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रसिक संत जीवनी
श्री हरिव्यस देवाचार्य
आध्यात्मिक सम्बन्ध एवं परंपरा विवरण
दीक्षा गुरु / पिताश्री माधवदास भट्ट जी (हित हरिवंश महाप्रभु के शिष्य)
विचारधारा प्रभावस्वामी हरिदास एवं श्री हित हरिवंश महाप्रभु (हरित्रयी परंपरा)
सम्बद्ध संप्रदायराधावल्लभ / हरित्रयी परंपरा
भक्ति भाव / रसपरम विनम्रता, रागानुगा भक्ति, सखी भाव
जीवन चरित
श्री हरिराम व्यास (व्यास जी) वृंदावन के ऐतिहासिक त्रिमूर्ति 'हरित्रयी' के तीसरे स्तम्भ थे। वे ओरछा के एक प्रतिष्ठित विद्वान थे, परंतु सब कुछ त्यागकर वृंदावन की धूल में आ बसे। उन्होंने व्यास घेरा में रहकर युगल किशोर जी की सेवा की। व्यास जी अपनी बेबाक और स्पष्ट टिप्पणियों के लिए प्रसिद्ध थे। उन्होंने संतों के प्रति अपराध और वैष्णवों में आपसी भेद का कड़ा विरोध किया और सरल प्रेम मार्ग को ही सर्वोत्तम बताया।