आध्यात्मिक सम्बन्ध एवं परंपरा विवरण
जीवन चरित
सम्बन्धित सन्दर्भ (Topical Connections)
सम्बन्धित सन्त
प्रमुख ग्रन्थ
प्रमुख अवधारणाएँ
श्री स्वामी श्री हरिदास वाणी संग्रह
रोम रोम रसना जो होती, तऊ तेरे गुन न बखाने जात
श्री राधे, यदि मेरे रोम रोम जिह्वा होती तब भी आपके गुणों का बखान करने में असमर्थ है।
पिय सौं तू जोई जोई करै सोई छाजै
श्री हरिदासी सखी कहती हैं हे प्यारी जू [राधे] आप जो जो भी करती हैं प्रियतम [श्री बिहारीजी] को वो सब सब प्रिय लगता है। हे प्यारी, आपकी कौन समानता कर सक...
आवत जात बजावत नूपुर
निकुंज महल में सुंदर सेज शोभायमान है, श्री प्यारी जू आते जाते सुंदर मधुर नूपुरों की धवनि सुन श्री कुंज बिहारी की केली विलास की इच्छा तीव्र हुई। श्री क...
गुन की बात राधे तेरे आगैं को जानैं
श्री ललिता सखी [श्री हरिदासी सखी] निकुंज विहारिणी श्री राधा जू के गुणों का वर्णन कर रही हैं : "हे राधे, ऐसा कौन है जो आपके गुणों का वर्णन करने में समर...
भूलैं-भूलैं मान न करि री प्यारी
श्री कृष्ण श्री राधा से कहते हैं, जब श्री हरिदासी [ललिता सखी] भी उनके पास ही खड़ी हैं। हे राधे, भूल से भी आप हमसे मान मत कीजिये! जब मैं आपकी भौंहों च...
तेरौ मग जोवत लाल बिहारी
श्री हरिदासी सखी कहती हैं कि हे प्यारी जू, श्री बिहारीजी आपकी प्रतीक्षा कर रहे हैं, आप हैं कि समाधि लिए बैठी हैं, एवं समाधि भी आप तोड़ना नहीं चाहती, आ...
दुहुँनि की सहज बिसाँति
हरिदासी सखी अन्य सखी से कह रही हैं। श्री कुञ्ज बिहारी बिहारिनी एक संग सहज ही रसमय केलिपरायण हो शतरंज की मधुर विसाँति (बिछौना) बिछा खेल खेल रहे हैं। [1...
दामिनि कहत मेघ सौं
दामिनी मेघ से कहती हैं कि श्यामा श्याम की जो जन हमारे से उपमा [तुलना] देते हैं वह उपमा देना ही झूठ है। परंतु श्री लाल जी तो साँचे मेघ एवं श्री स्वामि...
हँसत खेलत बोलत मिलत
श्री हरिदासी सखी अन्य रसिक सखियों से कहती हैं: दिव्य दंपति प्रीतम प्यारी रस भरे सागर में हँस हँस - मिल कर खेल - खेल रहे हैं, बातें कर रहे हैं और रस म...
झुलत डोल दोऊ जन ठाढ़े
आज दोऊ जन [श्री राधा कृष्ण ] आनंद में संलग्न झूला झूल रहे हैं। महा यौवन की प्रबलता से भरे वे झूले के डंडी-रस्सी अपने हस्त कमलों से पकड़े हुए एवं झूले क...
झूलत डोल श्रीकुंजबिहारी
सखी सखी से कह रही है- अति आनंद से भर पुष्यों के निकुंज में पिय प्यारी दोनों (डोल) झूला झूल रहे हैं। एक ओर कुंज बिहारी हैं तो दूसरी ओर रसिकों की स्वामि...
जहाँ जहाँ चरन परत प्यारी
श्री कृष्ण श्री राधा से कहते हैं कि जहाँ भी आपके कमल स्वरूप चरण पड़ते हैं, मेरा मन मानो परछाईं की तरह उन्ही चरणों के पीछे फिरता है। [1] मैं अनेक रूप ...
प्यारी जू आगै चलि
हरिदासी [ललिता] सखी कहती हैं: श्री प्यारी ज़ू [राधा रानी] आगे आगे चलिए, गहवर वन के भीतर और भीतर जहाँ कोयल गा रही है। वहाँ अति ही विचित्र फूलों एवं पत...
प्यारी अब सोइ गई
श्री हरिदासी [ललिता] सखी कहती हैं: हे प्यारे, प्यारी जू [राधिका] अब सो गयी हैं। जैसे जैसे मैं इन्हें जगाने की कोशिश करती हूँ, वैसे वैसे यह उतना ही नह...
बनी री तेरे चारि चारि चूरी करनि
श्री लाल जी [कृष्ण] श्री लाडिलीजी [राधा] से बोले- हे प्यारीजी, आपके सुकोमल करों में चार-चार चूड़ियाँ अत्यंत शोभायमान हैं।आपके कंठ में रत्नों हीरे से ज...
कस्तूरी कौ मर्दन अंग में कियैं मुरली धरैं
सखी कहती हैं: आज श्री राधे ने अपने अंगों में कस्तूरी का मर्दन, होठों पर बांसुरी, एवं पीताम्बर वस्त्र धारण करके श्याम [कृष्ण] का रूप धारण किया है, और प...
