श्री नागरीदास कह रहे हैं "श्री सतगुरु देव धन्य धन्य हैं, जिन्होंने नीरसता का मार्ग छुड़ा कर मुझे श्री वृन्दावन के उज्ज्वल रस मार्ग में आरूढ़ किया। [1] ब...