सन्तग्रन्थरागश्लोकस्तोत्रकविता
मुख्यपृष्ठसंतश्री ललित किशोरी देव
सभी संत

जीवन चरित

ब्रज परंपरा के वैष्णव संत।

श्री श्री ललित किशोरी देव वाणी संग्रह

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राधे रसिक सिरोमनि रानी

श्री राधे रसिकों की सिरमौर रानी हैं। श्री राधा अदभुत प्रकार के रूप और रस का सागर हैं जो नित्य ही जनों को महा प्रेम सुख प्रदान करने वाली हैं। [1] इस न...

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श्री हरिदास शरण जे आये

जो भी श्री हरिदास जी (श्री ललिता सखी अवतार) की शरण में जाता है उसे श्री कुञ्ज बिहारी श्री बांकेबिहारी बिहारिनी जी अपना जान कर अपने निकट बैठा लेते हैं।...

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महल हमारे गुदी परयौ है

श्री वृंदावन निकुंज महल मेरे मन के पीछे पड़ गया है, यदि किसी कारण वश मैं भूलना भी चाहूँ तो यह निज महल मेरे तन, मन एवं वचनों के आगे सदा काल ही विराजमा...

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लाडिली अलबेली हमारी

हमारी श्री लाडिली [राधा] अलबेली सरकार हैं। वह मंद मंद मुस्कुरा कर कृपा दृष्टि से निहारकर हमें निहाल कर देती हैं। [1] श्री लाल जी [श्री कृष्ण] के उर क...

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तो सी तुही हरिदास दुलारी

हे प्रानजीवनघन, श्री हरिदासी जी की प्राण प्यारी श्री राधा जू ! आपके समान एकमात्र आप ही हैं ! स्वयं श्री कुंजबिहारी लाल जू आपके प्रेसरस में सतत विवश ह...

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ललित किशोरी लालजू

हे श्यामा-श्याम! मेरी यही विनती है कि चाहे मैं कूकर, शूकर अथवा किसी भी योनि में जन्म लूँ, परंतु मेरा नित्य वास श्री वृन्दावन धाम में ही हो।

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लता पता द्रुमबेलि हौं

हे युगल सरकार! मुझे किसी भी प्रकार यमुना के किनारे वृंदावन में ही बसाइए—चाहे लता, पत्ता, द्रुम, बेल, घास, रज-कण, फल या फूल किसी भी रूप में; परंतु मुझे...

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श्री निधिबन रस की खांनी हैं

श्री निधिवन रस की एक ऐसी अद्भुत खान है, जिसकी महिमा और शोभा परम अपार है। वहाँ नित्य-विहार जनित काम-क्रीड़ाओं (प्रेम-लीलाओं) की वर्षा निरंतर होती रहती ...

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श्रीवृंदाविपुन विहार निजु, श्रीस्वामी कौ रूप

श्री वृन्दावन का नित्य-विहार ही श्री स्वामी हरिदासजी महाराज का अपना निज-स्वरूप है, क्योंकि इनके हृदय में श्री गौर-श्याम स्वरूप युगल नित्य अनुपम केलि क...

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हमारौ मेल मिलाप है तो सों प्यारी

हमारा मेल मिलाप [प्रेम का सम्बंध] केवल अति उदार चूड़ामणि श्री कुंजबिहारिनी प्यारी ज़ू [राधा रानी] से ही है और श्री प्यारी ज़ू के गर्व में ही हम नित्य ...

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प्रिया जू की चितवनि प्रेम की सुधारी है

श्री प्रिया जू (श्री राधा) की चितवन सहज में ही प्रेम प्रदान करने वाली है। एक नयन कटाक्ष ही चित्त को हर लेता है, प्राणों में आनंद का संचार करता है एवं ...

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मेरे प्रान जीवन धन राधे

मेरी प्राण जीवन धन कुंजबिहारिणी श्री राधे हैं जो महाप्रेम रस की राशि हैं एवं अद्भुत अगाध रूप माधुरी का वर्षण करने वाली, रसिकों की चूड़ामणि अनन्य आराध्...

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एक राधा ब्रज में बसै, एक राधा रास विलास

एक राधा ब्रज में ब्रजेश्वरी स्वरूप से निवास करती हैं, एक राधा रास-लीला में रासेश्वरी स्वरूप से विलास करती हैं, और तीसरी राधा नित्य निकुंज-विहारिणी स्व...