हरि के अंग कौ चंदन लपटानौ
एक सखी श्री प्रिया जी से कह रही है- हे श्यामा जू, श्री हरि के अंग से लगा हुआ चंदन आपके तन पर लग गया है। ऐसा लग रहा है, मानो आपने पीले रंग की चोली पहन...
चलिये छबीली छबीलौ बोलत
सखी कहती है: हे छबीली जी [श्री राधिका] चलिए मेरे संग, छबीलौ [श्याम सुंदर] आपको बुला रहे हैं। श्री श्याम सुंदर की आज की बानिक पर तृण टूटत है अर्थात आज ...
सुघर भयै हौ बिहारी याही छाँह तें
सखी [ललिता] श्री राधिका से कहती हैं: प्यारी राधे, श्री बाँके बिहारी जी आपकी छाया [चरण कृपा के बल] से ही सुघर [चतुर, कुशल] बन पाये हैं। उनका पूर्ण आकर्...
यह अचरज देख्यौ न सुन्यौ कहूँ
एक सखी अपनी अंतरंग सखी से कहती है: ऐसा आश्चर्य न ही कभी देखा है और न ही सुना है कि एक दामिनी [श्री राधा] एक नवीन मेघ [श्री कृष्ण] संग नित्य एक रस विलस...
ज्यौंही-ज्यौंही तुम राखत हौ
हे हरि! आप जैसे-जैसे मुझे रखते हैं, वैसे-वैसे ही मैं रहता हूँ। [1] आपकी इच्छा के बिना मैं एक पग भी आगे नहीं बढ़ा सकता; फिर विशेष कर्तव्य (भगवद्-प्रा...
मानि तूब चलि री एक संग रह्यौ कीजै
सखी श्री राधे की मान की सम्भावना देख बोली - नयन बाँके कर कहाँ चली, हे मानिनी, आप दोनों एक संग रहें। ऐसा तभी कीजिए यदि आप उनके बिना जी सकती हैं। प्रिय ...
ऐसी जिय होत जो जिय सौं जिय मिलै
श्री श्यामसुंदर प्यारी श्री राधा से कहते हैं - हे प्यारी जू, मेरी ऐसी इच्छा हो रही है कि हृदय से हृदय मिल जाये, तन में तन समा जाय, परन्तु हे प्यारी, ...
नील लाल गौर के ध्यान बैठे कुंजबिहारी
दिव्य दम्पति श्री कुंज बिहारी बिहारीनी विभिन्न रत्नों से जटित शैया पर विराजमान हैं। श्री लाडिली जी के अति अद्भुत श्रृंगार ने श्री लाल जी को मोह लिया ह...
प्यारी तौपै कितौक संग्रह छबिन कौ
कुंज महल में श्री लाल जू प्रिया जी के चरणों से लिपटे हैं। श्री लाल जी [कृष्ण], श्री राधा से कहते हैं: हे प्यारी जू, तुम्हारे पास छबि के कितने संग्रह ह...
माई री, सहज जोरी प्रगट
"माई री, सहज जोरी प्रगट भई, जु रंग की गौर-स्याम घन-दामिनि जैसैं। प्रथम हूँ हुती, अब हूँ आगें हूँ रहिहै, न टरिहै तैसैं” - स्वामी श्री हरिदास अरि सखी...
अद्भुत गति उपजति अति नृत्तत
मंडलाकार सखियों के मध्य श्री श्यामा-श्याम नृत्य कर रहे हैं जिससे अद्भुत गति प्रकट हो रही है। [1] भोरी श्री राधा एवं श्याम सुंदर अंग-से-अंग मिलाकर सुध...
राम कृष्ण के, विष्णु के, भक्तन कौ नहिं पार
श्री चरण दास कहते हैं कि नित्य-विहार-रस परम अद्वितीय है, जिसका पार राम, कृष्ण, विष्णु आदि के भक्त भी नहीं पा सकते, और जिसे ललिता जी (स्वामी हरिदास) की...
प्यारी जू हम तुम दोऊ इहाँ न कोउ हितू मेरौ
(श्री कृष्ण निभृत निकुंज में श्री राधा से कहते हैं): हे प्यारी जू, हम दोनों एक ही कुंज के साथी हैं, तो हम क्यों एक दूसरे से रूठें। यहां कोई हमारा ऐसा ...
सुनि धुनि मुरली बन बाजै
अरी सखी! कुंजों में बज रही मुरली की धुन सुन, श्री हरि ने रास रचाया है। प्रत्येक कुंज में वृक्ष एवं लताएँ प्रफुल्लित हैं एवं रास मण्डल सोने एवं मणियों ...
प्यारी जू जब जब देखौं तेरो मुख
श्री कृष्ण श्री राधा से कहते हैं— हे प्यारी जू! जब भी मैं तुम्हारे मुख-कमल को देखता हूँ, तो ऐसा लगता है जैसे मैं तुम्हें पहली बार देख रहा हूँ। ऐसा भ्र...
सोई तौ बचन मोसौं मानि
निकुंज महल में दिव्य युगल श्री राधा कृष्ण विराजमान हैं। उसी समय श्री राधा अपना प्रतिबिंब देखते हुए, अपने ही प्रतिबिंब से मधुर वचन कहने लगीं: हे सुंदर...
