श्री कृष्णदास
जीवन चरित
श्री श्री कृष्णदास वाणी संग्रह
लालन तेरे ही आए आजु सुहावनी राति
श्री कृष्णदास श्रीकृष्ण से कहते हैं: हे लालन! आज तुम्हारी सुहागरात है। श्री राधिका आज अति प्रसन्न होकर आपकी प्रतीक्षा एवं गुणगान कर रही हैं, निकुंज म...
हिंडोरे माई झूलत लाल विहारी
प्राणों से भी प्यारी वृषभानुनन्दिनी के साथ श्रीकृष्ण झूला झूल रहे हैं। [1] हवा के वेग से फहराता हुआ श्रीराधा का नीलाम्बर और श्रीकृष्ण का पीताम्बर ऐसा...
मेरे तो गिरिधर ही गुणगान
मेरा संबंध एकमात्र श्री गिरिधर के गुणगान करने से ही है। गिरिधर की ही मूर्ति नैनों में बसी है, और हृदय में गिरिधर का ही ध्यान बसा हुआ है। [1] मेरा म...
हमारे तीरथ कौन करे
हम अब कौन सा तीर्थ भ्रमण करें क्यूँकि यहाँ ब्रज में घट में गंगा, घट में यमुना इत्यादि का निवास है, अब काशी भी क्यूँ भटकते हुए फिरें? [1] यहाँ ब्रज ...
मेरे जान तजहु, गिरिधरन जो तुमहि
हे मेरे प्राण प्यारे श्री गिरिधर लाल, तुम्हें छोड़ कर मैं अब किसके पास जाऊँ [आपकी शरण ग्रहण कर अब यह असम्भव है]। अब त्रिभुवन में तुम्हारे द्वार के बिन...
रसिकिनी राधा रस भीनी
श्री कृष्णदास कहते हैं "रसिकनी श्री राधा जू रस से ओत-प्रोत हैं, जिन्हें रसिक शेखर श्री लाल गिरधर ने अपने कंठ की मणि कर लिया है (अर्थात ह्रदय से लगा लि...
पोढ़े श्री राधा के गेह
नित्य दम्पति जुगल किशोर श्री राधिका जू के निभृत निकुञ्ज में शयन कर रहे हैं। शयन का स्थान ताजा और नविन है, और वैसी ही नविन शय्या है, और क्षण क्षण नविन ...
मो मन गिरधर छबि पै अटक्यो
"मेरा हृदय गिरधर श्री कृष्ण की सुन्दर छवि पर अटका हुआ है। उनकी ललित त्रिभंग मनमोहक चाल एवं उनका सुन्दर चिबुक मेरे ह्रदय में बस गए हैं। [1] जल से भरे ...
जो बन बसौं तो बसौ वृन्दावन
यदि किसी वन में बसो हो तो वृंदावन में बसो, यदि गाँव में बसो तो नंद गाँव। यदि नगर में बसना हो तो मधुपुरी (मथुरा) और यदि तट पर विश्राम करना हो तो यमुना...
ग्वालिन कृष्ण दरस सों अटकी
श्री कृष्णदास जी कहते हैं "ब्रज की गोपियाँ श्री कृष्ण दर्शन के लिए व्याकुल चित्त हैं, इसलिए बार-बार वे सब पनघट पर आती हैं और अपने सर पर यमुना जल से भर...
मन लाग्यो गिरधर गावै
श्री कृष्णदास कहते हैं "सखियों का मन गिरधर श्री कृष्ण की ओर आकर्षित है और वे गा रहीं हैं - ततथेई ततथेई तत तत ताथेई एवं श्री श्यामसुंदर भैरव राग में मु...
राधा प्यारी! तू रसरंग भरी
हे श्री राधा प्यारी जू, आज आप प्रेम रस के रंग से ओत प्रोत हैं। मैंने जाना है आपने निश्चित ही कोटि कोटि कामदेवों की फ़ौज के गर्व को भंग किया है। [1] ह...
छबि आछी बनबारी की
जिनके सिर पर मोर मुकुट विराजमान है, कानों में मकराकृत कुण्डल सुशोभित है और अलकें घुंघराली हैं, उन श्री कृष्ण की छबि बड़ी सुन्दर है। [1] श्री कृष्णदास ...
नाँचत मोहन संग राधिका
श्री राधिका सखी समूह को लिए मनमोहन श्री कृष्ण के संग नृत्य कर रही हैं। युगल जोरि श्री श्यामाश्याम प्रेम से भरकर एक-दूसरे को गलबाँही दिए हुए हैं। [1] ...
तेरे बदन की सोभा
हे प्रियतम! आपके मुखारविंद की अनुपम शोभा का वर्णन करने के लिए, मेरे नेत्रों को वाणी (जीभ) की शक्ति प्रदान कीजिये। मैं बस इतना ही वरदान माँगता हूँ कि म...
तेरी मैं अधिक चतुराई जानी
हे प्यारी जू [श्री राधे], तुम्हारी चतुराई मैंने भली प्रकार से जान ली है। अपनी बौंहों के धनुष से नयनों के बाण चलाकर अपने प्रियतम गिरिधर लाल को तुमने अप...
