एक रसिक सखी कहती है कि हमारी स्वामिनी श्री वृषभानुनंदिनी रसिक जनों की जीवन – स्वरूपा हैं । जिनके चरणों की धूल को साक्षात् ब्रह्म श्रीकृष्ण भी चाहते है...