राधा रसिक कुंजबिहारी कहत जु हौं
रसिक श्री कुंजबिहारी श्री राधा से कहते हैं - प्यारी राधे, सुनो! आपकी सौगंध, में आपको छोड़ कर कहीं नहीं गया। [1] यदि आपके हृदय में संदेह उत्पन्न हो रह...
फूलीं सब सखी देखि देखि
रसिक सखीगण हरिदासी सखी को लाडिली-लाल को लाड़-लड़ाते, दुलराते निहार अति प्रसन्न हो रही हैं। [1] नैन कमल, मुख कमल, चरण कमल की सेवा में बिहारीजी मगन हैं।...
यह कौन बात जु अबही और अबही और
श्री हरिदासी सखी मनोहर शैय्या पर विराजित लाल लाड़िली से लाड़ लड़ा रही हैं। श्री कुंजबिहारी कहते हैं हे प्यारी जी, यह कैसा अद्भुत आपका रूप लावण्य है जो...
नव निकुंज ग्रह नवल आगैं
नवल निकुंज में नवल प्रियतम के समक्ष नवल वीना लिए श्री प्यारी जू [श्री राधा] ने गौरी राग का वादन आरम्भ किया । प्रिया पिय से बोलीं- जैसा मैं सिखा रही ह...
प्यारी तेरी बॉफिन बान सुमार
श्री कृष्ण श्री राधा से कहते हैं - हे प्यारी जू! आपकी चितवनि अर्थात् पलकें बाण के समान हैं एवं भौंहें धनुष के समान हैं जिसके प्रहार से कोई नहीं बच सकत...
अजहूँ कहा कहति है री मारै नैंन आरनि
ललिता अवतार स्वामी श्री हरिदास जी श्री प्रियाजू (श्री राधा) से कहते हैं - हे प्रियाजू ! आपकी चितवन के प्रहार से लाल (श्री कृष्ण) के हृदय में ऐसी वेदन...
प्यारी तेरौ बदन चंद देखैं
लालजी (श्री कृष्ण) श्री राधा से कहते हैं - हे प्यारी जू, आपके चन्द्र वदन को देखकर मेरे हृदय रूपी सरोवर में चाह रूपी कमल प्रफुल्लित हुई है। [1] लालजी ...
लोग तो भूलैं भलैं भूलैं
इस पद में स्वामी श्रीहरिदासजी अपने आश्रित भक्तों के प्रति स्नेह से भरे हुए कहते हैं कि, “हे मेरे प्रिय भक्तों! सामान्य लोग तो श्रीबिहारीजी के अनन्य आश...
कुंजबिहारी कौ बसन्त सखि
अरी सखी ! चलो न, श्यामा- कुञ्जविहारी का वसन्तोत्सव देखने चलें। देखो, श्रीधाम वृन्दावन नव-नव उमंगों से पुलकित हो रहा है। इसकी कुंज निकुजें भी नवीन हैं ...
डोल झूलत बिहारी बिहारिनि
श्री श्यामा श्याम आनंद में भर अंग से अंग मिलकर निकुंज में झूला झूल रहे हैं एवं फूलों की वर्षा हो रही है। सुर लोक, गंधर्व लोक एवं अन्य लोकों की नारिय...
हिंडोरेंब झूलत लाल दिन दूलहु
सखी सखी से कह रही है- सखी देख! निकुंज के सुख पुंज महल में दोनों प्रिया प्रियतम हिंडोले में प्रेम रूपी रूपी डोरी से बंधे अंग संग दुल्हा दुलहिन बने झूल ...
प्यारी तू गुननि राइ सिरमौर
हे कुंजबिहारिणी श्री राधे! आप समस्त गुणों में अग्रणी, राजाओं में सिरमौर हैं। नृत्य और गायन की अनुपम कला में आप अद्वितीय हैं। आपकी मनोहर गति से नाना प्...
बेंनी गूँथि कहा कोउ जानें मेरी सी
आज श्रीलाल (श्रीकृष्ण) की प्रबल अभिलाषा है कि उन्हें प्यारीजू (श्रीराधा) की वेणी गूंथने का सौभाग्य प्राप्त हो। श्री प्रिया जू का कथन है कि यह सेवा सखि...
नाचत मोरनि संग स्याम
श्री श्यामसुंदर मोरों के संग मनभावन नृत्य कर श्री श्यामा जू को रिझा रहे हैं। [1] उसी प्रकार कोयल गान करने लगी और पपीहा भी उसके संग अपना सुर मिला देती...
ऐसी तौ बिचित्र जोरी बनी
दिव्य वृन्दावन के निकुंज में प्रिया-प्रियतम की विचित्र जोड़ी अति शोभायमान है मानों श्याम तमाल पर कंचन बेलि श्यामा जी लिपटी हुई हैं। इस शोभा को निरख सखी...
झूठी बात सांची करि दिखावत
प्रस्तुत पद में श्रीहरिदासजी जीव की अति प्रबल संसार-आसक्ति को देखकर श्रीबिहारीजी से कहते हैं कि आप ऐसे नागर नटवर-शिरोमणि हो जो कि इस मिथ्या (झूठे) माय...
