shri bindu
Biography & History
shri bindu Collected Verses
न मैं घनश्याम तुमको दुःख से घबराकर के छोडूंगा
इस दोहे में एक भक्त भगवान कृष्ण से प्रेमपूर्वक झगड़ कर रहा है: हे भगवान कृष्ण, मैं अपने कष्टों से भयभीत होकर तुम्हें नहीं छोड़ूँगा। अगर मुझे तुम्हें छ...
भक्त बनता हूँ मगर अधमों का सिरताज भी
मैं स्वयं को भक्त मानता हूँ, परन्तु वास्तव में पापियों का मुकुट मणि हूँ। ब्रज के भगवान श्री कृष्ण भी मेरे पाखंड पर हंसते हैं। [1] इस समस्त संसार में ...
कन्हैया को एक रोज़ रोकर पुकारा
एक दिन मैंने आँसुओं से श्री कृष्ण को पुकारा और कहा, "मैं चाहे अच्छा हूँ या बुरा, पर मैं केवल आपका हूँ।" [1] श्री कृष्ण ने पूछा, "तुमने मुझे पाने के ल...
जब दर पे तुम्हारे ही अधमों का ठिकाना है
हे श्री राधा कृष्ण, यदि आपके चरणों में ही अधम जीवों का कल्याण है फिर समस्त कष्टों को सहना मेरे भाग्य में ही क्यों है। [1] यदि आप मुझे इस भव सागर से त...
मेरी और मोहन की बातें
मेरी और मोहन के बीच की बातें या तो वे जानते हैं या मैं। मेरे दिल के दुख दर्द भरी बातें या तो वे जानते हैं या मैं। [1] अब उनकी याद ह्रदय में एक रूप मे...
सदा श्याम श्यामा पुकारा करेंगे
हम सदा श्याम श्यामा पुकारा करेंगें और उनका नित्य नवल रूप निशिदिन निहारा करेंगें। [1] यमुना तट में सदा ब्रज की कुंजों में विचरते हुए ही अपने जीवन को स...
मैं घनश्याम को देखता जा रहा हूँ
मैं श्री कृष्ण को नित्य निहार रहा हूँ। मैं उनकी झलकियों पर मुग्ध हो रहा हूँ। [1] जैसे ही मैंने श्याम सुंदर की ओर देखा, उन्होंने मेरा सब कुछ लूट लिया ...