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Biography & History

Vaishnava saint of the Braj tradition.

devi bhagavata Collected Verses

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कृष्णप्राणाधिदेवी सा तदधीनो विभुर्यत

श्री राधा श्री कृष्ण के प्राणों की अधिष्ठात्री देवी हैं। इसलिए भगवान श्री कृष्ण सदा इनके अधीन रहते हैं। वे रासेश्वरी सदा इनके निकट ही निवास करती हैं। ...

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कृष्णार्चायां नाधिकारो यतो राधार्चनं विना

श्री कृष्ण की भक्ति का अधिकार श्री राधा की भक्ति के बिना निषेध है। इसलिए समस्त वैष्णवों का यह कर्तव्य है कि वे मन लगाकर श्री राधा की भक्ति करें।

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राध्नोति सकलान्कामास्त

भगवान नारायण श्री नारद मुनि से कहते हैं - वे सभी कामनाओं को पूर्ण करती हैं इसीलिए उन्हें राधा कहते हैं। यहाँ उल्लिखित आख्यानों के संबंध में मैं ही ऋषि...

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नमस्त्रैलोक्यजननि प्रसीद करुणार्णवे

भगवान नारायण कहते हैं - हे करुणा की सागर, श्री राधा! तुम त्रिलोक की जननी हो, मैं तुम्हें नमस्कार करता हूँ। तुम मुझपर प्रसन्न होने की कृपा करो। ब्रह्मा...

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मूलप्रकृतिरूपां त्वां भजाम

हे श्री राधा ! हे जननी! तुम मूलप्रकृति स्वरूपा एवं करुणा की अगाध सागर हो। हम तुम्हारी उपासना करते हैं, अत: तुम इस संसार-सागर से उद्धार करने की कृपा कर...

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नमस्ते परमेशानि रासमण्डलवासिनि

भगवान नारायण कहते हैं - हे परमेशानि! आप रासमण्डल में विराजमान रहती हो! आपको नमस्कार है! हे रासेश्वरी! भगवान श्रीकृष्ण को आप उनके प्राणों से भी अधिक प्...