चलि री भीर तें न्यारेई खेलैं
श्री कृष्ण श्री राधिका से कहते हैं: हे प्यारी जी! भीड़ से हट एकान्त में क्यों न हम और आप कुंजों एवं निकुंजों के मध्य कोई न्यारा खेल खेलें।[1] जहां को...
द्वै लर मोतिन की एक पुंजा पोति कौ सादा
श्री कुंजबिहारिणीजू (श्रीराधा) के गले में मोती की दो लरियों वाला हार, सादा और एकदम सुगठित है।हे सखी! मेरी दृष्टि उनसे हटती ही नहीं। [1] उनके दोनों हा...
ऐसि तौ विचित्र जोरि बनी, ऐसि कहुँ देखि सुनि न बनी
ऐसि तौ विचित्र जोरि बनी, ऐसि कहुँ देखि सुनि न बनी - श्री हरिदास, केलिमाल श्री हरिदास जी कहते हैं की दिव्य दम्पति यह प्रिय प्रियतम की ऐसी जोरि है जो ...
राधे दुलारी मान तजि
श्री कृष्ण श्री राधा से कहते हैं: हे दुलारी राधे, आप मान तज प्रसन्न हों। आपकी चढ़ी हुई चितवन मुझे अत्यंत भयभीत कर रही है। आपकी प्रसन्नता में मेरे प्रा...
कुंजबिहारी नाचत नीके; लाड़िली नचावति नीके
श्री कुंजबिहारी [श्री कृष्ण] सुंदर नृत्य कर रहे हैं, श्री राधिका उन्हें सुन्दर ढंग से नृत्य करा रही हैं। श्री बिहारीजी और उनकी प्रिया श्री राधिका दोनो...
आजु की बानिक प्यारे तेरी
सखी प्रिया-प्रियतम से कह रही है— आज आप दोनों की ऐसी अद्भुत शोभा बनी है, जैसी कभी देखी न गई। इस छवि का यथार्थ वर्णन करना संभव नहीं। [1] प्यारी जी! प्...
प्यारी जैसो तेरो आँखिन में मैं होँ
लाल जी प्रिया जी से कह रहे हैं- हे प्यारी जी ! आपके रस भरे नयनों में मैं अपनापन देख रहा हूँ । क्या आप भी मेरे नयनों में उसी भाँति अपनापन देख रही हैं य...
प्यारी तेरी महिमा वरनी न जाय
प्रियतम कह रहे हैं— हे प्यारी जू, आपकी महिमा का वर्णन मैं कैसे करूँ? मुझे कामरूप प्रेम ने वश में कर रखा है, और आप अति सुकुमारी हैं; आलसवश केलि को भी म...
देखि देखि फूल भई
(राग कान्हरौं) देखि देखि फूल भई। प्रेम के प्रकास प्रीति के आगैं ह्वै जु लई॥[1] सुनि री सखी बागौ बन्यौ आजु तुम पर तृन टूटत है जु नई। श्रीहरिदास के स्...
बचन दै मान न करौं
प्रियतम बाँके बिहारी श्री राधा रानी से कहते हैं— हे प्यारीजू! वचन दीजिये कि आप कभी मान न करेंगी। मन से कभी मान नहीं करेंगी, वचनों से कभी रुखाई न बरतें...
प्रेम समुद्र रूप रस गहरे
प्रेम और रूप के अगाध महासागर (अर्थात "श्री बिहारी जी") की गहराई को नापना सर्वदा असंभव है ।
जहाँ जहाँ चरन पडत प्यारी जू तेरे
श्री कृष्ण श्री राधा से कहते हैं कि जहाँ भी आपके कमल स्वरूपी चरण पड़ते हैं, मेरा मन मानो परछाई की तरह उन्ही चरणों के पीछे फिरता है।
श्री हरिदास के स्वामी स्यामा-कुंजबिहारी की
यदि अनंत कोटि रसिक संत भी बताना चाहें, तो भी राधा कृष्ण के आलौकिक सौंदर्य का वर्णन नहीं कर सकते।
रोम रोम रसना जो होती, तऊ तेरे गुन न बखाने जात
रोम रोम रसना जो होती, तऊ तेरे गुन न बखाने जात । कहा कहों एक जीभ सखी री, बात की बात बात । श्री हरिदास के स्वामी श्याम कहत री, प्यारी तू राखत प्राण आधार...
श्री हरिदास के स्वामी स्यामा, कुंजबिहारी रस बस करि लीन | प्यारी तेरी महिमा बरनी न जाए, जिहिं आलस काम बस कीन ||
श्री लाल जी लाडी जी को बताती हैं "ओह राधा, आपके महानता का वर्णन करने के लिए मेरे पास कोई शब्द नहीं है। श्री हरिदास जी (ललिता अवतार) कहते हैं, वह उस नश...
यह कौन बात जू अबहीं और अबहीं और
श्री हरिदास जी कहते हैं की श्री बिहारीजी श्री राधारानी से कहती हैं कि हे प्रिय जो आपका यह रस कितना अलौकिक है और किस प्रकार का है कि जितना भी इस रस को ...
