मेरे हृदय को चुराने वाले हे प्रिय नंदनंदन (श्रीकृष्ण), कृपया अपनी कृपामयी दृष्टि से मेरी ओर निहारिये। आप मक्खन से भी अधिक मृदुल एवं आपके अंग कमल से भी...