सन्तग्रन्थरागश्लोकस्तोत्रकविता
मुख्यपृष्ठसंतश्री चंद्र लाल गोस्वामी
सभी संत

जीवन चरित

ब्रज परंपरा के वैष्णव संत।

श्री श्री चंद्र लाल गोस्वामी वाणी संग्रह

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वृन्दावन की तौ उपमा कौं वृन्दावन ही हैं

श्री वृन्दावन धाम की उपमा स्वयं श्री वृन्दावन धाम ही है। किसी अन्य से इसकी तुलना संभव नहीं है। यह अति मधुर है, और मैं इसका वंदन करता हूँ। [1] श्री रा...

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राधा कृष्ण गावै रोम-रोम हरसावै

जिनके द्वारा श्री राधा कृष्ण का गुणगान करने से रोम रोम हर्षित हो जाता है एवं प्रेम की मानो झरी से लग जाती है एवं अंग अंग पुलकित हो उठता है। [1] इस प्...

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सब भय छौड़ि अब लाड़िली की आड़ लीहै

हमने सब प्रकार के भय एवं आश्रय को त्याग कर अनन्य रूप से श्री लाड़ली [श्री राधा] की ही आड़ (आश्रय) ली है और हमें श्री विपिन बिहारी लाल पर पूर्ण भरोसा ह...

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महाछवि राजें कोटि भानु लिखि लाजैं रूप

निज धाम श्री वृंदावन में दिव्य युगल श्री राधा-कृष्ण एक दूसरे के अंक में विराज रहे हैं, जिनकी महाछवि की कांति कोटि-कोटि सूर्यों की आभा को भी तुच्छ कर र...

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हिय अकुलाल तरसात सरसात सदा

मेरा हृदय अकुला रहा है, तड़प रहा और व्याकुल हो रहा है; मैं आज बार-बार विनती करता हूँ, कृपया शीघ्र अपनी कृपा प्रदान करें। [1] मैं एक क्षण की भी बाधा स...

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जाति पाँति नाना भांति कुल अभिमान तजि

जाति, पंथ और कुल का अभिमान त्यागकर, मैं नित्य रसिकों के चरणों में श्रद्धापूर्वक सिर नवाऊँगा। [1] मैं सेवाकुंज, रासमंडल, यमुना पुलिन, वंशीवट, निधिवन...