हरि के नाम को आलस क्यों करत हैं रे
" हरि के नाम को आलस क्यों करत हैं रे, काल फिरत सर साँधे । ” - स्वामी श्री हरिदास मृत्यु रूपी काल धनुष पर बाण चढ़ाए हुए एक दम तैयार खड़ी है, इसलिए ...
“रोम रोम रसना जो होती, तऊ तेरे गुन न बखाने जात || ”
श्री राधे, यदि मेरे रोम रोम जिह्वा होती तब भी आपके गुणों का बखान करने में असमर्थ है।
तुव जस कोटि ब्रह्माण्ड बिराजे राधे
श्री लाल जी श्री प्यारी जू से कहते हैं कि आपका यश अनंत कोटि ब्रह्माण्डों में व्याप्त है और आपकी शोभा अगाध एवं अनंत है अर्थात उसका वर्णन करना सर्वथा अस...
कहिं श्रीहरिदास हित कीजे श्री बिहारी जू सौं
स्वामी श्री हरिदास जी कहते हैं यदि प्रेम करना है तो बिहारीजी से ही करो, क्यूंकि केवल वह ही हैं जो प्रेम निभाना जानते हैं।
काहू कौ बस नहीं तुम्हारी कृपातें, सब होय बिहारी बिहारिन
राधा-कृष्ण की कृपा किसी के वश में नहीं है — यह पूरी तरह उनके स्वभाव और इच्छा पर निर्भर करती है। वे ही सब कुछ कर सकते हैं। जो उनसे सच्चा प्रेम करता है,...
देखौ इनि लोगन की लावनि
स्वामी हरिदासजी कहते हैं कि इन संसारी जीवों की विचित्र प्रीति (लावनि) तो देखो! ये साक्षात् आनंद-निधि श्रीबिहारीजी की भक्ति का परित्याग कर, मिथ्या और क...
तिनुका ज्यौं बयार के बस
जिस प्रकार पृथ्वी पर पड़ा हुआ एक तुच्छ तृण पूर्णतः पवन के वेग पर आश्रित होता है—वायु उसे जिस दिशा में उड़ाकर ले जाती है, उसे विवश होकर वहीं जाना पड़ता है...
बात तौ कहत कहि गई
निकुंज महल में प्रिया प्रियतम सुख सेज विराजमान है। बिहारी जी बिहार की विनती कर रहे हैं। प्यारे जी की बात पर प्यारी जी को विश्वास नहीं। वह मुख फेर हँसत...
ऐ हरी मो सौ न बिगारन कौ
श्री हरिदास जी महाराज कहते हैं, “एक ओर हम जीव हैं, जिन्हें अपनी बिगाड़ने की आदत लगी हुई है, और दूसरी ओर अकारण करुणा के सागर, श्री बिहारी जी हैं, जो सद...
कबहूँ-कबहूँ मन इत-उत जात, यातैंब कौन अधिक सुख
निज आश्रित जन से स्वामी श्री हरिदास जी कहते हैं, “हे भाई! कभी तुम्हारा मन मायिक सुखों में डूब जाता है, तो कभी परमार्थ के सुखों में। तुम्हें यह विचार क...
प्यारी तेरी पुतरी काजर हू तैं कारी
हे प्यारीजी [राधे], आपके नयनों की पुतली काजल से भी काली मानों दो भँवर रूप रस पान करने के लिए उड़ उड़ मँडरा रहे हैं। सुनहरे चम्पे के वृक्ष पर कुंदन की ...
काहू कौ बस नाहिं, तुम्हारी कृपा तें सब होय बिहारी-बिहारिनि
हे बिहारी बिहारिणी! सुर-मुनि मोहिनी आपकी दुर्जय माया की प्रबलता ऐसी है कि किसी का भी बल नहीं है जो अपने साधन-प्रयत्न से आपकी माया से पार हो सके। जो कु...
हित तौ कीजै कमलनैन सौं
हित तौ कीजै कमलनैन सौं, जा हित के आगैं और हित लागै फ़ीकौ । कै हित कीजै साधु-संगति सौं, ज्यौं कलमष जाय सब जी कौ । । - ललिता अवतार श्री हरिदास जी, अष्...
संसार समुद्र मनुष्य मीन
यह संसार एक अथाह सागर के समान है, जिसमें यह मनुष्य-रूपी मीन (मछली) काल के क्रूर घड़ियालों और मगरमच्छों जैसे हिंसक विषयों से घिरी हुई है, जो उसे प्रतिपल...
मन लगाय प्रीति कीजै, कर करवा
स्वामी श्रीहरिदासजी नित्य-विहार के उपासकों को यह आज्ञा देते हैं कि अपने मन को एकाग्र कर श्रीश्यामा-कुंजबिहारी से प्रेम करो। ब्रज की रज-निर्मित करुवा स...
बंदे, अखतियार भला
परम रसिक स्वामी श्रीहरिदासजी महाराज कहते हैं, “हे जीव! तुझे यह अनमोल मानव-देह अत्यंत दुर्लभ सौभाग्य से प्राप्त हुआ है। अब अपने चित्त को संसार के व्यर्...
हरि कौ ऐसोई सब खेल
इस मायिक जगत में श्रीहरि की लीला अत्यंत विलक्षण है, जहाँ वास्तविक सुख का न तो कोई बीज है और न ही कोई लता। जीव नश्वर पदार्थों से सुख पाने की आशा में वै...
