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Biography & History

Vaishnava saint of the Braj tradition.

shri govind svami Collected Verses

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श्याम ही सुन्दर श्याम ही अलकें

श्याम वर्ण वाले श्री कृष्ण अत्यंत ही सुंदर हैं, जिनके श्याम रंग की ही अल्कें एवं बेनी अत्यंत भारी हैं। श्याम रंग की ही भौंहें एवं अखियों में भी श्याम ...

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झूलत सुरंग हिंडोरे राधा मोहन

श्री राधा मोहन सुंदर रंगों से युक्त हिंडोरे पर झूलत झूल रहे हैं। अलग अलग रंगीन वस्त्रों में ब्रज वधुएं सुशोभित हैं। [1] वह सभी राग मल्हार के सात सुर ...

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मुख सों मुख मिलाय देखत आरसी

श्री श्यामाश्याम अपने श्री मुख को मुख से मिला कर आईने में अपनी छवि देख रहे हैं। ऐसा प्रतीत होता है जैसे पूर्णिमा का चंद्र एक पूर्ण विकसित नीले कमल के ...

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कुँवर चलो जू आगे

श्री कृष्ण गह्वर के भीतर चलते हैं जहाँ मोर मधुर स्वर में बोल रहे हैं। समस्त गह्वर वन के सभी वृक्ष फल फूल रहे हैं और कोयल मधुर स्वर से गान कर रही है। ...

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लाल ही लाल के लाल ही लोचन

(राग धनाश्री) लाल ही लाल के लाल ही लोचन, लालन के मुख लाल ही बीरा। [1] लाल बनी कटि काछनी लाल की, अरु लाल के सीस पे लाल ही चीरा। [2] लाल ही बाग बने अति ...

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पीरे कुन्डल पीरे नूपुर

आज श्री कृष्ण पीले कुंडल, पीले नूपुर एवं पीला ही पीताम्बर ओढ़ कर खड़े हैं। उनकी कटि काछनी भी पीली है जिसके पट का छोर भी पीला है। [1] श्री कृष्ण ने ...

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झूलत सुरंग हिंडोरे राधामोहन

सुन्दर रंगों से चित्रित झूले पर श्री राधा कृष्ण झूला झूल रहे हैं। अलग-अलग वर्णों के वस्त्र धारण किये हुए सखियाँ उनके चारों ओर खड़ी हैं। [1] सखियाँ सभ...

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सखी री पोढ़े राधा रवन

श्री गोविन्द स्वामी किसी सखी से कहते हैं "अरी सखी, श्री राधा कृष्ण निकुंज में विश्राम कर रहे हैं, इस समय वहां किसी का भी आना जाना नहीं होता।" [1] मेर...

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कहा करों बैकुंठहि जाय

मैं वैकुंठ जाकर क्या करूँगा जहां न वंशीवट है, न यमुना जी हैं, न गोवर्धन है और न ही नंद की गाय हैं। [1] ब्रज की तरह जहां न तो लता कुंज हैं जहां ऐसे सु...

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काले ही मोहन, काले ही सोहन

श्री श्याम सुंदर जो काले [श्याम] वर्ण के हैं , मन को सुहाने वाले मोहन, काली कालिन्दी (यमुना) के तट पर आए। [1] काली कालिन्दी में एक काली सी नागिन ने अ...

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हमें ब्रज-लाड़िले सों काज

मुझे तो एकमात्र ब्रज के लाड़िले श्री कृष्ण से ही काम है। मुझे यश और अपयश का कोई भय नहीं है, यदि मुझे कोई बुरा कहे या भला, आज कुछ भी कहे, मुझे अब किसी क...

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राजत दंपति कुंजमहल में

नित्य दंपति श्री श्यामाश्याम कुंजमहल में विराजे हैं। समस्त श्रृंगार से परिपूर्ण दोनों एक सेज पर एक-दूसरे के कंठ में भुजा डाले बैठे हैं। [1] महाप्रेम ...

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अति सुख पायौ सुन्दरी

श्री वृन्दावन के इस अद्भुत विलास में मेरे मन ने अति सुख पाया है। जब मेरे प्रभु श्री श्यामसुंदर की मुझे प्राप्ति हो गई, तब मेरी समस्त आशाएँ पूर्ण हो गई...

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झूलत नवल बिहारी हिंडोरे

नवल बिहारी श्री कृष्ण आज अपनी प्राण-प्यारी वृषभानुनंदिनी श्री राधा के संग झूला झूल रहे हैं। [1] श्री राधा का नीलाम्बर (नीला वस्त्र) और श्री कृष्ण का ...

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बाँके आसन बाँके सिंघासन

श्री बाँके बिहारी का आसन और सिंहासन बाँका है, और बाँके तकियों की छवि भी अत्यंत सुंदर है। [1] उनका रास और विलास भी बाँका है, और श्री राधा जू भी बाँकी ...

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मनमोहना रसमत्त पियारों

मनमोहना रसमत्त पियारों, छाँड़ि सकल कुल लाज। जस अपजस कोऊ कहो, मोहि नाहिंन काहू सों काज॥ - श्री गोविन्द स्वामी, श्री गोविन्द स्वामी जी की वाणी (128.1) ...

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बेठे दोउ कुंज मंडप पिय प्यारी

श्री प्रिया प्रियतम कुंज मंडप में बैठे हैं। श्री कृष्ण चन्द्र दूल्हा बने हैं और श्री राधिका दुल्हन। [1] श्री कृष्ण के सिर पर लाल पगड़ी और नवल सेहरा सु...

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विधाता बिधहूँ न जानी

ऐसा प्रतीत होता है मानो विधाता विधि से अनभिज्ञ है। श्री कृष्ण के सुन्दर वदन का पान करने के लिए उन्होंने मेरे रोम-रोम में आँखें नहीं दी, यह बात उचित नह...

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जा पथ कौं पथ लेत महामुनि

जिस पथ को पाने के लिए महामुनि नयन और नासिका को मूँदकर ध्यान करते हैं। [1] वेद, जिसके भेद को न पाकर पछताते हैं। [2] वही पथ श्री हरिदास जी ने प्राप्त ...

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आवत जात हौं हार परी

यह बरसाना के मानगढ़ का पद है एवं सुंदर लीला मानगढ़ की प्रस्तुत की गई है। श्री गोविंद स्वामी कहते हैं कि राधारानी का मान शिखर के नीचे से शुरू हुआ और जै...

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कृपा अवलोकन दान दैरी

कृपया मुझे अपनी कृपा-दृष्टि का वरदान प्रदान करें! हे श्री वृषभानु दुलारी, वह सबसे बड़ा उपहार है, जिसे पाने के लिए मेरी आँखें चकोर पक्षी की तरह प्यासी ...

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प्रीतम प्रीत ही ते पैये

केवल प्रेम ही प्रियतम को पाने का एकमात्र मार्ग है। [1] भले ही आप रूप, गुण, शील तथा सुंदरता से संपन्न हों, परन्तु इन सब से प्रीतम नहीं प्रसन्न होने वाल...

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हमें बृजराज लाड़िले सों काज

मेरे एकमात्र चिंतन व्रज के भगवान श्रीकृष्ण हैं। [1] मुझे यश या अपयश का कोई भय नहीं है, और अगर कुछ भी कहने की आवश्यकता है, तो मैं इसे आज कहूंगा! [2] मु...