सन्तग्रन्थरागश्लोकस्तोत्रकविता
मुख्यपृष्ठसंतश्री संकेत अलि
सभी संत

जीवन चरित

ब्रज परंपरा के वैष्णव संत।

श्री श्री संकेत अलि वाणी संग्रह

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भटकत फिरत नाहक चित चलु

हे मन, अनादि काल की भटकन छोड़ कर तु ब्रज धाम में वृंदावन, मधुपुरी, महावन, बरसाने, नंदग्राम आदि चल जहां सकल आनंद बरसता है। [1] राधाकुंड, गोवर्धन, यमुन...

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सुनी श्रुति तुमही अशरण शरण

हे श्री राधे, शास्त्रों के अनुसार, केवल आप ही आश्रयहीनों की एक मात्र आश्रय हैं। हे मनोहर सर्वसमर्थ स्वामिनी श्री राधिके! कृपया मेरी विनती को सुनिए। [1...

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देखिके चरण चालि लाजत मराल गज

श्री राधा-कृष्ण के चरणों की गति को देखकर राजहंस और गज भी लज्जित हो रहे हैं। उनके चरण नख के प्रकाश के समक्ष चंद्रमा भी फीका पड़ जाता है। [1] उनके लाल...

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प्यारी छवि देषौ नयन भरि आली

हे सखी, ऑंखें भरकर श्री प्यारी जू की अनुपम छवि को देखो। सुन्दर कुञ्ज में वनमाली श्री कृष्ण वृषभानु सुता श्री राधा के संग सुशोभित हैं। [1] कभी तो श्री...

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लड़ैती मैं सब भाँति तिहारो

हे राधे! मैं हर प्रकार से केवल आपकी ही हूँ। जैसे मछली जल के बिना जीवित नहीं रह सकती, वैसे ही मेरे मन के लिए आपकी छविनिधि ही जीवनदायिनी है। [1] मेरे च...

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मम विनय करुणा धाम श्यामा श्याम

हे करुणा के धाम श्री श्यामा-श्याम! मेरी यह विनती सुनिए — मुझे नित्य श्रीवृंदावन का वास एवं अनन्य रसिकों का संग प्रदान कीजिए। [1] श्री संकेत अली जी ...

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बंशीअलि हरिदास जी, हित हरिबंश समेत

मैं श्री वंशी अलि जी समेत स्वामी श्री हरिदासजी और श्री हित हरिवंशजी के चरणों में विनम्रतापूर्वक प्रणाम कर, उनके चरणों की पावन रज को अपने मस्तक पर धारण...

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गति गरवीली देखि के मानत मन में लाज

श्री राधारानी की अति मनोहर, अति गर्वीली चाल को देखकर गजराज (हाथियों का राजा) भी अपने भीतर लज्जित हो उठता है। इतना विनीत हो जाता है कि वह झुककर श्री रा...

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चलु मन श्री वृन्दावन ओर

हे मन! उस परम दिव्य वृन्दावनधाम की ओर चलो जो अद्वितीय है, और समस्त दिव्य कामनाओं को पूर्ण करने वाला है। वहाँ युगल किशोर श्रीराधा-कृष्ण सदा नित्य विहार...

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काहू की मानत न प्रिय लालन चित्त उदास

जब किशोरीजी मान करके बैठीं और किसी के भी मनाने पर नहीं मानीं, तब श्री कृष्ण का मन उदास हो गया। यह सोचते हुए कि — अब मान कैसे समाप्त होगा, अंत में श्री...

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चलु मन श्री वृन्दावन ओर

हे मन! व्यर्थ भटकने का क्या लाभ? चलो — ब्रजभूमि की ओर, जो संपूर्ण शांति और आनंद का धाम है। वृंदावन, मथुरा, महावन, बरसाना और नंदगाँव — ये सब परमपावन स्...