जोरी विचित्र बनाई री माई
निकुंज महल में प्रिया प्रियतम शैया पर बैठे एक दूसरे का मुख दर्शन करते हुए परस्पर एकटक निहार रहे हैं। आपस की प्रीति ऐसी है कि उन्हें ना दिवस की खबर है ...
जौलौं जीवै तौलौं हरि भज रे मन और बात सब बादि
इस पद में स्वामी श्रीहरिदासजी महाराज समस्त जीवों को उपदेश देते हुए कहते हैं, “हे भाई! जब तक तू इस जगत में जीवित है, सब प्रकार के सांसारिक झंझटों को त्...
प्रेम-समुद्र रूप-रस गहरे, कैसैं लागैं घाट
जिस प्रकार समुद्र की अगाधता का कोई ओर-छोर नहीं है, उसी प्रकार प्रेम-सागर, जिसमें केवल रूप और रस की गहराई है, उसका ओर-छोर कोई कैसे पा सकता है? कोई भी ...
राधे चलि री हरि बोलत
श्री हरि [कृष्ण] श्री राधा से बोलते हैं: चलिए कुंज में, जहां कोयल आलाप दे रही है, सुर पंछी गान कर रहे हैं मानो राग में गा रहे हों। [1] जहां मोर भी पं...
प्यारी तेरी महिमा वरनी न जाय
प्यारी तेरी महिमा वरनी न जाय - श्री स्वामी हरिदास श्री कृष्ण श्री राधा से कहते हैं: प्यारी आपकी महिमा वर्णन करना असंभव है।
तुव जस कोटि ब्रह्मांड बिराजै राधे
भावार्थ: प्यारी को अति प्रसन्न देख प्यारे जी कह रहे हैं - हे राधे, आपका यश प्रताप कोटि - कोटि ब्रह्मांड में विराज रहा है। [1] आपसे प्रेम करने वाले ने...
रोम रोम जो रसना होती तऊ तेरे गुन न बखाने जात
लाड़िली लाल सुन्दर गुलाबों की पत्तियों की सेज पर शोभायमान हो रहे हैं। महा आनन्द रस में पगे हुए हैं। प्यारे प्रियतमा की कृपा में भींगे हुए रोम रोम से प...
हरि के नाम कों आलस कत करत है रे
अरे अज्ञानी जीव! तू श्रीहरि-नाम रूपी धन का संग्रह करने में प्रमाद (आलस) क्यों करता है? देख, साक्षात् काल तुझे अपना ग्रास बनाने हेतु धनुष पर बाण संधान ...
दृष्टि चौंप बर फंदा मन राख्यौ लै पंछी बिहारी
श्री राधा की रस भरी दृष्टि ही एक फंदे के समान है जिसमें बिहारी [कृष्ण] रूपी पक्षी नित्य ही फँसा हुआ है। श्री प्यारी जू का कृपालुता का स्वभाव इस बिहारी...
भींजन लागे री दोऊ जन
श्री वृन्दावन की हरी भरी भूमि में दोनों प्रिया प्रियतम अनुराग रंग में रंगे नृत्य कर रहे हैं। प्रिया जी के अंग में सुंदर रंग की साड़ी शोभायमान हो रही ह...
जगत प्रीति करि देखी
प्रस्तुत पद में स्वामी श्रीहरिदासजी महाराज संसार की नश्वरता और यहाँ के स्वार्थपरक अनुराग का अत्यंत सूक्ष्म चित्रण करते हैं। वे कहते हैं कि इस जगत मे...
रुचि के प्रकास परस्पर खेलन लागे
निकुंजमहल श्याम श्यामा के बिहार से प्रकाशित है। पुष्पों की सेज पर दोनों एकान्त में विलस रहे हैं। प्रिया जी का मुख चन्द्र प्रफुल्लित है। ललिता सखी संगी...
ऐसैंई देखत रहौं जनम सुफल करि मानौं
सुन्दर निकुंज महल में पियप्यारी गलबाँहीं दिये विराजित हैं। दोनों ने पुष्पों के आभूषण धारण कर रखे हैं। आनन्द रस सागर में बिहार कर रहे हैं। सखीगण हर्षित...
प्यारी जैसो तेरो आँखिन में मैं होँ
लाल जी प्रिया जी से कह रहे हैं- हे प्यारी जी ! आपके रस भरे नयनों में मैं अपनापन देख रहा हूँ | क्या आप भी मेरे नयनों में उसी भाँति अपनापन देख रही हैं य...
श्री हरिदास के स्वामी स्यामा
यदि अनंत कोटि रसिक संत भी बताना चाहें, तो भी राधा कृष्ण के आलौकिक सौंदर्य का वर्णन नहीं कर सकते।
हरि के नाम कों आलस कत करत है रे
हरि नाम जप में आलास क्यों करते हो, काल तुम्हें ले जाने के लिए धनुष पर बाण चढ़ाये फिर रहा है। [1] वह न तो शुभ समय को जानता है न तो अशुभ समय को, वह तुम्ह...
हित तौ कीजै कमलनैन सौं
कमल के समान नेत्र हैं जिनके, ऐसे कमल नयन श्री बिहारीजी से ही हित -प्रेम करना चाहिए क्यूंकि उसके आगे सांसारिक एवं मोक्ष तक की कामना तुच्छ लगती है या सा...
