सन्तग्रन्थरागश्लोकस्तोत्रकविता
मुख्यपृष्ठसंतश्री ब्रज निधि ग्रंथावली
सभी संत

जीवन चरित

ब्रज परंपरा के वैष्णव संत।

श्री श्री ब्रज निधि ग्रंथावली वाणी संग्रह

general

राधे तुम मोकौ अपनायौ

हे राधे! आपने मुझे अपना स्वीकार कर लिया है। मैं चाहे अति मूढ़ हूँ, कुछ भी नहीं जानता-समझता हूँ, फिर भी आपने मुझसे अपना सुंदर यशोगान करवा लिया है। [1] ...

general

छुवत राधिका-अंग कौ कंप-स्वेद ह्वै जाय

श्रीकृष्ण जैसे ही श्रीराधिका का श्रृंगार करने के लिए अपने करकमलों से उनके अंग को स्पर्श करते हैं, उनका शरीर कंप, स्वेद आदि सात्विक भावों से रोमांचित ह...

general

सुर-नर-किन्नर-उरग हू

चाहे देवता हों या मनुष्य, किन्नर हों या नाग — सभी प्राणी यही कहते हैं कि यदि उन्हें ब्रज की रेणु (रज) मिल जाए, तो उनका जीवन धन्य हो जाए और उनका भाग्य ...

general

ब्रह्मा इंद्र कहैं हम चाहैं

ब्रह्मा और इन्द्र कहते हैं—हमें ब्रह्मलोक अथवा स्वर्गलोक के सम्राट की पदवी नहीं चाहिए। यदि ब्रज में एक वृक्ष बनने का भी सौभाग्य मिल जाए, तो हम सदा वही...

general

पायो बड़े भाग्यन सों आसरो किशोरी जू कौ

हे मेरे मन, यह अत्यंत सौभाग्य की बात है कि तुमने श्री किशोरी जी की शरण ली है। अब इस प्रतिज्ञा पर खरा उतरने का प्रयास करो और इस समर्पण के मूल्यों को गह...