सभी संत
भ
रसिक संत जीवनी
श्री भोली गोपी
जीवन चरित
ब्रज परंपरा के वैष्णव संत।
श्री श्री भोली गोपी वाणी संग्रह
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सखी री मेरो प्यारो है नन्दलाल
हे सखिरी, मेरे नंदलाल अत्यंत प्यारे हैं जिनके शीश पर मोर मुकुट है, वक्ष स्थल पर पीताम्बर है और जिनके घुंघराले बाल हैं। हाथों में कंगन हैं, होठों पर मु...
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अब मैं वृन्दावन में बसूँगी
अब मैं वृंदावन में सदा वास करूँगी। संतों के संग बैठ बैठ कर अपने मन को श्री राधे जू के रंग में डूबा दूँगी। राधे नाम का रस पी पीकर लोक लाज का सर्वथा त्य...
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तेरे चरनन में बलि जाऊँ
हे मनमोहन बनवारी, मैं तेरे चरणों पर वारी-वारी जाऊँ ! तुम्हारे दर्शन से ही मुझे वास्तविक सुख मिलता है। [1] मैं प्रेम से तुम्हें माखन, मिश्री, मोदक और ...