श्री मीराबाई
जीवन चरित
श्री श्री मीराबाई वाणी संग्रह
दिन नहिं भूख, रैन नहीं निद्रा
विरह की व्याकुलता में अब न तो दिन में भूख लगती है और न ही रात्रि में निद्रा आती है; यह शरीर विरह की अग्नि में पल-पल क्षीण होता जा रहा है। मीराबाई अपने...
मैं गोबिंद गुण गाणा
मैं गोविंद के गुण गाऊँगीं। यदि राजा रूठे तो रूठता रहे, अपना साम्राज्य वो अपने पास रखे। परंतु यदि हरि रूठ गये तो मैं कहाँ जाऊँगी ? [1] जब राणा ने मुझे...
मैं तो सांवरे के रंग रांची
मीराबाई जी कहती हैं कि मैं तो साँवले स्वरूप वाले श्री कृष्ण के श्याम रंग में रँग गयी हूँ। अब मैंने लोक-लाज की मर्यादाओं का त्याग कर दिया है, और श्री क...
या मोहनके मैं रूप लुभानी
मैं मोहन (कृष्ण) के सुंदर रूप से मोहित हो चुकी हूँ, जिनका सुंदर मुख है, कमल जैसे नेत्र हैं, जिनकी चितवनी बाँकी है एवं जिनकी मधुर मुस्कान है। [1] यमुन...
श्रीराधे रानी दे डारो बंशी मोरी
हे राधे रानी! मेरी बाँसुरी मुझे दे दो। जिस बाँसुरी में मेरी जान है वही बाँसुरी चोरी हो गई है। [1] अब मैं किससे गाऊँ, किससे बजाऊँ और गायों को कैसे वा...
जो मैं ऐसा जानती प्रीत करे दुःख होए
यदि मुझे पहले से ज्ञात होता कि प्रेम करने से दुःख मिलता है, तो मैं नगर-नगर ढिंढोरा पीटकर कहती कि कोई भी प्रेम न करे।
हमरो प्रणाम बांके बिहारी को
(यह पद श्री मीराबाई जी ने तब लिखा था जब उन्होंने श्री बांके बिहारी जी के वृंदावन में दर्शन किए थे।) इस पद् में श्री मीराबाई जी ने श्री बांके बिहारी जी...
या ब्रज में कछु देख्यौ री टोना
मैंने ब्रज में एक टोना होते हुए देखा। एक ब्रज की युवती अपने सिर पर दही बेच रही है। रास्ते में उसे नंदलाल श्री कृष्ण मिले। [1] वह दही का नाम भूल गई और...
Shri Radhe Rani De Daro Banshi Mori
Shri Radhe Rani De Daro Banshi Mori.Ja Bansi Mein Meri Pran Basat Hai, So Bansi Gayi Chori. [1]Kahe Se Gaun Pyari Kahe Se Bajau, Kahe Se Laun Gaiyan P...