सन्तग्रन्थरागश्लोकस्तोत्रकविता
मुख्यपृष्ठसंतश्रीमद भागवतम
सभी संत

जीवन चरित

ब्रज परंपरा के वैष्णव संत।

श्री श्रीमद भागवतम वाणी संग्रह

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धन्या व्रजस्त्रिय उरुक्रमचित्तयानाः

वे ब्रज-स्त्रियाँ धन्य हैं, जो नित्य श्रीकृष्ण के प्रेम में लीन रहती हैं, नित्य उन्ही का गान करती हैं, आँसु बहाती हैं, अनेक गतिविधियां करते हुए भी जै...

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भगवान में मन का लगाव ना हो तो

शब्दब्रह्मणि निष्णातो न निष्णायात् परे यदि। श्रमस्तस्य श्रमफलो ह्यधेनुमिव रक्षत:॥ - श्रीमद भागवतम (11.11.18) यदि कोई वेदों का सारा ज्ञान याद भी कर...

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जिस जगह भक्त या भगवान की निंदा होती है

निन्दां भगवत: श‍ृण्वंस्तत्परस्य जनस्य वा। ततो नापैति य: सोऽपि यात्यध: सुकृताच्च्युत:॥ - श्रीमद भागवतम (10.74.40) जिस जगह भक्त या भगवान की निंदा होती...

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यो मां सर्वेषु भूतेषु सन्तमात्मानम ईश्वरम

जो मन्दिरों में भगवान के विग्रह का पूजन करता है, किन्तु यह नहीं जानता कि परमात्मा रूप में ईश्वर प्रत्येक जीव के हृदय में आसीन हैं, वह अज्ञानी हैं और उ...