सन्तग्रन्थरागश्लोकस्तोत्रकविता
मुख्यपृष्ठसंतश्री विठ्ठल विपुल देव
सभी संत

जीवन चरित

ब्रज परंपरा के वैष्णव संत।

श्री श्री विठ्ठल विपुल देव वाणी संग्रह

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लालनु तेरेई आधीन

हे श्री राधा, श्री कृष्ण हर क्षण आपके आधीन रहते हैं।श्री विट्ठल विपुल देव जी कहते हैं, “सखी मैं सत्य कहती हूँ, तुम जल के समान हो और श्री कृष्ण मछली क...

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रस बस होत लाल प्यारी तेरी बदन झलक

हे श्री राधिका प्यारी, श्याम सुन्दर आपके रस के नित्य ही वशीभूत रहते हैं, आपके दिव्य स्वरुप की हर क्षण, एक झलक पाने के लिए लालायित रहते हैं। आपके सहज स...

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प्यारी नैंकु निरखौ नवरंग लालैं

सखी बोली कि हे श्रीस्वामिनी ! इन नवरंगी लाल की ओर नैंक निरखो तो सही ! आपकी पदतली से दलित रज का निज मस्तक पर चरनाकृत कृति तिलक धारण करते हैं। [1] आप...

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आज बनी लाड़िली प्रीतम संग आवति

इस पद में प्रातःकाल की शोभा का वर्णन किया गया है। अद्भुत सौन्दर्य छटा से सुशोभित लाड़िलीजू अपने प्रियतम के संग अभिगमन कर रही हैं। [1] दिव्य सुगंध से ...

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सुनहु रसिक श्री वृन्दावन को जस

"सुनहु रसिक श्री वृन्दावन को जस, इहि वन नित्य नवीन युगल वर, द्रुम दल दिव्य श्रवत सलिता लस" - श्री विट्ठल विपुल देव जी, श्री विट्ठल विपुल देव जी की वाण...

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प्यारी तेरे नैननि पर तृण टूटत

प्यारी जु के नेत्र मानो अत्यंत ही मनोहर हैं, जब भी बिहारिनि श्री राधा अपने नेत्रों से अवलोकन करती हैं तो मानो उसी क्षण प्रियतम बिहारी श्री कृष्ण का स...

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नव वन नव निकुंज नव बाला

वृन्दावन में कभी नया वन, कभी नया निकुंज, कभी नई श्री राधा और अन्य सखियाँ, कभी नए रसिक कुंज बिहारी और कभी नित्य नया रस एवं लीला है !

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जाके अधीन सदा ही सांवरो

श्री कृष्ण, ब्रज के चूड़ामनी हमेशा श्री राधा के नियंत्रण (आधीन ) में रहते हैं।

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प्यारी तेरे नैना री अति बांके, ललित त्रिभंगी बिहारी नागर

प्यारी तेरे नैना री अति बांके, ललित त्रिभंगी बिहारी नागर, तैं अपने करि आंके - श्री विठ्ठल विपुल देव जी, श्री विठ्ठल विपुल देव जू की वाणी (25) श्री र...

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सुनहु रसिक श्रीवृन्दावन को जस

हे रसिक भक्तों ! श्री वृन्दावन धाम की महिमा एवं यश सुनें जहां श्री वृंदावन की कुंज केलियों में श्री कृष्ण मानिनी श्री राधा के वशीभूत होकर अंतरंग क्रीड़...

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करूणानिधि मम स्वामिनी

हे करुणानिधि स्वामिनी राधा प्यारी! अब कृपा कर आप ही मेरा हाथ पकड़ लीजिए और करुणा करके मुझे अपने साथ रख लीजिए।

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तें मोह्यौ प्यारी मेरौ लाल

श्री विठ्ठल विपुल देव जी अपने सहचरी स्वरुप में स्थित श्री प्रियाजी से कहती हैं कि "हे प्यारी ! आपने हमारे लाल को मोहित कर रखा है।" [1] जिन प्रेममयी व...

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प्यारी तेरे नैना री अति बांके, ललित त्रिभंगी बिहारी नागर

श्री राधिका, आपकी आंखें वास्तव में तिरछी हैं जो अमृत से भरी हैं। श्री ललित त्रिभंगी  (जो तीन स्थानों नेत्र ,गर्दन और कमर पर मुड़ी हुई है और झुकी हुई ह...

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रस बस होत लाल प्यारी तेरी बदन झलक

हे श्री राधिका प्यारी, श्याम सुन्दर आपके रस के नित्य ही वशीभूत रहते हैं, आपके दिव्य स्वरुप की हर क्षण, एक झलक पाने के लिए लालायित रहते हैं। आपके सहज स...

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नव वन नव निकुंज नव बाला

वृन्दावन में कभी नया वन, कभी नया निकुंज, कभी नई श्री राधा और अन्य सखियाँ, कभी नए रसिक कुंज बिहारी और कभी नित्य नया रस एवं लीला है  !

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करूणानिधि मम स्वामिनी

हे करुणानिधि स्वामिनी राधा प्यारी अब कृपा कर आप ही मेरा हाथ पकड़ लीजिए एवं करुणा कर मुझे अपने साथ रखिए।

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प्यारी तेरे नैननि पर तृण टूटत

प्यारी जु के नेत्र मानो अत्यंत ही मनोहर हैं, जब भी बिहारिनि श्री राधा अपने नेत्रों से अवलोकन करती हैं तो मानो उसी क्षण प्रियतम बिहारी श्री कृष्ण का सब...

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लालन तेरे ही आधीन, सुन री सखी हौं साँच कहति हौं

हे श्री राधा, श्री कृष्ण हर क्षण आपके आधीन रहते हैं | श्री विट्ठल विपुल देव जी कहते हैं, "सखी मैं सत्य कहती हूँ, तुम जल के समान हो और श्री कृष्ण मछली ...

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सुनहु रसिक श्रीवृन्दावन को जस

हे रसिक भक्तों ! श्री वृन्दावन धाम की महिमा एवं यश सुनें जहां श्री वृंदावन की कुंज केलियों में श्री कृष्ण मानिनी श्री राधा के वशीभूत होकर अंतरंग क्रीड़...

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जाके अधीन सदा ही सांवरो

श्री कृष्ण, ब्रज के चूड़ामनी हमेशा श्री राधा के नियंत्रण (आधीन ) में रहते हैं।