(पद) और कामना मोहिं न कोई। मन वच क्रम करि रहों निरंतर तुव पद-पंकज मधुकर होई॥ [1] अहु बलि जाऊँ विहारिनि मेरी जीवनि निज जिय जानउ जोई। श्रीहरिप्रिया सहज ...