विषय-चर्चा बहुत हो चुकी, इसे बन्द करो क्योंकि यह कोटि-कोटि नरकों के समान घृणित है। श्रुति-कथा भी व्यर्थ श्रम ही है। अहो हमें तो कैवल्य मुक्ति से भय प्...