सन्तग्रन्थरागश्लोकस्तोत्रकविता
मुख्यपृष्ठसंतश्री अनन्य अलि
सभी संत

जीवन चरित

ब्रज परंपरा के वैष्णव संत।

श्री श्री अनन्य अलि वाणी संग्रह

general

सुनि विनती मेरी श्री राधे

हे श्री राधे, मेरी विनती सुनिए, आपकी कृपा के बिना, सबके लिए दुर्लभ, श्री व्यास नंदन (श्री हरिवंश जी) किसी को कैसे प्राप्त हो सकते हैं ? [1] किसी क...

general

प्रिया चरण सौं भई है अंकित अवनि रसाल

श्री प्रिया जी (श्री राधा) के चरणों से अंकित श्री धाम वृंदावन की भूमि परम रसाल है, जिसकी परम पावन रज का स्वयं रसिक शिरोमणि भगवान श्री कृष्ण भी वंदन कर...

general

कृपा सागरी नागरी वेई पूजवैं आश

कृपा की अथाह सागर, श्री राधा महारानी ही मेरी समस्त आशाओं को पूर्ण करने वाली हैं। एक उनके बल पर ही मैं सदा परम निश्चिंत अवस्था में रहता हूँ और श्री वृं...

general

रस जस सुनि श्री विपिन के

श्री वृंदावन रस का यशोगान सुनकर के तुम भी हर्षित होकर गुणगान करो। यहाँ की रज में मगन होकर लोटो क्योंकि वृंदावन के रस के समान कोई अन्य रस कहीं नहीं है।

general

तीन लोक कौ राज सुख

त्रैलोक्य के राजसुख, सम्पत्ति तथा पारिवारिक सुखों को त्यागकर उस श्रीवृन्दावन धाम में वास करना चाहिए, जो साक्षात् प्रेमरस का अथाह, अगाध समुद्र है।

general

बसतहि वृन्दाविपिन में

जो व्यक्ति श्री वृन्दावन वास में बाधा उत्पन्न करे, उसे अपना परम शत्रु मानना चाहिए और उसका मुख भी नहीं निहारना चाहिए।

general

मान अपमान अभिमान तजि करि वृन्दावन वास

मान, अपमान और अहंकार को त्यागकर श्री धाम वृन्दावन में वास करो। वहाँ की परम मंगलकारी रज में रज बनकर रहो, तभी मन में दिव्य प्रेम का प्रकाश प्रकट होगा।

general

तन मन वचन प्रतीति सौं बसि वृन्दावन माँझ

देह, मन, वाणी और दृढ़ आंतरिक निश्चय सहित श्रीधाम वृन्दावन में वास करो। दिन-रात केवल अनन्य प्रेमी रसिकों का ही संग होना चाहिए, तभी वह अति दुर्लभ रस जीव...

general

अंत अनंत साधन करै

यद्यपि जीव आजीवन विविध साधनाओं में निरत रहे, तथापि विशुद्ध भजन का लेश मात्र भी प्राप्त करना दुष्कर है। परंतु श्री धाम वृन्दावन की महिमा अनिवर्चनीय है;...

general

विष ले खाई आग में जरौ, श्री यमुना में बूड़ ही मरौ, वृंदावन छाड़ौं नहिं

श्री अनन्य अली कहते हैं कि चाहे विष खाना पड़े, आग में जलना पड़े, यमुना जी में डूब क्यों न जाना पड़े, परन्तु वृन्दावन मत छोड़ो ।

general

महिमा तेरी कहा कहूँ

हे दयालु श्री हरिवंश! मैं आपकी महिमा कहाँ तक कहूँ, क्योंकि आपके द्वार पर तो सहज ही लाड़िली लाल (श्री श्यामा-श्याम) सबको सुलभ हो जाते हैं।

general

वृन्दावन की रजनी में सोवत पाँइ पसारि

वृंदावन की परम पावन भूमि पर, श्री राधा महारानी की शरण में पाँव पसार कर सोना भी अति श्रेष्ठ भजन है। अन्य स्थानों के कितने ही उत्तम भजन और साधन भी, इसके...