मैं कब से खड़ी होकर विनती कर रही हूँ, लेकिन हे नंदकिशोर, अब तो कृपा कर उसे सुन लो! श्रीकृष्णप्रिया जी कहती हैं कि उनके प्राण, जीवन-धन, करुणानिधि, चितच...