सभी संत
न
रसिक संत जीवनी
श्री नेह नागरीदास
जीवन चरित
ब्रज परंपरा के वैष्णव संत।
श्री श्री नेह नागरीदास वाणी संग्रह
general
जब लग सहज न बदलई, फुरै न जहाँ-तहाँ भाव
जब तक स्वभाव नहीं बदलता एवं ह्रदय में भाव स्थिर नहीं हो जाता तब तक प्रेम पंथ का पाना कठिन है। बनावट करने से कोई कार्य सिद्ध नहीं होता।
general
मूरत नैंनन में रमै
प्रियतम का स्वरूप नेत्रों में सदा बसा रहता है, और हृदय उसके गुणों से भरा रहता है। ऐसे प्रेमी की अवस्था को बाहरी दृष्टि से कोई समझ नहीं जा सकता, प्रेम ...
shloka
भजन भजन सव कोऊ कहै
कहने को तो सभी मुख से भजन और भक्ति की बातें करते हैं, लेकिन वास्तव में भक्ति मार्ग पर चलना बहुत कठिन होता है। जब इन्द्रियाँ, शरीर और सांसारिक गुण पूरी...