम वृन्दावन एवं इसकी महिमा अनंत एवं अपार है, जिसका पूर्ण निरूपण किसी भी रसिक कवि की सामर्थ्य से परे है। श्री नंददास जी के अनुसार, इस परम पावन धा...
रूप प्रेम आनंद रस जो कछु जग मैं आहि
इस जगत में रूप (सौंदर्य), प्रेम, आनंद और रस के रूप में जो कुछ भी दिखाई देता है, उन सब के आधार श्री गिरधर देव (श्री कृष्ण) हैं। इसलिए मैं निडर होकर, ब...
या बन की वर-बानिक या वन ही बनि आवै
श्री वृन्दावन धाम की समानता केवल वृन्दावन धाम ही कर सकता है, जिसका पार शेष, महेश, इंद्र एवं गणेश भी नहीं पा सकते।