shri brajavasidasa
Biography & History
shri brajavasidasa Collected Verses
बार बार मनाय युग पद
हे युगल सरकार (श्री राधा-कृष्ण)! आपके चरणों में बारम्बार मेरी यही विनती है कि किसी प्रकार मुझे वृन्दावन की रज बना दीजिए, जिससे मैं नित्य ही आपके चरण-क...
अब देहु ब्रज को वास मुहिं प्रभु, आश यह मेरे हिये
अब देहु ब्रज को वास मुहिं प्रभु, आश यह मेरे हिये। रेणु तृण द्रुम लता खग मृग, होहिं जो तुम्हरे किए॥ - श्री ब्रजवासीदास, ब्रज विलास हे प्रभु, मेरे हृद...
श्री वृंदावन धाम की, शोभा परम पुनीत
श्री वृन्दावन धाम की महिमा अत्यंत पवित्र और अलौकिक है; उसका यथार्थ वर्णन कोई भी कवि पूर्णतः नहीं कर सकता, क्योंकि वह मन, बुद्धि और वाणी की सीमा से परे...
अब ये लोचन श्याम के सखी हमारे नाहिं
हे सखी, अब ये नेत्र मेरे नहीं रहे; ये तो श्री श्यामसुंदर के अधिकार में चले गए हैं। इनमें उनका ही रूप-रस बस गया है और वे इन अँखियों में निरंतर निवास कर...
महिमा अमित अपार श्री वृंदावन धाम की
श्री वृंदावन धाम की महिमा अपरम्पार है जहां परब्रह्म भगवान श्री हरि नित्य विहार परायण हैं।
हम हित कीनों श्यामसों
मैंने लोक-लाज और कुल की मर्यादा को छोड़कर केवल उस श्यामसुन्दर से ही प्रेम किया है। प्रेम तो वास्तव में उसी से करना चाहिए, जिससे हमारी आत्मा की शाश्वत औ...
युगल किशोर स्वरूप वर वृंदावन रसखान
साक्षात रस की ख़ान हैं, वृंदावन की दिव्य जोड़ी, श्री राधा कृष्ण, सदा नवीन दूल्हा एवं दुल्हन ही रहते हैं।
प्रेम भरे छविसों भरे
प्रेम में भरे, सुंदर छवि से भरे हुए, आनंद एवं उल्लास से भरे, युगल माधुरी के रस से भरे श्री श्यामा श्याम ब्रज में नित्य क्रीड़ा करते हैं।
सुखनिधि रसनिधि रूपनिधि, वृंदाविपिन उदार
श्री वृन्दावन धाम सुख, रस एवं रूप की अपार निधि है, जिसकी महिमा का वर्णन सरस्वती, नारद, शेष, शिव एवं चारों वेद करते हैं।
जब परशे प्यारीचरण परम प्रीति नन्दनंद
जब श्रीकृष्ण ने परम प्रीतिपूर्वक श्री राधा के चरणों का स्पर्श किया, तो उनका मान समाप्त हो गया, और वे प्रसन्नचित्त हो गईं जिससे दोनों के विरह-संताप का ...
सब ब्रज गोपिन के बसी बात यहै मन आन
ब्रज की समस्त गोपियों के हृदय में केवल एक ही भावना व्याप्त है - 'श्री कृष्ण और श्री राधा दोनों मिले रहें', और यही युगल स्वरूप रात-दिन उनके ध्यान का एक...
अति अद्भुत लावण्य निधि श्री वृन्दावन चन्द
श्री वृंदावन धाम सौंदर्य और माधुर्य की अद्भुत निधि है, जिसका वर्णन करने में वेद भी असमर्थ हैं, जहाँ रसिक नवल श्यामसुंदर नित्य विहार करते हैं।
श्याम सदा वश प्रीतिके तीन भुवन विख्यात
श्यामसुन्दर सदा केवल प्रेम के ही अधीन रहते हैं—यह सत्य तीनों लोकों में सुविख्यात है। सच्चे प्रेम के बिना नन्दमहाराज के पुत्र श्रीकृष्ण की प्राप्ति कदा...
शोभा बृन्दाविपिन की, बरणी सकै अस कौन
श्री वृन्दावन धाम की शोभा और सुन्दरता का वर्णन भला ऐसा कौन है जो कर सके जब शेषनाग, महादेव, गणेश जी और ब्रह्मा जी भी उसकी महिमा का पार नहीं पा सकते।
फिरत चरावत गाय, श्री वृंदावन जे चरण
जहाँ स्वयं परब्रह्म भगवान श्री कृष्ण गाय चराते हुए श्री वृन्दावन की भूमि पर अपने चरण रखते हैं, वे चरण भक्तों को असीम सुख प्रदान करने वाले हैं और ब्रजव...
नवल कुंज नवनागरी, नव नागर नंदनन्द
नवल निकुंजों में नवीन-नागरी (श्री राधा) और नूतन-नागर नंदनन्दन (श्री कृष्ण) विराजमान हैं। आज प्रेम का सागर अपनी मर्यादाओं को त्यागकर उमड़ पड़ा है, जहाँ...
अब सन्तन की मण्डली
सबसे पहले मैं संतों की मण्डली को सिर झुकाकर प्रणाम करता हूँ, क्योंकि उनकी कृपा के बिना भगवान हरि का यश-गान करना संभव ही नहीं है।
प्रेम भरे छविसों भरे भरे अनन्द हुलास
प्रेम और सौंदर्य से परिपूर्ण, हृदय में आनन्द और उल्लास लिए, युगल माधुरी के रस से ओत-प्रोत दिव्य दंपति (श्री राधा-कृष्ण) ब्रज में मधुर विहार करते हैं।
छिन छिन परसत चरणकर
श्री कृष्ण क्षण-क्षण में श्री राधा के श्री चरणों को अपने हाथों से स्पर्श कर रहे हैं, और क्षण-क्षण में उनकी बलैयां ले रहे हैं (न्योछावर हो रहे हैं)। वे...