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Biography & History

Vaishnava saint of the Braj tradition.

shri gadadhar bhatta Collected Verses

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निर्तत राधा नन्द किशोर

श्री राधा कृष्ण नृत्य कर रहे हैं। सहचरियाँ ताल मृदंग इत्यादि बजा रही हैं और बीच बीच में मोहन श्री कृष्ण मुरली की तान उस ताल से मिला कर बजा रहे हैं। [1...

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नित्यानंद कदम्ब केलि वृंदावन शोभा

श्री वृन्दावन की वह दिव्य शोभा, जहाँ कदम्ब के वृक्षों के नीचे श्री राधा-कृष्ण की नित्य आनंदमयी लीलाएँ (केलि) होती रहती हैं, अत्यंत अद्भुत है। उस अनुपम...

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सुखद वृंदावन सुखद यमुना तट

श्री वृन्दावन सुखमय है, श्री यमुना तट सुखमय है एवं वहाँ के कुञ्ज भवन सुखमय है जहाँ हिंडोरा की रचना हुई है। लता-पता सुखमय है, फल-फूल सुखमय है, बहती हुई...

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श्री वृंदावन योगपीठ गोविंद निवासा

श्री वृंदावन धाम गोविंद से मिलन का उनका प्रकट निज निवास स्थल है, वहाँ श्री गदाधर भट्ट जी चरण-शरण में रहकर सेवा की आशा कर रहे हैं।

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हों व्रज मागनों जू व्रज तजि अंत न जाऊँ जू

मैं केवल ब्रज का वास माँगता हूँ और ब्रज को त्यागकर कभी कहीं नहीं जाऊँ। इस भूमंडल पर भले ही बड़े-बड़े धनवान, राजा, दानी और सुजान हों, परंतु न तो किसी क...

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मेरे कलिकल्मष कुल नासे

श्री यमुना जी का दर्शन, समस्त कलि कल्मषों का निवारक है। [1] समस्त प्रकार के दोष इस प्रकार बह जाते हैं जैसे सिंह को देख कर हिरणों का समूह भाग जाता है।...

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सखी, हौं स्‍याम रंग रँगी

हे सखी मैं श्यामसुंदर के रंग में रंगी हूं। श्री श्याम सुंदर के सुंदर स्वरूप को निहार कर मैं बिक चुकी हूँ, और उसकी रूप माधुरी में सराबोर हो चुकी हूँ। [...

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यह सुख जो हृदय रहे

जब श्री प्रिया-प्रियतम का वृंदावन रस हृदय में रहता है, तब वह हृदय की समस्त मलिनताओं एवं विकारों को स्वतः ही भस्म कर देता है, जिसके फलस्वरूप चित्त इधर-...

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युगल वर आवत हैं गठ जोरें

युगल वर श्री श्यामा श्यामा एक दूसरे का आलिंगन कर आ रहे हैं, जिनके संग श्री वृषभानु नंदिनी [श्री राधिका जू] सुशोभित हो रही हैं, जिसको निहार कर श्री ललि...

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अंग संग सो प्रेम बरखत सकल सुख की मूरि

श्री गदाधर भट्ट जी कहते हैं कि जिनके अंग-संग से साक्षात प्रेम की ही वर्षा होती है, जो समस्त सुखों की आधार हैं, ऐसी श्री राधे जू की चरण-रज मैं अपने सिर...

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जयति श्री राधिके सकल सुख साधिके

कृष्ण दृग भृंग विश्राम हित पद्मिनी, कृष्ण दृग मृगज बन्धन सु डोरी। कृष्ण अनुराग मकरंद की मधुकरी, कृष्ण गुण गान रस सिन्धु बोरी॥ [2] परम् अदबुद अलौकिक म...