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हमारो महल सदा सुखदाई

हमारा निजमहल (श्री राधा का निकुंज महल) नित्य ही सुख बरसाने वाला है। युगल के रंग को सदा काल यह महल ऐसा बड़ा रहा है कि इनकी प्रीती नित्य नित्य बढ़ती ही जा...

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हमारे महल कौ नातौ साँचौ

श्री ललित किशोरी देव कह रहे हैं "हे भाई, श्री वृंदावन नवनिकुंज महल का अनन्य नाता ही हमारा सच्चा नाता है। [1] क्योंकि महल के नाते बल पर ही हम सदा काल स...

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हमारी रसिक सिरोमनि प्यारी

प्रस्तुत पद मेन श्री राधारानी के विलाक्षण स्वभाव का वर्णन किया है। श्री ललित किशोरी कहते हैं की हमारी रसिकों की शिरोमणी प्यारी तन मन से अति ही हितकारी...

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मेरी जीवनमूरि है

मेरे जीवन की मूल संपदा वृन्दावन की रज है, जिसकी करुणा से मुझे इन नयनों से श्री राधा-कृष्ण के दर्शन संभव हुए हैं।

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आजु सखि आये मेह सुहाये

अरी सखी ! आज इधर आकाश में सुन्दर श्याम-घन को उमड़ता देखकर उधर निकुंज-मन्दिर में प्रिया जी आनन्दमयी गौर-घटा बनकर उमड़ पड़ी हैं और प्रियतम पर प्रेम-रस क...

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भजि लै कुंज बिहारिनि बाल

श्री कुंजबिहारिनी [श्री राधा] का भजन करो जिनका स्वरूप अति ​​अद्भुत है, जो प्रेम रस में सराबोर हैं एवं जिनके विशाल नेत्रों की चितवनी अति बाँकी (तिरछी) ...

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श्री वृन्दाविपिन के वास की, यही रीति सो जानि

श्रीवृंदावन में वास करने की यही रीति है कि किसी पर दोषारोपण किए बिना, निष्काम भाव से (नित्य श्रीश्यामा-श्याम के चिंतन युक्त), रस की खान श्रीवृंदावन-धा...

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लाख बार हरि हरि कहो एक बार हरिदास

यदि कोई लाख बार "श्रीहरि-हरि" कहता है, परंतु एक बार ललिता-अवतार स्वामी हरिदासजी के "हरिदास" नाम का उच्चारण करता है, तो श्रीराधा महारानी इतनी प्रसन्न ...

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सोई रसिक प्रवीन

जगत में वही चतुर-चूड़ामणि, अति प्रवीण तथा उच्च कोटि के रसिक हैं, जो दृढ़ अनन्य-भाव से एकमात्र सर्वोपरि नित्य-विहार-रस का ही सेवन करते हैं और साक्षात् ...

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साधो भाई ऐसौ महल हमारौ

हे साधु भाई, हमारी श्री राधा का निज महल ऐसा अद्भुत है जिसपर समस्त सगुण उपासना एवं निर्गुण उपासना को वारा जा सकता है, जिसे वेद भी कहने में असमर्थ हैं। ...

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गुरु सोइ जो विपिन बसावे

रसिक गुरु वह है जो अपने शिष्य के लिए अपना सारा प्रयास करता है और उसे वृंदावन में निवास कराता है और श्यामाश्याम की प्राप्ति कराता है। ऐसा किए बिना, उन्...

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प्रसाद बिहारिनि रानी को

प्रसाद बिहारिनि रानी को, अति आनंद बड़े छिन ही छिन महाप्रेम सुखदानी को। - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धान्त के पद (६३) ...

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हमारी लड़ैती साहिबिनी

श्री ललित किशोरी जी कहते हैं कि हमारी श्री राधा रानी ऐसी स्वामिनी हैं जिनके आधीन नित्य ही श्याम सुन्दर रहते हैं। श्री प्रिया जी के रोम रोम में आनंद ही...

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धन्य धन्य लड़ैती मेरी है

धन्य धन्य लड़ैती मेरी है। अपनी जानि बिहारिनि रानी कृपा दृष्टि करि हेरी है। छिन छिन प्रीति करत अलबेली सदाई रहत सु नेरी है। श्री हरिदासी रसिक सिरोमनि...

