भगवान शंकर नारद जी से अनन्य भक्ति के विषय में कहते हैं - मनुष्य को सदैव केवल अपने उपास्य देव की ही अनन्य शरण लेनी चाहिए और किसी अन्य साधन को नहीं अपना...