बलिहारी रास विहारिन की
श्री रासबिहारी-बिहारिणी जू की बलिहारी है। श्री कृष्ण मरकत मणि हैं एवं श्री राधा स्वर्ण-मणि माला हैं जो श्री कृष्ण की ग्रीवा में ग्रंथित हैं। [1] श्री...
तेरे नैंननि की बलि जाउँँ
हे श्री राधिका प्यारी! तुम्हारे नयनों पर बलिहारी जाता हूँ ! मोहन लाल श्री कृष्ण इन नैनों के रस से सदा भींजें रहते हैं एवं उनके ह्रदय को तुम्हारा नाम ह...
लाल गोपाल गुलाल हमारी
हे गोपाल लाल, मेरी आँखों में गुलाल न डालो, क्योंकि ये सदैव तुम्हारे वदन-चंद्र को चकोर पक्षी की भांति निहारती रहती हैं। [1] हे कृष्ण, राग बसंत में क...
तू तौ मेरे प्राननि हूँ तै प्यारी
श्री कृष्ण श्री राधा से कहते हैं कि हे राधे, तुम तो मुझे प्राणों से भी अधिक प्यारी हो। मैं तो तुम्हारी ही शरण में हूँ, अत: मेरी ओर थोड़ा सा निहार कर ह...
कमल मुख देखत कोन अघाय
श्री कृष्ण के कमल मुख के दर्शन करने से किसको तृप्ति हुई है ? अरे सखी, मेरी बात सुन, जब मेरे नेत्र उनकी रूप माधुरी के दर्शन में उलझ जाती है तो उन्हें ...
मेरौ मन गिरिधर-छबि पै अटक्यो
मेरा मन गिरिधर श्रीकृष्ण की अद्भुत छवि पर अटक गया है। उनकी ललित त्रिभंगी सुंदर छवि पर पहुँचकर मेरा मन ठहर गया है ! [1] उनका रंग गहरे वर्षा वाले काले ...
तेही छिनु बृषभनु-किसोरी
हे वृषभानु किशोरी श्री राधा! जिस क्षण आप नवल-वृंदावन की कुंज-वीथियों में गोवर्धनधारी श्रीकृष्ण से मिलती हैं, उसी क्षण उनका चित्त और बुद्धि पूर्ण रूप ...
गिरिधर जब अपनौं कर जानें
वह हरि और हरि भक्तों में भेद नहीं मानेगा, और भक्तों को ही अपनी वास्तविक गति एवं मति मानेगा। वह भाग्यशाली जीव मन क्रम वचनों से हरि और हरिजन को समान मान...
ज्यों ज्यों राखो त्यों त्यों रहूँ जु देहु सु खाउँ
हे मेरे प्यारे गिरिधर कृष्ण मुरारी ! आप जैसे जैसे मुझे रखो, वैसे वैसे ही मैं रहूँ, जो कुछ मुझे दो वही वही खाऊँ। तुम्हीं मेरे पति एवं गति हो, तुम्हारा ...
खेलत रास रसिक नंदलाल
“खेलत रास रसिक नंदलाल, जमुना पुलिन सरद निशि सोभित, रचि मंडल ठाढ़ी ब्रजबाल । ” - श्री कृष्णदास, श्री कृष्णदास अधिकारी जी की वाणी (626) श्री कृष्ण शरद ...
बाँसुरी बाजत मदन मोहन जू की
एक गोपी अपनी सखी से कहती है: हे सखी मैं क्या करूँ, श्री मदन मोहन जू की यमुना तट पर वंशी वादन का श्रवण कर मेरी सुध बुध ही खो जाती है। [1] श्री कृष्ण ...
वृंदावन की माधुरी नित नित नौतन रंग
श्री वृंदावन की माधुरी नित्य-नित्य ही नवीन रस को बरसाती है। श्री कृष्णदास जी कहते हैं कि रसिकों के संग के बिना इसे कोई भी प्राप्त नहीं कर सकता।
वृषभानु कुँवरि खेलति बसंत
वृषभानु की लाड़ली श्री राधा बसंत ऋतु में क्रीड़ा कर रही हैं, जहाँ उनके नवल प्रियतम श्यामसुन्दर भी विराजमान हैं। सखियाँ हर्ष से खिल उठी हैं। मृदंग, ताल...
ब्रज में रतन राधिका गोरी
गौर वर्ण कांति है जिनकी, ऐसी श्री राधिका जी ही ब्रज की चूड़ामणि हैं, जिन्होंने वृषभानु महल में नंदनंदन श्री कृष्ण के हृदय का हरण कर लिया है। [1] श्री ...
जबते राधिका भूतल प्रगटी
जब से श्री राधिका जी इस धरती पर प्रकट हुईं, तब से सृष्टिकर्ता ब्रह्मा का मान भंग हुआ है। ब्रह्मा जी विचार कर रहे हैं "यह अब मेरी रचना नहीं है - कुछ अस...