प्यारी तेरी महिमा वरनी न जाय जिहिं आलस काम बस कीन
प्रियतम कह रहे हैं- आपकी महिमा का वर्णन मैं कैसे करुँ ? मुझे काम - प्रेम ने बस मे कर रखा और आप अति सुकुमारी हैं, आलस में केलि को बिसार दिया। आपके लिए ...
“रोम रोम रसना जो होती, तऊ तेरे गुन न बखाने जात || ”
श्री राधे, यदि मेरे रोम रोम जिह्वा होती तब भी आपके गुणों का बखान करने में असमर्थ है ।
रोम रोम रसना जो होती, तऊ तेरे गुन न बखाने जात
श्री कृष्ण श्री राधा रानी से कहते हैं कि यहां तक कि मेरे पास लाखों जिव्हा बोलना के लिए होती हो भी मैं आपके समस्त गुणों का पूरी तरह से वर्णन नहीं कर सक...
कहिं श्रीहरिदास हित कीजे श्री बिहारी जू सौं
स्वामी श्री हरिदास जी कहते हैं यदि प्रेम करना है तो बिहारीजी से ही करो, क्यूंकि केवल वह ही हैं जो प्रेम निभाना जानते हैं।
श्री हरिदास के स्वामी स्यामा, कुंजबिहारी रस बस करि लीन | प्यारी तेरी महिमा बरनी न जाए, जिहिं आलस काम बस कीन ||
- ललिता अवतार श्री हरिदास - केलिमाल श्री लाल जी लाडी जी को बताती हैं "ओह राधा, आपके महानता का वर्णन करने के लिए मेरे पास कोई शब्द नहीं है। श्री हरिदास...
प्रेम समुद्र रूप रस गहरे
प्रेम और रूप के अगाध महासागर (अर्थात "श्री बिहारी जी") की गहराई को नापना सर्वदा असंभव है |
जहाँ जहाँ चरन पडत प्यारी जू तेरे
श्री कृष्ण श्री राधा से कहते हैं कि जहाँ भी आपके कमल स्वरूपी चरण पड़ते हैं, मेरा मन मानो परछाई की तरह उन्ही चरणों के पीछे फिरता है ।
प्यारी जू जब जब देखौं तेरो मुख
श्री कृष्ण श्री राधा से कहते हैं: हे प्यारी जू, जब भी मैं तुम्हारे मुखकमल को देखता हूँ तो ऐसा लगता है जैसे मैं तुम्हें पहली बार देख रहा हूं। ऐसा भ्रम ...
यह कौन बात जू अबहीं और अबहीं और
श्री हरिदास जी कहते हैं की श्री बिहारीजी श्री राधारानी से कहती हैं कि हे प्रिय जो आपका यह रस कितना अलौकिक है और किस प्रकार का है कि जितना भी इस रस को ...
ऐसि तौ विचित्र जोरि बनी, ऐसि कहुँ देखि सुनि न बनी
श्री हरिदास जी कहते हैं की दिव्य दम्पति यह प्रिय प्रियतम की ऐसी जोरि है जो न तो कभी देखि है न सुनी है।
माई री, सहज जोरी प्रगट
अरि सखी राधा कृष्ण की जोरि जो गौर एवं श्यामल रंग की है, ऐसी विचित्र जोरि के समान न तो कभी कोई जोरि थी, न है और न ही आगे होगी|
काहू कौ बस नहीं तुम्हारी कृपातें, सब होय बिहारी बिहारिन
राधा-कृष्ण की कृपा किसी के वश में नहीं है — यह पूरी तरह उनके स्वभाव और इच्छा पर निर्भर करती है। वे ही सब कुछ कर सकते हैं। जो उनसे सच्चा प्रेम करता है,...
कुंजबिहारी हौं तेरी बलाइ
कुंजबिहारी की भावना है प्यारी जी आप मुझे अंग संग कर कुंजों विहार कर रही हैं , मैं आप की बलायें यानि बलिहारी पर लेता हूँ, आप अपनी कृपालुता बरसाती रहें ...
झूठी बात सांची करि दिखावत
प्रस्तुत पद में श्री हरिदास जी जीव की अति प्रबल संसार आसक्ति को देखकर श्री बिहारी जी से कहते हैं कि आप ऐसे नागर नटवर शिरोमणि हो जो कि इस मिथ्या (झूठे)...
हरि के नाम को आलस क्यों करत हैं रे
मृत्यु रूपी काल धनुष पर बाण चढ़ाए हुए एक दम तैयार खड़ी है, इसलिए हरि कि भक्ति में लापरवाही मत करो।
एक समै एकांत बन
एक समय एकांत वन में प्रिया प्रियतम [श्री राधा कृष्ण] एक दूसरे का शृंगार कर, एक दूसरे का प्रतिबिम्ब देख रहे हैं। [1] जैसा आज का श्रृंगार है वैसा अद्भुत...
प्यारी तेरौ बदन अमृत की पंक तामें बींधे नैंन द्वै
कुंजमहल में दोनों प्रिया प्रियतम विराज रहे हैं। प्यारे जी कह रहे हैं - हे प्यारी ! मेरे नयन तुम्हारे अमृत रूपी बदन कमल में फँस तुम्हारा रूप रस का पान ...
