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Biography & History

Vaishnava saint of the Braj tradition.

prem ras madira Collected Verses

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बलि जाऊं लाली सुकुमार की

“बलि जाऊं लाली सुकुमार की, अभिरामिनि गज गामिनी भामिनी, स्वामिनी नंद कुमार की। " - प्रेम रस मदिरा, जगदगुरु श्री कृपालुजी महाराज मैं अत्यंत कृपालु श्री...

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हमारो माई, श्री बरसानो गाम

हमारो माई, श्री बरसानो गाम । महरानी राधा ठकुरानी, सरस सुखद अभिराम । गहवर – वन वृषभानुकुंड वर, प्रेमसरोवर ठाम । विधि हरि हर दुर्लभ रजधानी, श्री वृंद...

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श्यामा श्याम शरण गहु रे मन

अरे मन ! तू राधा-कृष्ण के चरण-कमलों की शरण में जा, तथा राधा-कृष्ण का स्वरूप अपने हृदय में रखकर उनके विविध नाम गुणादिकों को प्रेम-विभोर होकर गाता हुआ न...

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लखो रे मन, वृंदा विपिन-बहार

लखो रे मन, वृंदा विपिन-बहार। जहँ विहरति वृषभानुनन्दिनी, छविनिधि नंदकुमार। जहँ चिन्मय सब जीव चराचर, जहँ राधे सरकार। जहँ बसंत ऋतू वास करत नित, भ्रमर करत...

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किशोरी मोरी अब न लगाओ बार

किशोरी मोरी अब न लगाओ बार, रसिकन मुख सुनी दीन को, आदर यही दरबार। - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, प्रेम रस मदिरा, दैन्य माधुरी (33) हे मेरी किशोरी...

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सुनो मन! यह अनन्य की रीत

सुनो मन! यह अनन्य की रीत। गौर श्याम प्रिय परिजन तजी कहुं, करत न सपनहु प्रीत। जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, प्रेम रस मदिरा, सिद्धांत माधुरी (119) ...

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बलि जाऊं लाली सुकुमार की

मैं अत्यंत कृपालु श्री राधा पर बलिहारी जाता हूँ, जो सुकुमारी हैं, अभिरामिनी अलमस्त गज के समान जिनकी चाल है, और जो श्री कृष्ण की स्वामिनी हैं।

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रटो रे मन! छिन छिन श्यामा श्याम

अरे मन! ‘श्यामा-श्याम’ इस युगल नाम को प्रत्येक क्षण रटता रह। यह श्यामा- श्याम सच्चिदानन्द ब्रह्म के ही दो अभिन्न स्वरूप हैं। [1] अरे मन! इनके नाम को श...