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Biography & History

Vaishnava saint of the Braj tradition.

jagadguru aghanimbarkacharya Collected Verses

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नमस्ते श्रियै राधिकायै परायै

श्री राधिके! तुम्हीं श्रेय मार्ग की अधिष्ठात्री हो, तुम्हें नमस्कार है, तुम्हीं पराशक्ति राधिका हो, तुम्हें नमस्कार है। तुम मुकुन्द की प्रियतमा हो, तु...

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मुकुन्दानुरागेण रोमाञ्चिताङ्गै

श्री राधे ! तुम्हारे मन-प्राणों में आनन्दकन्द श्री कृष्ण का प्रगाढ अनुराग व्याप्त हैं। अतएव तुम्हारे श्री अंग सदा रोमाञ्च से विभूषित हैं और अंग-अंग सू...

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व्रजन्तीं स्ववृन्दावने नित्यकालं

जो प्रतिदिन नियत समय पर श्री श्यामसुन्दर के साथ उन्हें अपने अंक की माला अर्पित करके अपनी लीलाभूमि-वृंदावन में विहार करती हैं, भक्तजनों पर प्रयुक्त होन...

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यदङ्कावलोकं महालालसौघं

श्री राधिके ! यद्यपि श्यामसुन्दर श्रीकृष्ण स्वयं ही ऐसे हैं कि उनके चारू-चरणों का चिन्तन किया जाए, तथापि वे तुम्हारे चरण-चिह्नों के अवलोकन की बड़ी लाल...

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स्ववासोपहारं यशोदासुतं वा

जो अपने वस्त्र का अपहरण करने वाले अथवा अपने दूध-दही, माखन आदि चुराने वाले यशोदानन्दन श्रीकृष्ण की साधना करती हैं, जिन्होंने अपनी नीवी (प्रेम) के बन्धन...

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दुराराध्यामाराध्य कृष्णं वशे त्वं

श्री राधे ! जिनकी आराधना कठिन है, उन श्रीकृष्ण की भी आराधना करके अपने महान प्रेमसिन्धु की बाढ़ से उन्हें वश में कर लिया। श्रीकृष्ण की अराधना के कारण त...

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मुकुन्दस्त्वया प्रेमडोरेण बद्धः

तुम्हारी प्रेम डोर में बंधे हुए भगवान श्री कृष्ण पतंग की भाँति सदा तुम्हारे आस-पास ही चक्कर लगाते रहते हैं, हार्दिक प्रेम का अनुसरण करके तुम्हारे पास ...

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यदङ्कावलोकं महालालसौघं

श्री राधिके ! यद्यपि श्यामसुन्दर श्रीकृष्ण स्वयं ही ऐसे हैं कि उनके चारू-चरणों का चिन्तन किया जाए, तथापि वे तुम्हारे चरण-चिह्नों के अवलोकन की बड़ी लाल...