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लडैती जू सुनिये बात हमारी

अपनी प्राणप्यारी श्री लाड़िलीजू से प्रार्थना करते हुए श्री ललित किशोरी देव कह रहे हैं "हे जीवनधन, जैसी सुख राशि निज केली आपने मुझको अपना समझ अति अद्भुत...

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परसाद विहारिनि रानी कौ

नित्य विहारीणी श्री राधे जू का नित्य विहार रूपी दिव्य प्रसाद छिन छिन आनंद पूर्वक है, एवं महाप्रेम सुख का दान करने वाला है। [1] इस प्रसाद की शोभा अद्भु...

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सखी मेरो वृन्दावन सुख धाम

हे सखी, मेरा वृन्दावन सुख धाम है। यहाँ रसिक जन नित्य ही प्रियालाल को लाड़ लड़ाते हैं और यह धाम समस्त इच्छाओं को पूर्ण करने वाला है। वृन्दावन धाम महाप्रे...

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साधौ ऐसौ महल हमारौ

श्री राधा का निज महल ऐसा अद्भुत है जिसपर सगुण, निर्गुण एवं समस्त भगवान के अवतारों एवं रसों को वारा जा सकता है, जिसे वेद भी पार नहीं पा सकते।

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जय जय श्री वृन्दावन चन्द

वृंदावन धाम की जय जय हो जहां नित्य ही महा प्रेम सुख राशि स्वरूप छबीले आनंद कंद श्री राधा कृष्ण विहार करते हैं। जो ऐसे सुख स्वरूप श्री वृंदावन धाम में ...

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लडैती तेरी रीति महा सुखदाई

श्री ललित किशोरी जी कहते हैं कि हे प्रिया जू आपकी रीति अनंत सुख प्रदान करने वाली है। जब से मैंने अपने हृदय में दृढ़ करके इसे अपनाया है मेरे हृदय में अन...

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प्रिया कहा करें मन बस नाँही

हे प्राणप्यारी श्री लाड़िली जू, अब मैं क्या करूं, किसी भी प्रकार से मेरा मन बस में नहीं आता है। [1] मन-वचन-कर्म समस्त प्रकार से मैंने प्रयास करके देख ल...

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नाम महाधन है आपनो

हमारा परम धन श्रीराधा-नाम है; इसके अतिरिक्त हमें न कोई संपत्ति चाहिए, न ही धन-संपदा की कामना है। [1] हमने जग की ऊँची अटारियों और ऐश्वर्य को छोड़ दिया...

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श्री वृन्दाविपिन के वास की, यही रीति सो जानि

श्री वृन्दावन के वास करने की यही रीति है कि किसी पर बिना दोष किये निष्काम भाव से (नित्य श्यामा-श्याम का चिंतन युक्त) रस की खानी श्री वृन्दावन धाम का स...

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हमारो महल सदा सुखदाई

हमारा निजमहल (श्री राधा का निकुंज महल) नित्य ही सुख बरसाने वाला है। युगल के रंग को सदा काल यह महल ऐसा बड़ा रहा है कि इनकी प्रीती नित्य नित्य बढ़ती ही जा...

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प्रिया बिन सुद्ध प्रेम नहीं पावै

इस पृथ्वी मंडल या बैकुंठ धाम या फिर कहीं किसी भी लोक चले जाओ परंतु यह निर्विवाद सत्य है कि सर्वोपरि श्री वृंदावन की अनन्य विलासिनी श्री नित्य बिहारिनि...

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लड़ैती तेरे चरण महा सुखदाई

श्री कुञ्ज विहारिणी श्री राधा, आपके चरण परम प्रेम सुख को देने वाले हैं, इन्ही चरणों को देखकर, सेवन करके श्री लाल जू केलि कला में निपुण हुए हैं। कभी तो...

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हमारी नित्य लडैती प्यारी

हमारी नित्य किशोरी श्री राधा ऐसी स्वामिनी अलबेली सरकार हैं जो प्रत्येक क्षण नव प्रीति रस हमें प्रदान करती हैं। इनके जैसा हितकारी कौन होगा? (यह अलबेली ...

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हमारी लड़ैती साहिबिनी

श्री ललित किशोरी जी कहते हैं कि हमारी श्री राधा रानी ऐसी स्वामिनी हैं जिनके आधीन नित्य ही श्याम सुन्दर रहते हैं। श्री प्रिया जी के रोम रोम में आनंद ही...

