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Biography & History

Vaishnava saint of the Braj tradition.

jagadguru adyanimbarkacharya Collected Verses

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सच्चिन्तनीयमनुमृग्यमभीष्टदोहं

ब्रह्मादि देवों द्वारा अन्वेषण किये जाने वाले अथवा विविध साधना दारा अन्वेषण करने योग्य, अभिमत फल को देने वाले संसार के समस्त तापों के शमन अर्थात नाश क...

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प्रात: स्मरामि युग-केलिरसाभिषिक्तं

नित्यनिकुञ्जबिहारी युगलकिशोर श्री राधा कृष्ण के परम दिव्य लीलाविहार केलि रस से अभिषिक्त तथा कलिन्दतनया श्रीयमुना के गम्भीर धारा प्रवाह से सर्वदा समन्व...

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प्रातर्भजामि शयनोत्थितयुग्मरूपं

शयन से उठे हुए ऐसे श्रीराधा-माधव युगल स्वरूप का मैं प्रातःकाल भजन करता हूँ जिनकी पारस्परिक रस लीलाएँ एवं केलि विहार के चिह्न आदि सखियों के अवलोकन का ...

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नान्यागति: कृष्णपदारविन्दात

जिसकी शक्ति और आशय का किसी को पता ही नहीं लग सकता फिर भी वे भक्तों की इच्छा के लिए अनेक अवतार धारण करते है। जिनकी ब्रह्मा शंकर आदि समस्त देवता वंदना क...

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कृपास्य दैन्यादियुजि प्रजायते

अनन्याधिपति सर्वेश्वर भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य कृपा दैन्य ह्रदय (दीनता युक्त) प्रपन्न भक्तों पर ही होती है जिसके फल स्वरूप उनमें रसमयी भक्ति प्रकट हो...

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प्रातर्नमामि वृषभानुसुतापदाब्जं

भम्रर रूपी व्रजगोपियों के नेत्र समूह जिनकी स्तुति करते हैं और परम चतुर प्रेमाकुल नन्दनन्दन श्रीहरि जिनकी सदा वन्दना करते हैं, ऐसे श्रीवृषभानुसता श्री ...

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प्रातर्धरामि हृदयेन हृदीक्षणीयं

व्रजसुन्दरियों (की अनन्य प्रीतिके कारण उन) — के प्राप्यरूप तथा उनके द्वारा प्रभातवेला में जगाये जाते हुए, सभी प्रकार की वेष-रचनाओं से समन्वित हुए जो च...