श्री हित रूप लाल
जीवन चरित
श्री श्री हित रूप लाल वाणी संग्रह
हरिवंशी हरिदासी जहां व्यास
जहाँ रसिक-त्रिवेणी—अर्थात् मुरली-अवतार श्री हित हरिवंश, ललिता-अवतार स्वामी श्री हरिदास और विशाखा-अवतार श्री हरिराम व्यास जी—ने अखण्ड वास कर नित्य-विहा...
मन अटकौ रै जात है
मेरा मन मोहित होकर वृन्दावन के एक-एक ठौर पर अटक जाता है। ऐसी अद्भुत श्री वृन्दावन की भूमि के दिव्य वैभव का मैं किस प्रकार वर्णन करूँ?
व्रज वीथिन दै सोहनी
ब्रज की वीथियों की सोहनी सेवा करिए और ब्रजवासियों से नेह बढ़ाइए; तब श्री राधारानी कृपा करती हैं और निकुञ्ज-रस प्रदान करती हैं।
श्रीजमुना जी वा पार है मान सरोवर स्वक्ष
श्री यमुना जी के उस पार अत्यंत निर्मल और पावन मान सरोवर स्थित है। यहाँ गंगा और यमुना का मिलन साक्षात् प्रत्यक्ष रूप से दिखाई देता है।
छबीली नागरी हो धन
हे छबीली राधिके, आप धन्य धन्य हो क्योंकि आपका सुहाग अनादि एवं सर्वोत्कृष्ट है। [1] आपके प्रियतम मनमोहन (श्री कृष्ण) सदा आपके रंग में रंगे रहते हैं ज...
यह रस दुर्लभ जग में जानौं
संसार में इस रस को दुर्लभ ही समझो। वृन्दावन में घटित होनेवाली इस 'नित्य विहार' की केली लीलाओं के रस के इस सुक्ष मार्ग को प्रीति की रीति से पहचानो। [1...
जयति वृषभानुजा कुँवरि राधे
वृषभानु कुँवरी श्री राधे जू की जय हो, जो सच्चिदानंद हैं और जिनके प्रियतम श्यामसुन्दर रसिक सिरमौर हैं, तथा जो समस्त इच्छाओं को पूर्ण करने वाली हैं। [1]...
प्रथमहि भावुक भाव विचारै
श्री हित रूपलाल गोस्वामी जी कहते हैं कि रस उपासक को भजन आरंभ करने से पूर्व अपने सहज सखी भाव का विचार करना चाहिए। अपने श्री गुरु की कृपा मानकर, अपने मन...
पग-पग कोटि प्रयाग सम
कोटि-कोटि तीर्थों से संपन्न तीर्थराज प्रयाग भी श्री वृन्दावन के केलि-कुञ्जों में पग-पग पर शरण ग्रहण करता है; इसलिए जगत की समस्त मृग-तृष्णाओं का त्याग ...
बिनु सिर प्रेमी रहै निरंतर
सच्चे प्रेमी सदा ही बिना सिर (अर्थात् अहंकार को त्याग) के रहते हैं, क्योंकि उन्होंने अपने प्रियतम को अपना सर्वस्व, यहाँ तक कि अपना सिर भी समर्पित कर द...
बडौ रास मंडल इहां सेवित हित हरिवंश
श्री वृन्दावन में ‘बड़ा रास-मंडल’ नामक एक अत्यंत पावन स्थान है, जहाँ श्री हित हरिवंश महाप्रभु ने श्री राधा-कृष्ण की सेवा की थी। इसी स्थान पर एक बार रा...
जिनके देह नेह रस भीने
जो बड़भागी जन प्रभु के प्रेम-रस में भीग जाते हैं, उनके नेत्र प्रेम के नशे में मतवाले हो जाते हैं। उस प्रेम रस के प्रभाव से वे सांसारिक संबंधों से अनभि...
ब्रह्मादिक वंदन करत और न कोऊ समतूल
वह श्री वृन्दावन धाम, जिसका वंदन ब्रह्मा आदि देवता भी करते हैं और जिसकी समानता किसी अन्य स्थान से नहीं की जा सकती—वहीं साक्षात प्रभु श्री कृष्ण, श्री ...
हिंडोरे झूलत री सुरंग चूनरी पहिरें
सुंदर रंगों वाली चुनरी धारण किए श्री प्रिया जी मनोहर हिंडोले में झूल रही हैं। उनके प्रियतम लाल बिहारी बड़े अनुराग और उत्साह से उन्हें झुला रहे हैं और ...