माई री सहज जोरी प्रगट भई
बाँके बिहारी लाल के प्राकट्य के समय हरिदास जी कहते हैं- हे सखी सहज जोड़ी नित्य श्याम-श्यामा की प्रकट हुई है। गौर श्याम वर्ण की यह जोरी घन दामिनी के सम...
कस्तूरी कौ मर्दन अंग में कियैं मुरली धरैं
कुंजमहल में हरिदास जी पिय प्यारी को नये-नये लाड़ लड़ा रही हैं। इस सुख आनंद की चर्चा सखीजन आपस में कह रही हैं। सखी कहती है- राधे जी ने श्री श्याम का श्...
आजु की बानिक प्यारे तेरी , प्यारी तुम्हारी छवि बरनी न जाइ छबि। (29)
सखी प्रिया प्रियतम से कह रही है - आज आप दोनों की शोभा ऐसी बनी सो न कभी नहीं देखी । इस छवि का वर्णन नहीं किया जा सकता । प्यारी जी ! प्यारे की श्यामता आ...
तुव जस कोटि ब्रह्माण्ड बिराजे राधे
श्री लाल जी श्री प्यारी जू से कहते हैं कि आपका यश अनंत कोटि ब्रह्माण्डों में व्याप्त है और आपकी शोभा अगाध एवं अनंत है अर्थात उसका वर्णन करना सर्वथा अस...
आज तृण टूटत है री, ललित त्रिभंगी पर
कुंजमहल में विराजमान प्यारे पर प्यारी जी कृपा बरसा रही हैं। प्यार से कहती हैं - हे प्यारे ! मैं बिहारी बनूंगी और आप प्यारी बने । दोनों ने अपने रूप सज...
ऐ हरी मो सौ न बिगारन कौ
एक हम जीव हैं जिन को हमेशा सभी काम बिगड़ने की आदत पड़ी हुई है और दूसरी तरफ अति अकारण करुणा वरुणालय करुणामय बिहारी जी जो हमारा काम बनाने में ही लगे रहते ...
जो कछु कहत लाड़िलौ लाड़िली
सखी के समझाने पर कि प्रिय के उर में और कोई नहीं विलस रही यह आप ही हैं। परन्तु लाड़िली मानी नहीं। तब लाल जी के कहने पर सखी कहने लगी- प्यारे जो कुछ भी क...
प्यारी पहिरैं चुनरी
प्रिया प्रियतम निकुंज में विराज रहे हैं। प्यारी की अंग अंग की संदरता अद्वितीय है। आनंद रस बरस रहा है। प्यारे तो उन पर न्योछावर हो रहे हैं किंतु प्यारी...
हरि कौ ऐसोई सब खेल
मायिक जगत में श्री हरि का ऐसा ही विचित्र खेल है, जिसमें सुख का न कोई बीज है और न ही बेल। इसी वजह से समस्त व्यक्ति सांसारिक पदार्थों की आशाओं से सुखी ह...
डोल झूलत दुलहिनि दूलहु
सखी सखी से कह रही है - दोनों प्रिया प्रियतम नये-दुल्हा दुलहिन, पुष्पों से शोभित निकुंज प्रांगण में नवीन भावों के श्रृंगार कर झूला झूल रहे हैं। [1] होल...
Kunjbihari Ko Basant Sakhi
(Raag Gaud)Kunjbihari Kau Basant Sakhi,Chalahu Na Dekhan Jahin.Nav Ban Nav Nikunj Nav Pallav,Nav Juvatin Mili Mahin. [1]Bansi Saras Madhur Dhuni Suniy...
Pyari Tu Gunani Rai Sirmaur
(Raag Sarang)Pyari Tu Gunani Rai Sirmaur.Gati Mein Gati Upjati Nana Raag Raagini, Taar Mandar Sur Ghor. [1]Kahu Kachu Liyau Rekh Chhaya, Tau Kaha Bhay...
तू रिस छाँड़ि री राधे राधे
श्री कुंज बिहारी लाल प्यारी जू से कहते हैं कि हे राधे, हे राधे, आप अपना मान त्याग दीजिए। [1] आपका मान जितना जितना बढ़ता है उतना उतना मुझे कष्ट होता है...
Dvai Lar Motin Ki Ek Punja
(Raag Kanharau)Dvai Lar Motin Ki Ek Punja Poti Kau SaadaNetrani Drishti Laagai Jini Meri.Haathani Chaari Chaari Churi Paaeni Ikasaar ChuraChaupahalu I...
Bachan Dai Man Na Karaun
(Rag Kalyan) Bachan Dai Man Na Karaun. Man Bach Kram Tin Hun Ten Na Taraun. [1] Terei Kiyen Man Vyapi Hot, Tan Kahi Kaisen Kain Bharaun. Shriharidas K...
Beni Gunthi Kaha Kou Jane Meri Si
(Raga Saramga)Beni Gunthi Kaha Kou Jane Meri Si Teri Saun. Bicha Bicha Phula Seta Pita Rate Ko Kari Sakai Eri Saun. [1]Baithe Rasika S.nvarani Barani ...