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हमारे महल कौ नातौ साँचौ

श्री ललित किशोरी देव कह रहे हैं "हे भाई, श्री वृंदावन नवनिकुंज महल का अनन्य नाता ही हमारा सच्चा नाता है। [1] क्योंकि महल के नाते बल पर ही हम सदा काल स...

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हम हमरी है लाडली

हमारी प्रान श्रीलाड़िली राधा ही है, इसीलिए हम चित् लगाकर सदाकाल इनके ही केवल गुन गुनाते हैं एवं श्रवण करते हैं (बातें कहते सुनते हैं) । इन्हीं की कुंज...

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बूडत ही विषधार में

हमारी कुंजबिहारीनी श्री राधा रानी से ऐसी अद्भुत प्रेम एवं यारी है कि मैं विषय रूपी महाविष की नदी में डूब रहा हूं, परंतु उन्होंने स्वयं अपने हाथ पसार क...

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बिछुरन मिलन जहाँ रहै, सुद्ध प्रेम नहिं होइ

जहाँ बिछुड़ना और मिलना लगा रहता है, वहां शुद्ध प्रेम नहीं होता। निरंतर मिले रहते हुए भी और अधिक मिलने की चाह ही शुद्ध प्रेम है। नित्य विहार रुपी रस में...

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राधे रसिक सिरोमनि प्यारी है

श्री राधा रसिक शिरोमणि प्यारी हैं। [1] श्री राधा आनंद में अति उन्मत्त रहती हैं, सुख की राशी हैं एवं एक क्षण के लिए भी हमसे विलग नहीं होती। [2] उनका मह...

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सोई रहै महा आनंद में एक लाडिली जाहि राखै

वही जन ही केवल महा आनंद [रस में सराबोर] में रहता है जिसे प्राणप्यारी श्री राधारानी रखती हैं और कोई नहीं रह सकता। श्री राधा रानी की कृपा के बिना आप को...

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मेरी गति तुही है लडैती प्रानप्यारीजू

हे मेरी राधा रानी केवल आप ही मेरी गति हैं। [1] आप अत्यंत मुझसे पसंद है एवं आप ही हैं जो मेरा हित जानती हैं, आप समस्त गुणों की खान हैं एवं परम उदार हैं...

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तुव कृपा ते लाडिली तेरो सुख लहियै

ललित किशोरी देव श्री स्वामिनी जू से कह रहे हैं “हे मेरी प्राणजीवन श्री लाड़िली जू ! आपकी कृपा से ही आपका महासुख मुझे प्राप्त हो सका है। [1] आप ही एकमात...

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जय श्री हरिदासी राधे जू

समस्त सुखों की राशि, अद्भुत अगाध रूपमयी, महाप्रेम में नित्य विहार करने वाली, हरिदास दुलारी श्री राधा जू की जय हो। [1 & 2] आप परम कृपालु एवं उदार हैं औ...

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दूल्ह नित्य विहार है, और औतार बारात

जैसे विवाह में एक मात्र दुल्हा दुल्हन का ही मान सम्मान और गौरव होता है और उन्हें ही सब निहारते हैं, ऐसे ही रसिकों द्वारा रसोपासना पद्धति में निज महल क...

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निश्चय तन मन प्रेम सों, सुमिरि बिहारिनि बाल

मैं तुमसे स्पष्ट कहता हूँ कि तुम तन मन प्राण से सर्वोपरि नित्यबिहारिनी जू के सुमिरन का लाभ आज ही ले लो, कल का दिन किसने देखा है |

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सरन गहौ श्री हरिदास की

श्री हरि की माया उन लोगों को छू भी नहीं सकती जो श्री हरिदास (ललिता अवतार) के चरण कमलों की शरण ग्रहण कर लेते हैं, ऐसा इसलिए है क्योंकि श्री कुंजबिहारिन...

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प्रसाद बिहारिनि रानी को

प्रसाद बिहारिनि रानी श्री राधारानी का अत्यंत आनंद एवं रस को हर क्षण बढ़ाने वाला है, एवं महाप्रेम सुखदेने वाला है। मेरे जीवन का प्राण श्री राधारानी का प...

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महा सुख प्रिया नाम आधार

श्री प्रिया जू (राधा) का नाम महा सुख प्रदान करने वाला है, वही हमारे जीवन का आधार है। [1] श्री राधा का नाम अति आनंद देने वाला है, श्री राधा रूप को प्रक...